दिल्ली हाईकोर्ट में 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में नया मोड़, जमानत पर फैसला फिर टला

नई दिल्ली, 12 मार्च 2026 – चर्चित 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग और जबरन वसूली मामले में एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंचती दिखाई दे रही है। में अभिनेत्री सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई फिलहाल टाल दी गई है। बार-बार न्यायाधीशों द्वारा मामले से स्वयं को अलग करने (रिक्यूज़) के कारण इस हाई-प्रोफाइल केस में निर्णय में देरी हो रही है।
बार-बार बदल रही पीठ
गुरुवार को न्यायमूर्ति ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि मामले को अगली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।
इससे पहले भी न्यायमूर्ति और न्यायमूर्ति इस प्रकरण की सुनवाई से अलग हो चुके हैं।
इतना ही नहीं, अक्टूबर 2025 में न्यायमूर्ति के स्थानांतरण के बाद इस मामले से जुड़ी करीब 17 जमानत याचिकाएँ नई पीठ को भेज दी गई थीं, जिनमें लीना मारिया पॉल की याचिका भी शामिल थी।
सुप्रीम कोर्ट का पहले से निर्देश
इस मामले को लेकर पहले ही हाईकोर्ट को निर्देश दे चुका है कि जमानत याचिकाओं पर तीन सप्ताह के भीतर फैसला किया जाए। हालांकि, लगातार बदलती पीठ और सुनवाई टलने के कारण 2024 से लंबित यह याचिकाएँ अब तक तय नहीं हो पाई हैं।
लीना मारिया पॉल की दलील
लीना मारिया पॉल, जो कथित मास्टरमाइंड की पत्नी हैं, ने अपनी जमानत याचिका में लंबी हिरासत को प्रमुख आधार बताया है। उनका कहना है कि वह करीब तीन साल सात महीने से जेल में हैं।
उनके वकीलों ने अदालत में यह भी दलील दी कि अन्य महिला आरोपियों को राहत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर उन्हें भी जमानत मिलनी चाहिए। साथ ही (PMLA) में महिलाओं के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों का भी हवाला दिया गया।
मामला क्यों बना चर्चा का विषय
यह केस केवल बड़े आर्थिक अपराध से जुड़ा मामला ही नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की जटिलताओं को भी सामने लाता है। लगातार जजों के रिक्यूज़ होने से सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही, जिससे न्याय मिलने में देरी का मुद्दा भी उठ रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जजों का रिक्यूज़ करना न्यायिक परंपरा का हिस्सा है, लेकिन इससे मुकदमे की गति प्रभावित हो सकती है।
आगे क्या
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अगली पीठ कब इस मामले की सुनवाई शुरू करती है और क्या लीना मारिया पॉल व अन्य आरोपियों को जमानत मिल पाती है। फिलहाल यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा की तरह देखा जा रहा है।
