अमरावती अकाउंट रेंटल रैकेट: बैंक खाते किराए पर लेकर साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, पुलिस ने खोला ठगों का नया नेटवर्क

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अमरावती में पुलिस ने एक बड़े अकाउंट रेंटल रैकेट का खुलासा किया है, जिसमें साइबर ठग लोगों के बैंक खाते किराए पर लेकर ऑनलाइन ठगी की रकम को ट्रांसफर कर रहे थे। इस नेटवर्क के जरिए अपराधी अपनी पहचान छिपाकर साइबर फ्रॉड को अंजाम देते थे। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और लोगों को बैंक खाते व निजी जानकारी साझा न करने की चेतावनी दी है।

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महाराष्ट्र के अमरावती में पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों के बैंक खाते किराए पर लेकर (Account Rental) उनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी के पैसों को घुमाने के लिए करता था। यह मामला साइबर अपराध की दुनिया में तेजी से बढ़ रहे एक नए तरीके को उजागर करता है, जिसमें सामान्य लोगों के बैंक खाते ही ठगों के लिए अपराध का माध्यम बन जाते हैं।

🔹 बैंक खाते किराए पर लेकर करते थे ठगी

जांच में सामने आया कि साइबर ठग ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे, जिन्हें पैसों की जरूरत होती थी। उन्हें थोड़े पैसे देने का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर या बैंकिंग जानकारी का इस्तेमाल किया जाता था।

इन खातों में साइबर फ्रॉड से हासिल रकम जमा की जाती थी और फिर उसे कई खातों के जरिए अलग-अलग जगह ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि पुलिस की जांच से बचा जा सके।

🔹 कैसे चलता था अकाउंट रेंटल रैकेट?

  • ठग लोगों से संपर्क कर बैंक खाता उपलब्ध कराने का लालच देते थे।
  • खाता धारक को हर महीने या हर ट्रांजैक्शन के बदले पैसे दिए जाते थे।
  • ठग उसी खाते का उपयोग धोखाधड़ी की रकम जमा करने के लिए करते थे।
  • पैसा आने के बाद उसे तुरंत दूसरे खातों या डिजिटल वॉलेट में भेज दिया जाता था।
  • असली साइबर अपराधी अक्सर पर्दे के पीछे रहते थे।

🔹 पुलिस की कार्रवाई और जांच

अमरावती पुलिस ने मामले की जांच करते हुए संदिग्ध बैंक खातों और लेन-देन की जानकारी जुटाई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हैं और कितनी साइबर ठगी की रकम इन खातों के जरिए भेजी गई।

पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी या ऑनलाइन बैंकिंग जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दें।

🔹 साइबर अपराध में नया खतरा

पहले साइबर ठग सीधे लोगों को फोन, फर्जी लिंक या ऐप के जरिए ठगते थे, लेकिन अब वे बैंक खातों को किराए पर लेकर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों में खाता उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।

🔹 कैसे बचें?

✅ अपना बैंक खाता किसी को किराए पर न दें।
✅ एटीएम कार्ड और बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
✅ अनजान लोगों के कहने पर पैसे के लेन-देन में शामिल न हों।
✅ साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।

निष्कर्ष

अमरावती का अकाउंट रेंटल रैकेट यह दिखाता है कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। थोड़े से लालच में बैंक खाता उपलब्ध कराना किसी व्यक्ति को भी गंभीर कानूनी परेशानी में डाल सकता है। जागरूकता और सावधानी ही साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।

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