पिहोवा में किसान महापंचायत आज, धान खरीद से लेकर दूध और गन्ने के रेट तक उठेंगे अहम मुद्दे

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पिहोवा, 10 सितंबर 2026। हरियाणा के किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर आज पिहोवा अनाज मंडी में राज्यस्तरीय किसान महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। इस महापंचायत में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से किसान प्रतिनिधि और विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी भाग ले रहे हैं। बैठक में कृषि क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों, फसलों की खरीद व्यवस्था, किसानों को मिलने वाले दाम और डेयरी व गन्ना उत्पादकों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।

किसान संगठनों का कहना है कि मौजूदा समय में किसानों के सामने उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ बाजार और सरकारी खरीद व्यवस्था से जुड़ी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में सरकार के सामने अपनी मांगों को मजबूती से रखने और उनके समाधान के लिए आगे की रणनीति तैयार करना महापंचायत का प्रमुख उद्देश्य है।

धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की मांग

महापंचायत में धान की सरकारी खरीद का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा रहा है। किसान संगठनों की मांग है कि धान की सरकारी खरीद 15 सितंबर से शुरू की जाए, ताकि मंडियों में फसल पहुंचने के बाद किसानों को बिक्री के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।

किसानों का कहना है कि धान की कटाई का समय शुरू होने के साथ मंडियों में आवक बढ़ने लगती है। यदि सरकारी खरीद समय पर शुरू नहीं हुई तो किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाई हो सकती है। मंडियों में भीड़ बढ़ने के साथ भंडारण, परिवहन और भुगतान से संबंधित समस्याएं पैदा होने की आशंका रहती है।

किसान प्रतिनिधियों का जोर इस बात पर है कि खरीद व्यवस्था को समय रहते व्यवस्थित किया जाए और किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

धान में नमी की सीमा बढ़ाने की मांग

किसान संगठनों ने धान की सरकारी खरीद में निर्धारित नमी सीमा को लेकर भी अपनी मांग रखी है। उनका कहना है कि मौजूदा 17 प्रतिशत नमी सीमा को बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाना चाहिए।

किसानों के मुताबिक कॉम्बाइन मशीन से कटाई के बाद धान में अपेक्षाकृत अधिक नमी रह सकती है। ऐसे में यदि निर्धारित सीमा कम रहती है तो किसानों को फसल सुखाने के लिए अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ सकता है। इससे कटाई के बाद फसल को मंडी तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

महापंचायत में मांग उठाई जा रही है कि खरीद केंद्रों पर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे कॉम्बाइन से कटाई करने वाले किसानों को नमी के मानकों के कारण अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो।

MSP पर बिना कटौती खरीद की मांग

किसानों की एक अन्य महत्वपूर्ण मांग सभी प्रमुख फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर बिना किसी कटौती के सुनिश्चित करने की है।

किसान संगठनों का तर्क है कि खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली, मजदूरी और मशीनरी जैसी लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में फसल का उचित मूल्य मिलना किसानों की आर्थिक स्थिति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

महापंचायत में यह मांग भी रखी जा रही है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसानों को उनकी उपज के निर्धारित मूल्य का पूरा भुगतान मिले। किसान संगठनों का मानना है कि यदि फसल का मूल्य लागत और मेहनत के अनुरूप नहीं मिलता तो कृषि व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ता है।

डेयरी किसानों ने दूध के उचित दाम की उठाई आवाज

किसान महापंचायत में केवल खेती से संबंधित मुद्दे ही नहीं, बल्कि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र की समस्याएं भी चर्चा के केंद्र में हैं। डेयरी किसानों का कहना है कि पशु आहार, चारा, दवाइयों और पशुओं की देखभाल से जुड़े खर्च में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

इन बढ़ती लागतों को देखते हुए डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों ने दूध के दाम में वृद्धि की मांग की है। उनकी मांग है कि उन्हें दूध का ₹80 से ₹100 प्रति लीटर के बीच उचित मूल्य मिलना चाहिए।

किसानों का कहना है कि यदि दूध की बिक्री से मिलने वाली आय और पशुपालन की लागत में संतुलन नहीं रहेगा तो छोटे और मध्यम डेयरी संचालकों के लिए इस व्यवसाय को जारी रखना मुश्किल हो सकता है। कई किसान इसे खेती के साथ अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन मानते हैं, इसलिए डेयरी क्षेत्र की आर्थिक व्यवहार्यता पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।

गन्ने के दाम ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग

महापंचायत में गन्ना किसानों की समस्याओं पर भी विशेष चर्चा प्रस्तावित है। किसान संगठनों की प्रमुख मांग है कि गन्ने का मूल्य बढ़ाकर कम से कम ₹600 प्रति क्विंटल किया जाए।

किसानों का कहना है कि खेती की लागत बढ़ने के बावजूद गन्ने के मूल्य में अपेक्षित स्तर पर बढ़ोतरी नहीं हुई है। इससे गन्ना उत्पादकों की आय प्रभावित हो रही है। किसान संगठनों के अनुसार पर्याप्त मूल्य न मिलने की वजह से कुछ क्षेत्रों में गन्ने की खेती के प्रति किसानों का रुझान कम हो रहा है और गन्ने का रकबा घटने की स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है।

किसान प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि गन्ने का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाए तो किसानों को फसल उत्पादन जारी रखने के लिए बेहतर प्रोत्साहन मिलेगा।

आंदोलन की आगे की रणनीति पर भी होगी चर्चा

पिहोवा की राज्यस्तरीय किसान महापंचायत को केवल मांगों को सामने रखने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। किसान संगठन इस बैठक के माध्यम से आगे की रणनीति पर भी विचार कर रहे हैं।

संगठनों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो किसानों को राहत मिल सकती है। वहीं, यदि प्रमुख मांगों पर समाधान नहीं निकला तो भविष्य में आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाने के विकल्पों पर चर्चा की जाएगी।

महापंचायत में किसान प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को सामने रखकर सामूहिक रणनीति तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग मुद्दों को एक मंच पर लाकर सरकार के सामने संगठित तरीके से मांग रखना है।

किसानों के लिए खरीद व्यवस्था सबसे अहम

धान की खरीद का मौसम किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान मंडियों में फसल की आवक तेजी से बढ़ सकती है। इसलिए किसान संगठनों का जोर समय पर सरकारी खरीद, पर्याप्त खरीद केंद्र, स्पष्ट गुणवत्ता मानक और सुचारु भुगतान व्यवस्था पर है।

किसानों का कहना है कि केवल समर्थन मूल्य घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस मूल्य पर प्रभावी खरीद की व्यवस्था भी जरूरी है। यदि किसान को अपनी फसल बेचने में परेशानी होती है या गुणवत्ता के नाम पर कीमत में कटौती होती है, तो घोषित मूल्य का वास्तविक लाभ उसे नहीं मिल पाता।

सरकार से समाधान की उम्मीद

पिहोवा में आयोजित महापंचायत ऐसे समय हो रही है जब किसान धान की खरीद व्यवस्था और अन्य कृषि संबंधी नीतियों को लेकर अपनी अपेक्षाएं सरकार के सामने रख रहे हैं। धान की खरीद की तारीख, नमी सीमा, MSP पर खरीद, दूध के दाम और गन्ने के मूल्य जैसे मुद्दे सीधे तौर पर किसानों की आय और उत्पादन लागत से जुड़े हैं।

किसान संगठनों की ओर से सरकार से मांग की जा रही है कि इन विषयों पर गंभीरता से विचार किया जाए और व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए किसानों की लागत, बाजार की परिस्थितियों और उत्पादन से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

फिलहाल पिहोवा की महापंचायत में प्रदेशभर से पहुंचे किसान प्रतिनिधियों की नजर सरकार की प्रतिक्रिया और आगे होने वाले फैसलों पर है। बैठक के दौरान लिए जाने वाले निर्णय आने वाले दिनों में किसान संगठनों की गतिविधियों और आंदोलन की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

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