भारत की अध्यक्षता में भोपाल में BRICS संस्कृति बैठक, सांस्कृतिक सहयोग को मिली नई दिशा

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भोपाल। भारत की अध्यक्षता में BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में BRICS Culture Working Group और Culture Ministers’ Meeting का आयोजन 5 से 8 अगस्त 2026 के दौरान किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने संस्कृति, कला, विरासत, रचनात्मक उद्योगों और लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया।

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब BRICS का दायरा और वैश्विक महत्व लगातार बढ़ रहा है। आर्थिक और राजनीतिक सहयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना भी संगठन के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। भोपाल में आयोजित बैठक ने इसी व्यापक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रभावी माध्यम बनाने पर जोर दिया।

संस्कृति को सहयोग और संवाद का माध्यम बनाने पर जोर

BRICS देशों के बीच सहयोग सामान्यतः व्यापार, अर्थव्यवस्था, निवेश और विकास जैसे क्षेत्रों से जोड़ा जाता है, लेकिन सांस्कृतिक साझेदारी भी सदस्य देशों को एक-दूसरे के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अलग-अलग सभ्यताओं, भाषाओं, परंपराओं और कलात्मक विरासत वाले देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद आपसी समझ को मजबूत कर सकता है।

भोपाल की बैठक में इसी विचार को केंद्र में रखते हुए सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और व्यापक बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। कलाकारों, सांस्कृतिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में भी विचार हुआ।

भारत की अध्यक्षता में सांस्कृतिक एजेंडे को मिली प्राथमिकता

BRICS की अध्यक्षता के दौरान भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ सांस्कृतिक संबंधों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम इसी प्राथमिकता का हिस्सा रहा।

भारत की सांस्कृतिक विविधता और हजारों वर्षों पुरानी सभ्यतागत परंपरा इसे अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद के लिए स्वाभाविक केंद्र बनाती है। भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य, लोककलाएं, हस्तशिल्प, साहित्य, योग, वास्तुकला और ऐतिहासिक विरासत विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान रखते हैं।

बैठक के माध्यम से भारत ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि संस्कृति केवल अतीत की विरासत नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के बीच संवाद स्थापित करने का एक प्रभावी माध्यम भी है।

भोपाल का चयन भी रहा महत्वपूर्ण

भोपाल में BRICS से जुड़े इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन का होना मध्य प्रदेश के लिए भी गौरव का विषय रहा। भोपाल ऐतिहासिक विरासत, कला, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। शहर और उसके आसपास मौजूद ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों ने आयोजन को एक विशिष्ट भारतीय संदर्भ प्रदान किया।

मध्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय और लोक संस्कृति भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है। राज्य की पारंपरिक कलाओं, हस्तशिल्प, लोक संगीत और नृत्य की अपनी विशिष्ट पहचान है।

इस तरह भोपाल में आयोजित बैठक केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर भी बनी।

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर चर्चा

आज दुनिया के सामने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की बड़ी चुनौती है। तेजी से बदलती जीवनशैली, शहरीकरण और डिजिटल बदलाव के बीच कई पारंपरिक कलाएं और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराएं संरक्षण की आवश्यकता महसूस कर रही हैं।

BRICS देशों में भी अनेक प्राचीन सभ्यताओं और विविध सांस्कृतिक परंपराओं की मौजूदगी है। ऐसे में इनके संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए आपसी अनुभव साझा करना उपयोगी हो सकता है।

भोपाल बैठक में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और उसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने जैसे विषयों को सहयोग के संभावित क्षेत्रों के रूप में देखा गया। डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके संग्रहालयों, ऐतिहासिक स्थलों, कला और पारंपरिक ज्ञान को अधिक व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं।

कलाकारों और रचनात्मक उद्योगों के लिए नए अवसर

सांस्कृतिक सहयोग का सीधा प्रभाव कलाकारों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों पर भी पड़ सकता है। फिल्म, संगीत, नृत्य, रंगमंच, साहित्य, डिजाइन, हस्तशिल्प और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में BRICS देशों के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

अलग-अलग देशों के कलाकारों के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रम, संयुक्त सांस्कृतिक परियोजनाएं और प्रदर्शनियां सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं।

विशेष रूप से युवा कलाकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे उन्हें अलग-अलग संस्कृतियों को समझने और अपने काम को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

डिजिटल युग में संस्कृति की बदलती भूमिका

इंटरनेट और डिजिटल तकनीक ने संस्कृति के प्रसार का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। आज किसी देश की कला, संगीत या साहित्य को दुनिया के दूसरे हिस्से में बैठे लोग कुछ ही समय में देख और सुन सकते हैं।

BRICS देशों के बीच डिजिटल सांस्कृतिक सहयोग इस क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। डिजिटल संग्रहालय, ऑनलाइन प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक अभिलेखागार और बहुभाषी डिजिटल सामग्री इसके उदाहरण हो सकते हैं।

भारत के लिए यह क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में अनेक भाषाओं और सांस्कृतिक परंपराओं की विशाल विरासत मौजूद है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से इस विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।

युवाओं को जोड़ने की जरूरत

सांस्कृतिक विरासत को भविष्य तक पहुंचाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। यदि युवा पीढ़ी अपनी कला, भाषा और परंपराओं से जुड़ी रहे तो सांस्कृतिक विरासत लंबे समय तक जीवंत बनी रह सकती है।

BRICS देशों के बीच युवा सांस्कृतिक कार्यक्रमों, छात्र आदान-प्रदान, कला कार्यशालाओं और रचनात्मक प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देने से लोगों के बीच संपर्क मजबूत किया जा सकता है।

ऐसे कार्यक्रम केवल संस्कृति की जानकारी देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि युवाओं में दूसरे देशों के प्रति समझ और सम्मान भी विकसित करते हैं।

लोगों के बीच संबंध मजबूत करने का माध्यम

किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन की मजबूती केवल सरकारी स्तर के समझौतों पर निर्भर नहीं करती। लोगों के बीच मजबूत संबंध भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। संस्कृति इस दिशा में प्रभावी भूमिका निभा सकती है।

जब अलग-अलग देशों के लोग एक-दूसरे के संगीत, भोजन, साहित्य, कला और परंपराओं को समझते हैं तो उनके बीच सामाजिक और मानवीय जुड़ाव बढ़ता है। BRICS के संदर्भ में यह संपर्क सदस्य देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी की नींव को और मजबूत कर सकता है।

भोपाल में आयोजित सांस्कृतिक बैठक ने इसी व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखा कि BRICS सहयोग को केवल आर्थिक या राजनीतिक मुद्दों तक सीमित न रखते हुए मानवीय और सांस्कृतिक आयामों तक भी विस्तारित किया जाना चाहिए।

भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा

इस आयोजन को भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। भारत लंबे समय से योग, आयुर्वेद, भारतीय संगीत, नृत्य, साहित्य, सिनेमा और विरासत के माध्यम से दुनिया के विभिन्न देशों के साथ सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाता रहा है।

BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर भारतीय संस्कृति की विविधता को प्रस्तुत करने से भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिल सकती है।

साथ ही, दूसरे BRICS देशों की सांस्कृतिक परंपराओं को समझने से भारत में भी अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का विस्तार होगा।

आगे की राह

भोपाल में 5 से 8 अगस्त तक आयोजित BRICS Culture Working Group और Culture Ministers’ Meeting ने सांस्कृतिक सहयोग के लिए व्यापक संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया। आने वाले समय में इन चर्चाओं को ठोस कार्यक्रमों और संयुक्त पहलों में बदलना महत्वपूर्ण होगा।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विरासत संरक्षण, कलाकारों की आवाजाही, युवा कार्यक्रम, डिजिटल संस्कृति और रचनात्मक उद्योगों में सहयोग BRICS देशों के संबंधों को नई मजबूती दे सकते हैं।

कुल मिलाकर, भारत की अध्यक्षता में भोपाल में हुआ यह आयोजन BRICS सहयोग के सांस्कृतिक आयाम को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर रहा। आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के साथ यदि सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक और मानवीय संबंध भी मजबूत होते हैं, तो BRICS की साझेदारी अधिक व्यापक और टिकाऊ स्वरूप ले सकती है। भारत के लिए यह आयोजन अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने रखने के साथ-साथ अन्य सदस्य देशों की परंपराओं से संवाद बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण मंच बना।

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