रायसीना मेडिटेरेनियन 2025 सम्मेलन: भारत की सक्रिय भूमिका

14 जून 2025 को फ्रांस के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मार्सिले में आयोजित रायसीना मेडिटेरेनियन 2025 सम्मेलन में भारत ने अपनी मज़बूत उपस्थिति दर्ज कराई। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व देश के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया। यह सम्मेलन यूरोप, भूमध्यसागरीय क्षेत्र और भारत के बीच सहयोग को सशक्त करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
सम्मेलन का उद्देश्य
रायसीना मेडिटेरेनियन 2025 सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बदलती वैश्विक चुनौतियों — जैसे समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय शांति — पर विचार-विमर्श करना था। इस मंच पर विभिन्न देशों के नेता, नीति निर्माता, और विशेषज्ञ इकट्ठा हुए ताकि संयुक्त रणनीतियां तैयार की जा सकें।
भारत की प्राथमिकताएँ
डॉ. जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत की विदेश नीति में मल्टीपोलर वर्ल्ड (बहुध्रुवीय विश्व) की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत, फ्रांस और यूरोप के साथ साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने को प्रतिबद्ध है। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, हरित ऊर्जा में निवेश और तकनीकी सहयोग भारत की प्राथमिकताओं में शामिल रहे।
डॉ. जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखना सभी भागीदार देशों की साझा जिम्मेदारी है। भारत ने सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए हरित प्रौद्योगिकियों और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की अपनी योजनाओं पर प्रकाश डाला।
फ्रांस-भारत सहयोग
सम्मेलन के दौरान डॉ. जयशंकर और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बारो के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने, रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और साइबर सुरक्षा पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई। फ्रांस ने भारत की मेक इन इंडिया पहल की सराहना की और उसमें साझेदारी की इच्छा व्यक्त की।
सम्मेलन का वैश्विक महत्व
रायसीना मेडिटेरेनियन सम्मेलन न केवल भारत और यूरोप के रिश्तों को गहराई देता है, बल्कि यह भूमध्यसागरीय क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सतत विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। भारत की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत अपनी भूमिका को जिम्मेदारी और दृढ़ता से निभा रहा है।
