रायगड़ा में जादू-टोने के शक में हत्या, 12 लोग गिरफ्तार
रायगड़ा, ओडिशा, 18 सितंबर 2026: ओडिशा के रायगड़ा जिले से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जहां कथित तौर पर जादू-टोना करने के संदेह में 56 वर्षीय व्यक्ति की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में 12 ग्रामीणों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान काकीतार गांव निवासी पाटिका मटिया के रूप में हुई है। यह मामला गुनुपुर क्षेत्र से जुड़ा है और शुरुआती जांच में हत्या के पीछे अंधविश्वास से पैदा हुआ संदेह सामने आया है।

सड़क हादसा समझा गया था मामला
पुलिस के अनुसार, मटिया 2 सितंबर की शाम घर लौट रहे थे, लेकिन वह अपने घर नहीं पहुंचे। अगले दिन उनका शव नुआलाबा के पास सड़क किनारे एक गड्ढे में मिला। उनके पास मोटरसाइकिल भी पड़ी हुई थी। शुरुआती तौर पर परिस्थितियां ऐसी थीं कि मामला सड़क दुर्घटना का लग रहा था। हालांकि, जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को घटनाक्रम पर संदेह हुआ और संभावित हत्या के कोण से पड़ताल शुरू की गई।
मृतक के परिवार ने उनकी तलाश की थी। शव मिलने के बाद परिवार की ओर से गुनुपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जादू-टोने के शक ने लिया हिंसक रूप
पुलिस की जांच के मुताबिक, कुछ ग्रामीणों को मटिया पर जादू-टोना करने का संदेह था। इसी कथित धारणा के चलते उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ी और घटना वाली रात उन पर हमला किए जाने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने लकड़ी के डंडों से मटिया के साथ मारपीट की, जिससे उनकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद शव और मोटरसाइकिल को गड्ढे में डाल दिया गया, ताकि मामला दुर्घटना जैसा दिखाई दे। हालांकि, जांच के दौरान पुलिस को ऐसे संकेत मिले जिनसे दुर्घटना की कहानी पर सवाल उठे। इसके बाद मामले को हत्या के रूप में जांचा गया।
फोरेंसिक टीम और स्निफर डॉग की मदद
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम और स्निफर डॉग की मदद ली। घटनास्थल से नमूने एकत्र किए गए और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच की गई। जांच के दौरान पुलिस ने कथित रूप से घटना में शामिल लोगों की पहचान की और इसके बाद 12 लोगों को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने बताया कि मामले में इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगे लकड़ी के सामान सहित कुछ अन्य वस्तुएं भी बरामद की गई हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, जांच में मृतक की मोटरसाइकिल और कुछ मोबाइल फोन भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आए हैं।
12 ग्रामीणों की गिरफ्तारी
पुलिस ने इस मामले में काकीतार गांव के 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में बिडिका रामचंद्र, बिडिका रमेश, बिडिका संतोष, मंडांगी लिंगराज, पाटिका मोजेश, पाटिका जोगेंद्र, निमाला कुमारू, बिडिका बदामा, रबी बिडिका, बिडिका कैलाश, बिडिका रामदास और मंडांगी केशब शामिल हैं।
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि गिरफ्तार किया जाना आरोप का हिस्सा है; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपियों को कानूनी रूप से दोषी नहीं माना जाता।
परिवार में पसरा मातम
मटिया के अचानक लापता होने के बाद परिवार के सदस्यों ने उनकी तलाश शुरू की थी। अगले दिन उनका शव मिलने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शुरुआत में दुर्घटना की आशंका के बीच परिवार ने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन जांच में हत्या का संदेह सामने आने के बाद मामले ने अलग रूप ले लिया।
घटना ने स्थानीय स्तर पर भी चिंता पैदा की है। किसी व्यक्ति पर केवल अंधविश्वास या जादू-टोने के संदेह के आधार पर हिंसा करना कानून और मानवाधिकारों दोनों के लिहाज से गंभीर विषय है।
अंधविश्वास के कारण हिंसा पर सवाल
रायगड़ा की यह घटना एक बार फिर इस बात को सामने लाती है कि अंधविश्वास और बिना प्रमाण लगाए गए आरोप किस तरह गंभीर हिंसा का कारण बन सकते हैं। किसी बीमारी, पारिवारिक परेशानी या अन्य सामाजिक समस्या का कारण किसी व्यक्ति को जादू-टोना करने वाला मान लेना वैज्ञानिक आधार नहीं रखता।
ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी धारणाओं के पीछे सामाजिक और शैक्षिक कारणों के साथ-साथ स्थानीय मान्यताओं की भूमिका पर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की ओर से लंबे समय से लोगों में वैज्ञानिक सोच और कानूनी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाता रहा है।
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल घटना के बाद कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। समुदायों में जागरूकता बढ़ाना, अफवाहों की पुष्टि किए बिना उन पर भरोसा न करना और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून का सहारा लेना महत्वपूर्ण है।
पुलिस जांच जारी
फिलहाल रायगड़ा पुलिस मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपियों से जुड़ी जानकारी की जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले सामान और अन्य साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले मृतक और आरोपियों के बीच किसी तरह का विवाद या तनाव था या नहीं।
इस मामले में आगे की जांच और अदालत की कार्यवाही से ही यह स्पष्ट होगा कि घटनाक्रम किस तरह हुआ और प्रत्येक आरोपी की कथित भूमिका क्या थी। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई 12 गिरफ्तारियों तक पहुंच चुकी है और सभी आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
रायगड़ा की यह घटना समाज के सामने एक गंभीर सवाल छोड़ती है—किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अंधविश्वास के आधार पर हिंसा करने के बजाय कानून और तर्कसंगत सोच का रास्ता क्यों न अपनाया जाए। किसी आरोप की सच्चाई तय करने का अधिकार भीड़ या किसी समूह को नहीं, बल्कि कानून और न्याय व्यवस्था को है।