आंगनवाड़ी केंद्रों पर पेयजल संकट, नौनिहालों की सुविधाओं पर सवाल

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

कानपुर देहात। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद कुछ केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। विशेष रूप से स्वच्छ पेयजल, पानी की आपूर्ति और शौचालयों की खराब हालत बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

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आंगनवाड़ी केंद्रों में बड़ी संख्या में छोटे बच्चे प्रतिदिन पहुंचते हैं। ऐसे में इन केंद्रों पर साफ पानी, उपयोग योग्य शौचालय, स्वच्छ परिसर और सुरक्षित वातावरण होना बेहद आवश्यक माना जाता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही शिकायतों के अनुसार कुछ स्थानों पर इन बुनियादी सुविधाओं का समुचित रखरखाव नहीं हो पा रहा है।

RO लगा है, लेकिन पानी की आपूर्ति पर सवाल

कई आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से RO सिस्टम लगाए गए हैं। हालांकि, केवल RO मशीन लगा देना पर्याप्त नहीं है। उसके संचालन के लिए नियमित जलापूर्ति, बिजली, फिल्टर की सफाई और समय-समय पर रखरखाव भी जरूरी होता है।

स्थानीय स्तर पर यह शिकायत सामने आई है कि कुछ केंद्रों पर RO सिस्टम तो मौजूद है, लेकिन पानी की टंकी तक पर्याप्त पानी पहुंचाने की व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। यदि टंकी में पानी ही उपलब्ध नहीं होगा तो शुद्धिकरण संयंत्र का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाएगा, यह अपने आप में महत्वपूर्ण सवाल है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत उपकरण उपलब्ध करा दिए जाते हैं, लेकिन उनके नियमित संचालन और रखरखाव पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता। परिणामस्वरूप कई बार सुविधाएं कागजों पर मौजूद दिखाई देती हैं, जबकि वास्तविक स्थिति अलग हो सकती है।

नल से गंदा पानी आने की शिकायत

पेयजल व्यवस्था से जुड़ी एक अन्य समस्या कुछ केंद्रों पर नलों से साफ पानी के बजाय गंदा या दूषित पानी आने की बताई जा रही है। यदि ऐसी स्थिति किसी केंद्र पर बनी हुई है तो इसे गंभीरता से जांचने की आवश्यकता है, क्योंकि छोटे बच्चों के लिए दूषित पानी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का कारण बन सकता है।

पानी की गुणवत्ता खराब होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। पाइपलाइन में गंदगी, लंबे समय तक टंकी की सफाई न होना, जलस्रोत में समस्या या पाइपों की खराब स्थिति इसके संभावित कारण हो सकते हैं। वास्तविक कारण की जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकती है।

ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा पानी के नमूने की जांच कराने, टंकी और पाइपलाइन का निरीक्षण करने तथा आवश्यक होने पर मरम्मत कराने की जरूरत है।

बच्चों के स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ पानी जरूरी

आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्देश्य केवल बच्चों को बैठने की जगह उपलब्ध कराना नहीं है। यहां बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शुरुआती विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां संचालित होती हैं। केंद्र पर आने वाले बच्चों की उम्र कम होती है, इसलिए स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं का विशेष महत्व हो जाता है।

बच्चों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिलने की स्थिति में उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए पेयजल व्यवस्था को नियमित रूप से जांचना और खराबी सामने आने पर तत्काल सुधार करना आवश्यक है।

विशेषज्ञों की सामान्य सलाह भी यही रहती है कि बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले पेयजल स्रोत साफ और सुरक्षित होने चाहिए। पानी रखने वाली टंकियों की नियमित सफाई तथा जलस्रोत की गुणवत्ता की जांच भी जरूरी है।

टूटे शौचालयों की समस्या भी गंभीर

आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल के साथ शौचालय की सुविधा भी बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन कुछ केंद्रों पर शौचालयों के टूटे होने या उपयोग के योग्य नहीं रहने की शिकायतें सामने आने से स्वच्छता व्यवस्था पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

यदि शौचालय में दरवाजा, पानी, सीट या अन्य जरूरी सुविधाएं खराब हैं तो छोटे बच्चों के लिए उसका इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चों को खुले में शौच के लिए बाहर जाने की मजबूरी हो सकती है।

यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता दोनों के लिहाज से चिंता का विषय बन सकती है। आंगनवाड़ी केंद्रों में शौचालय की नियमित सफाई और मरम्मत की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

सिर्फ निर्माण नहीं, रखरखाव भी जरूरी

सरकारी योजनाओं के तहत किसी केंद्र में RO, पानी की टंकी या शौचालय उपलब्ध करा देना व्यवस्था का पहला चरण है। असली चुनौती इन सुविधाओं को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने की होती है।

RO मशीन में फिल्टर बदलने, टंकी साफ करने, पाइपलाइन की जांच करने और खराब उपकरणों की मरम्मत की जरूरत पड़ती है। इसी तरह शौचालयों की नियमित सफाई और आवश्यक मरम्मत भी जरूरी है।

यदि रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होगी या निरीक्षण नियमित नहीं होगा तो कुछ समय बाद अच्छी सुविधा भी अनुपयोगी हो सकती है। इसलिए विभागीय अधिकारियों को केवल सुविधाओं की उपलब्धता नहीं, बल्कि उनके वास्तविक उपयोग की स्थिति भी देखनी चाहिए।

निरीक्षण व्यवस्था पर भी ध्यान देने की जरूरत

आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर निरीक्षण और समीक्षा की प्रक्रिया होती है। इसके बावजूद यदि किसी केंद्र पर लंबे समय तक पानी या शौचालय जैसी मूलभूत समस्या बनी रहती है तो निरीक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि अधिकारी केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर स्थिति का आकलन करने के बजाय समय-समय पर केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करें। निरीक्षण के दौरान पेयजल, RO, टंकी, शौचालय, बिजली, साफ-सफाई और बच्चों के बैठने की व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखा जाना चाहिए।

यदि किसी केंद्र पर समस्या मिलती है तो उसके समाधान के लिए जिम्मेदारी और समयसीमा भी तय की जानी चाहिए।

शिकायतों का समय पर समाधान जरूरी

ग्रामीण क्षेत्रों में किसी सुविधा के खराब होने की जानकारी स्थानीय लोगों और केंद्र से जुड़े कर्मचारियों को सबसे पहले होती है। ऐसे में शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा उसे गंभीरता से लेना जरूरी है।

पेयजल जैसी समस्या को लंबे समय तक लंबित रखने के बजाय पहले समस्या का कारण पता किया जाना चाहिए। यदि पाइपलाइन खराब है तो उसकी मरम्मत, पानी की टंकी में समस्या है तो उसकी सफाई या मरम्मत और यदि RO सिस्टम खराब है तो तकनीकी जांच कराकर उसे ठीक कराया जाना चाहिए।

इसी तरह जर्जर शौचालयों की मरम्मत या आवश्यकता होने पर पुनर्निर्माण की दिशा में भी कार्रवाई जरूरी है।

ग्रामीणों को कार्रवाई का इंतजार

स्थानीय स्तर पर उठ रही शिकायतों के बीच ग्रामीणों की निगाह अब जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई पर है। लोगों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग मामले को केवल शिकायत के रूप में दर्ज करने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करे।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों से जुड़ी सुविधाओं में लापरवाही की गुंजाइश कम होनी चाहिए। आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

व्यवस्था सुधारने के लिए जरूरी कदम

पेयजल और स्वच्छता संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ बुनियादी कदम नियमित रूप से उठाए जा सकते हैं। इनमें पानी की टंकी की समय-समय पर सफाई, जल गुणवत्ता की जांच, RO सिस्टम का रखरखाव, पाइपलाइन की निगरानी, शौचालयों की मरम्मत और परिसर की नियमित सफाई शामिल है।

इसके साथ ही प्रत्येक केंद्र की सुविधाओं की स्थिति का नियमित रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए। खराब उपकरणों या क्षतिग्रस्त ढांचे की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बाद उसके समाधान की निगरानी भी होनी चाहिए।

बच्चों की सुविधाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत

आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चे ग्रामीण समाज के सबसे छोटे और संवेदनशील वर्ग का हिस्सा हैं। इसलिए उनके लिए उपलब्ध कराई जाने वाली मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

RO मशीन का होना तभी उपयोगी है जब उसमें नियमित रूप से पानी पहुंचे और वह सही तरीके से काम करे। इसी तरह शौचालय का निर्माण तभी सार्थक है जब वह बच्चों के उपयोग के लिए सुरक्षित और स्वच्छ हो।

कानपुर देहात के जिन आंगनवाड़ी केंद्रों पर पेयजल और शौचालय संबंधी शिकायतें सामने आई हैं, वहां वास्तविक स्थिति की जांच कराकर आवश्यक सुधार कराना महत्वपूर्ण होगा। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग इन शिकायतों का संज्ञान लेकर मौके पर निरीक्षण करे और जहां कमियां मिलें, वहां समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित करे।

नौनिहालों के स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं किसी भी आंगनवाड़ी केंद्र की प्राथमिक आवश्यकता हैं। इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और समय पर रखरखाव से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सरकारी सुविधाओं का लाभ वास्तव में बच्चों तक पहुंचे।

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आंगनवाड़ी केंद्रों पर पेयजल संकट, नौनिहालों की सुविधाओं पर सवाल

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 30, 2026

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

कानपुर देहात। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद कुछ केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। विशेष रूप से स्वच्छ पेयजल, पानी की आपूर्ति और शौचालयों की खराब हालत बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

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आंगनवाड़ी केंद्रों में बड़ी संख्या में छोटे बच्चे प्रतिदिन पहुंचते हैं। ऐसे में इन केंद्रों पर साफ पानी, उपयोग योग्य शौचालय, स्वच्छ परिसर और सुरक्षित वातावरण होना बेहद आवश्यक माना जाता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही शिकायतों के अनुसार कुछ स्थानों पर इन बुनियादी सुविधाओं का समुचित रखरखाव नहीं हो पा रहा है।

RO लगा है, लेकिन पानी की आपूर्ति पर सवाल

कई आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से RO सिस्टम लगाए गए हैं। हालांकि, केवल RO मशीन लगा देना पर्याप्त नहीं है। उसके संचालन के लिए नियमित जलापूर्ति, बिजली, फिल्टर की सफाई और समय-समय पर रखरखाव भी जरूरी होता है।

स्थानीय स्तर पर यह शिकायत सामने आई है कि कुछ केंद्रों पर RO सिस्टम तो मौजूद है, लेकिन पानी की टंकी तक पर्याप्त पानी पहुंचाने की व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। यदि टंकी में पानी ही उपलब्ध नहीं होगा तो शुद्धिकरण संयंत्र का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाएगा, यह अपने आप में महत्वपूर्ण सवाल है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत उपकरण उपलब्ध करा दिए जाते हैं, लेकिन उनके नियमित संचालन और रखरखाव पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता। परिणामस्वरूप कई बार सुविधाएं कागजों पर मौजूद दिखाई देती हैं, जबकि वास्तविक स्थिति अलग हो सकती है।

नल से गंदा पानी आने की शिकायत

पेयजल व्यवस्था से जुड़ी एक अन्य समस्या कुछ केंद्रों पर नलों से साफ पानी के बजाय गंदा या दूषित पानी आने की बताई जा रही है। यदि ऐसी स्थिति किसी केंद्र पर बनी हुई है तो इसे गंभीरता से जांचने की आवश्यकता है, क्योंकि छोटे बच्चों के लिए दूषित पानी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का कारण बन सकता है।

पानी की गुणवत्ता खराब होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। पाइपलाइन में गंदगी, लंबे समय तक टंकी की सफाई न होना, जलस्रोत में समस्या या पाइपों की खराब स्थिति इसके संभावित कारण हो सकते हैं। वास्तविक कारण की जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकती है।

ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा पानी के नमूने की जांच कराने, टंकी और पाइपलाइन का निरीक्षण करने तथा आवश्यक होने पर मरम्मत कराने की जरूरत है।

बच्चों के स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ पानी जरूरी

आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्देश्य केवल बच्चों को बैठने की जगह उपलब्ध कराना नहीं है। यहां बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शुरुआती विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां संचालित होती हैं। केंद्र पर आने वाले बच्चों की उम्र कम होती है, इसलिए स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं का विशेष महत्व हो जाता है।

बच्चों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिलने की स्थिति में उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए पेयजल व्यवस्था को नियमित रूप से जांचना और खराबी सामने आने पर तत्काल सुधार करना आवश्यक है।

विशेषज्ञों की सामान्य सलाह भी यही रहती है कि बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले पेयजल स्रोत साफ और सुरक्षित होने चाहिए। पानी रखने वाली टंकियों की नियमित सफाई तथा जलस्रोत की गुणवत्ता की जांच भी जरूरी है।

टूटे शौचालयों की समस्या भी गंभीर

आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल के साथ शौचालय की सुविधा भी बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन कुछ केंद्रों पर शौचालयों के टूटे होने या उपयोग के योग्य नहीं रहने की शिकायतें सामने आने से स्वच्छता व्यवस्था पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

यदि शौचालय में दरवाजा, पानी, सीट या अन्य जरूरी सुविधाएं खराब हैं तो छोटे बच्चों के लिए उसका इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चों को खुले में शौच के लिए बाहर जाने की मजबूरी हो सकती है।

यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता दोनों के लिहाज से चिंता का विषय बन सकती है। आंगनवाड़ी केंद्रों में शौचालय की नियमित सफाई और मरम्मत की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

सिर्फ निर्माण नहीं, रखरखाव भी जरूरी

सरकारी योजनाओं के तहत किसी केंद्र में RO, पानी की टंकी या शौचालय उपलब्ध करा देना व्यवस्था का पहला चरण है। असली चुनौती इन सुविधाओं को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने की होती है।

RO मशीन में फिल्टर बदलने, टंकी साफ करने, पाइपलाइन की जांच करने और खराब उपकरणों की मरम्मत की जरूरत पड़ती है। इसी तरह शौचालयों की नियमित सफाई और आवश्यक मरम्मत भी जरूरी है।

यदि रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होगी या निरीक्षण नियमित नहीं होगा तो कुछ समय बाद अच्छी सुविधा भी अनुपयोगी हो सकती है। इसलिए विभागीय अधिकारियों को केवल सुविधाओं की उपलब्धता नहीं, बल्कि उनके वास्तविक उपयोग की स्थिति भी देखनी चाहिए।

निरीक्षण व्यवस्था पर भी ध्यान देने की जरूरत

आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर निरीक्षण और समीक्षा की प्रक्रिया होती है। इसके बावजूद यदि किसी केंद्र पर लंबे समय तक पानी या शौचालय जैसी मूलभूत समस्या बनी रहती है तो निरीक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि अधिकारी केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर स्थिति का आकलन करने के बजाय समय-समय पर केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करें। निरीक्षण के दौरान पेयजल, RO, टंकी, शौचालय, बिजली, साफ-सफाई और बच्चों के बैठने की व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखा जाना चाहिए।

यदि किसी केंद्र पर समस्या मिलती है तो उसके समाधान के लिए जिम्मेदारी और समयसीमा भी तय की जानी चाहिए।

शिकायतों का समय पर समाधान जरूरी

ग्रामीण क्षेत्रों में किसी सुविधा के खराब होने की जानकारी स्थानीय लोगों और केंद्र से जुड़े कर्मचारियों को सबसे पहले होती है। ऐसे में शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा उसे गंभीरता से लेना जरूरी है।

पेयजल जैसी समस्या को लंबे समय तक लंबित रखने के बजाय पहले समस्या का कारण पता किया जाना चाहिए। यदि पाइपलाइन खराब है तो उसकी मरम्मत, पानी की टंकी में समस्या है तो उसकी सफाई या मरम्मत और यदि RO सिस्टम खराब है तो तकनीकी जांच कराकर उसे ठीक कराया जाना चाहिए।

इसी तरह जर्जर शौचालयों की मरम्मत या आवश्यकता होने पर पुनर्निर्माण की दिशा में भी कार्रवाई जरूरी है।

ग्रामीणों को कार्रवाई का इंतजार

स्थानीय स्तर पर उठ रही शिकायतों के बीच ग्रामीणों की निगाह अब जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई पर है। लोगों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग मामले को केवल शिकायत के रूप में दर्ज करने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करे।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों से जुड़ी सुविधाओं में लापरवाही की गुंजाइश कम होनी चाहिए। आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

व्यवस्था सुधारने के लिए जरूरी कदम

पेयजल और स्वच्छता संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ बुनियादी कदम नियमित रूप से उठाए जा सकते हैं। इनमें पानी की टंकी की समय-समय पर सफाई, जल गुणवत्ता की जांच, RO सिस्टम का रखरखाव, पाइपलाइन की निगरानी, शौचालयों की मरम्मत और परिसर की नियमित सफाई शामिल है।

इसके साथ ही प्रत्येक केंद्र की सुविधाओं की स्थिति का नियमित रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए। खराब उपकरणों या क्षतिग्रस्त ढांचे की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बाद उसके समाधान की निगरानी भी होनी चाहिए।

बच्चों की सुविधाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत

आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चे ग्रामीण समाज के सबसे छोटे और संवेदनशील वर्ग का हिस्सा हैं। इसलिए उनके लिए उपलब्ध कराई जाने वाली मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

RO मशीन का होना तभी उपयोगी है जब उसमें नियमित रूप से पानी पहुंचे और वह सही तरीके से काम करे। इसी तरह शौचालय का निर्माण तभी सार्थक है जब वह बच्चों के उपयोग के लिए सुरक्षित और स्वच्छ हो।

कानपुर देहात के जिन आंगनवाड़ी केंद्रों पर पेयजल और शौचालय संबंधी शिकायतें सामने आई हैं, वहां वास्तविक स्थिति की जांच कराकर आवश्यक सुधार कराना महत्वपूर्ण होगा। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग इन शिकायतों का संज्ञान लेकर मौके पर निरीक्षण करे और जहां कमियां मिलें, वहां समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित करे।

नौनिहालों के स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं किसी भी आंगनवाड़ी केंद्र की प्राथमिक आवश्यकता हैं। इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और समय पर रखरखाव से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सरकारी सुविधाओं का लाभ वास्तव में बच्चों तक पहुंचे।