लातविया में संसदीय चुनाव के लिए मतदान शुरू, रूस-यूक्रेन युद्ध और ड्रोन घटनाओं के बीच सुरक्षा बनी बड़ा मुद्दा
रीगा। यूरोप के बाल्टिक क्षेत्र के देश लातविया में शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। इस बार का चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव, हवाई क्षेत्र में ड्रोन से जुड़ी घटनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता राजनीतिक बहस के केंद्र में है। देश की जनता नई संसद के 100 सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान कर रही है।

लातविया की भौगोलिक स्थिति भी इस चुनाव को विशेष महत्व देती है। यह देश यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य है तथा इसकी सीमाएं रूस और बेलारूस से लगती हैं। ऐसे में यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप के पूर्वी हिस्से में बढ़े सुरक्षा तनाव का असर लातविया की घरेलू राजनीति पर भी दिखाई दे रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान सुरक्षा, रक्षा क्षमता, यूक्रेन के प्रति नीति और रूस के साथ संबंधों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अपने-अपने विचार सामने रखे हैं।
ड्रोन घटनाओं ने बढ़ाई सुरक्षा को लेकर चिंता
हाल के महीनों में बाल्टिक क्षेत्र के हवाई क्षेत्र में ड्रोन के प्रवेश से जुड़ी घटनाओं ने लातविया की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान बढ़ाया है। लातवियाई अधिकारियों के अनुसार, इन घटनाओं का व्यापक संबंध यूक्रेन में चल रहे युद्ध से पैदा हुई क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति से है। इन घटनाओं ने चुनाव के दौरान हवाई सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
लातविया के रक्षा मंत्रालय ने चुनाव अवधि के दौरान अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों से अतिरिक्त सहायता मांगी थी। जर्मनी ने चार यूरोफाइटर लड़ाकू विमानों को अस्थायी रूप से लातविया भेजने की घोषणा की। इटली और तुर्की की ओर से भी अतिरिक्त सहयोग दिया गया। इसका उद्देश्य चुनाव के दौरान हवाई क्षेत्र की निगरानी और किसी संभावित खतरे की स्थिति में प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना था।
रूस-यूक्रेन युद्ध बना चुनावी बहस का प्रमुख हिस्सा
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने लातविया की राजनीति में विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रमुख विषय बना दिया है। लातवियाई सरकार यूक्रेन के समर्थन और रूस पर यूरोपीय प्रतिबंधों को लेकर कड़ा रुख अपनाती रही है। सितंबर में सरकार ने रूस के युद्ध से जुड़े लगभग 3,000 समर्थकों के खिलाफ लागू व्यक्तिगत प्रतिबंधों को आगे तीन वर्षों तक जारी रखने के लिए यूरोपीय संघ के स्तर पर समर्थन जताया।
प्रधानमंत्री एंड्रिस कुलबर्ग्स के नेतृत्व वाला यूनाइटेड लिस्ट गठबंधन यूक्रेन के समर्थन और रक्षा तैयारियों को महत्वपूर्ण मुद्दा बना रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, कुलबर्ग्स ने लातविया की रक्षा क्षमता बढ़ाने और ड्रोन से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया है। दूसरी ओर, कुछ राजनीतिक समूह यूक्रेन को सहायता देने की नीति पर सवाल उठाते हुए बातचीत और घरेलू आर्थिक मुद्दों को अधिक प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं।
रूस के साथ संबंधों पर मतभेद
लातविया में रूस के साथ संबंधों का सवाल केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं है। देश में बड़ी संख्या में रूसी भाषा बोलने वाली आबादी भी रहती है, जिसके बीच रूस-यूक्रेन युद्ध और लातविया की विदेश नीति को लेकर अलग-अलग विचार हैं।
चुनाव अभियान में कुछ दलों ने यूक्रेन के लिए सैन्य सहायता जारी रखने के बजाय शांति वार्ता पर जोर देने की बात कही है। इन दलों का तर्क है कि सरकार को सुरक्षा के साथ-साथ महंगाई, आम लोगों की आर्थिक परेशानियों और जीवन-यापन की लागत जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए। इस तरह चुनाव में विदेश नीति और घरेलू आर्थिक चिंताएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई दे रही हैं।
राजनीतिक मुकाबले में कई दल
लातविया की राजनीति में इस बार भी कई राजनीतिक समूह चुनाव मैदान में हैं। प्रधानमंत्री कुलबर्ग्स की यूनाइटेड लिस्ट को चुनाव से पहले हुए सर्वेक्षणों में प्रमुख दावेदारों में बताया गया है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि किसी एक दल के लिए अकेले सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल करना कठिन हो सकता है। ऐसी स्थिति में चुनाव के बाद गठबंधन सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।
लातविया की संसद, जिसे साएमा (Saeima) कहा जाता है, में कुल 100 सदस्य होते हैं। चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर होता है और किसी राजनीतिक दल या गठबंधन को संसद में प्रवेश के लिए देशभर में कम से कम 5 प्रतिशत मत हासिल करने होते हैं। मतदान पांच निर्वाचन क्षेत्रों के माध्यम से कराया जाता है।
चुनावी सुरक्षा पर विशेष तैयारी
लातवियाई प्रशासन ने चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारी की है। सरकार के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले संभावित खतरों में विदेशी हस्तक्षेप, गलत सूचना, एआई से तैयार सामग्री और डीपफेक, साइबर हमले, तकनीकी बाधाएं, अवैध प्रचार और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली अन्य गतिविधियां शामिल हैं। अधिकारियों ने इन परिस्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाया है।
लातविया की स्टेट सिक्योरिटी सर्विस ने भी चुनाव के दौरान सुरक्षा उपाय बढ़ाने की जानकारी दी है। एजेंसी ने कहा कि वह चुनावी प्रक्रिया और सूचना क्षेत्र में संभावित अवैध प्रभाव की निगरानी कर रही है। एजेंसी ने रूस या अन्य विरोधी देशों की ओर से संभावित दुष्प्रचार और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयासों की आशंका का उल्लेख किया है, हालांकि उसने यह भी कहा कि उस समय तक किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव परिणाम प्रभावित करने के लिए रूस की ओर से कोई महत्वपूर्ण और व्यवस्थित प्रयास सामने नहीं आया था।
मतदान के दौरान भी सतर्कता
हवाई खतरे जैसी स्थिति से निपटने के लिए भी चुनावी व्यवस्था में प्रावधान किए गए हैं। लातवियाई सरकार के मुताबिक, यदि किसी हवाई खतरे के कारण मतदान प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकना पड़े तो मतदान केंद्रों के संचालन समय को बढ़ाने की कानूनी संभावना मौजूद है। केंद्रीय चुनाव आयोग ने ऐसे हालात में मतदान केंद्रों के लिए प्रतिक्रिया प्रक्रियाएं भी तैयार की हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा संबंधी किसी आकस्मिक परिस्थिति के बावजूद मतदाताओं को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिले।
चुनाव का क्षेत्रीय महत्व
लातविया का चुनाव केवल घरेलू राजनीति के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है। बाल्टिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण इसके सुरक्षा फैसलों का संबंध व्यापक यूरोपीय और नाटो सुरक्षा ढांचे से भी है। एस्टोनिया और लिथुआनिया जैसे अन्य बाल्टिक देश भी रूस और बेलारूस की निकटता के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
चुनाव से पहले जर्मनी, इटली और तुर्की की ओर से हवाई सुरक्षा में सहयोग लातविया और उसके नाटो सहयोगियों के बीच सुरक्षा समन्वय को भी रेखांकित करता है। लातवियाई रक्षा मंत्रालय ने इसे चुनाव के दौरान देश के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में सहयोग बताया है।
नतीजों पर रहेगी नजर
शनिवार को होने वाले मतदान के बाद लातविया की नई संसद के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। चुनाव में कई दलों के बीच मुकाबले और संसद में प्रतिनिधित्व हासिल करने वाले दलों की संख्या के आधार पर सरकार गठन के लिए गठबंधन वार्ता महत्वपूर्ण हो सकती है।
कुल मिलाकर, 2026 का लातवियाई संसदीय चुनाव सुरक्षा और विदेश नीति के साथ-साथ घरेलू आर्थिक चिंताओं के बीच हो रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध का क्षेत्रीय प्रभाव, ड्रोन से जुड़ी घटनाएं, नाटो की सामूहिक सुरक्षा, रूस के साथ संबंध और आम नागरिकों के जीवन-यापन से जुड़े सवाल मतदाताओं के सामने प्रमुख मुद्दों के रूप में मौजूद हैं। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि आने वाली संसद इन मुद्दों पर किस तरह की नीतिगत दिशा अपनाती है और विभिन्न राजनीतिक दल सरकार बनाने के लिए किस प्रकार सहयोग करते हैं।