पांच मिनट में पांच इंजेक्शन लगाने के बाद महिला की मौत, झोलाछाप के इलाज पर उठे गंभीर सवाल
कानपुर देहात। जिले में कथित झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच एक बुजुर्ग महिला की इलाज के दौरान मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बुखार से पीड़ित 65 वर्षीय चमेली देवी का इलाज करने पहुंचे एक कथित झोलाछाप ने बेहद कम समय में उन्हें पांच इंजेक्शन लगा दिए। इसके बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उपचार के लिए अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, परिजनों की शिकायत के आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। घटना के बाद से कथित झोलाछाप अपनी क्लीनिक बंद करके फरार बताया जा रहा है।
घर पहुंचकर किया इलाज, कुछ ही देर में बिगड़ी हालत
परिजनों के मुताबिक चमेली देवी पिछले कुछ समय से बुखार से परेशान थीं। इसी दौरान एक स्थानीय व्यक्ति, जिसे परिवार कथित तौर पर चिकित्सक के रूप में जानता था, इलाज के लिए उनके घर पहुंचा। आरोप है कि उसने महिला की स्थिति का समुचित चिकित्सकीय परीक्षण किए बिना दवाएं देने के साथ इंजेक्शन लगाने शुरू कर दिए।
परिजनों का दावा है कि महज कुछ मिनट के भीतर महिला को पांच इंजेक्शन लगाए गए। परिवार के लोगों ने बताया कि इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की हालत सामान्य होने के बजाय लगातार बिगड़ने लगी। उन्हें बेचैनी होने लगी और स्थिति गंभीर होती चली गई।
परिवार ने जब कथित चिकित्सक से महिला की हालत के बारे में जानकारी मांगी तो स्थिति संभालने के बजाय अस्पताल ले जाने की जरूरत महसूस हुई। इसके बाद परिजन महिला को उपचार के लिए निजी अस्पताल लेकर पहुंचे।
निजी अस्पताल से जिला अस्पताल ले जाते समय मौत
बताया जा रहा है कि निजी अस्पताल में चिकित्सकों ने महिला की हालत को गंभीर बताया। इसके बाद परिजनों ने उन्हें बेहतर उपचार की उम्मीद में जिला अस्पताल ले जाने का फैसला किया। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में महिला ने दम तोड़ दिया।
महिला की मौत के बाद परिजनों ने इलाज करने वाले व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित चिकित्सकीय उपचार मिलता तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि महिला की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों की ओर से डायल-112 के माध्यम से भी सूचना दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
परिजनों की तहरीर के आधार पर कथित झोलाछाप के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान इलाज करने वाले व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता, उसके पास मौजूद दस्तावेज, दवाओं और इंजेक्शन से संबंधित जानकारी तथा महिला के उपचार की परिस्थितियों की पड़ताल की जा सकती है।
पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि महिला को कौन-कौन सी दवाएं और इंजेक्शन दिए गए थे तथा उनकी मौत के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या रहा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच में अहम भूमिका निभा सकती है।
घटना के बाद कथित क्लीनिक बंद
महिला की मौत के बाद जिस व्यक्ति पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया गया है, उसकी कथित क्लीनिक बंद मिलने की बात कही जा रही है। परिजनों का आरोप है कि घटना सामने आने के बाद वह मौके से फरार हो गया।
पुलिस उसके बारे में जानकारी जुटाने के साथ उसकी तलाश कर रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर भी सवाल
इस घटना ने ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता के इलाज करने वाले लोगों की गतिविधियों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि जिले में कुछ ऐसे निजी क्लीनिक संचालित हैं, जहां योग्य चिकित्सक की मौजूदगी और वैध अनुमति को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ कथित अवैध क्लीनिकों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से पहले नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। ऐसे में सवाल यह है कि यदि किसी व्यक्ति के पास मरीजों का उपचार करने की आवश्यक योग्यता या अनुमति नहीं है तो उसके द्वारा खुले तौर पर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की स्थिति कैसे बनी रहती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी ऐसे मामलों में संबंधित प्रतिष्ठानों की जांच करना और नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
विभाग ने जांच का दिया भरोसा
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से मामले की जांच किए जाने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की जांच में यह भी देखा जा सकता है कि कथित चिकित्सक के पास मरीजों का उपचार करने के लिए आवश्यक योग्यता और पंजीकरण था या नहीं। इसके अलावा जिस स्थान पर उपचार किया जाता था, उसकी वैधता और वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की भी जांच हो सकती है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आएगा मौत का कारण
महिला की मौत के बाद सबसे अहम पहलू उनकी मृत्यु का चिकित्सकीय कारण है। परिजनों की ओर से इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया गया है, लेकिन किसी व्यक्ति को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले मेडिकल जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मृत्यु के कारणों को समझने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही महिला के उपचार से संबंधित दवाओं, इंजेक्शन और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में उपचार और मौत के बीच कोई स्पष्ट संबंध सामने आता है, तो पुलिस उसी आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।
झोलाछापों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से कथित अवैध क्लीनिकों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बुखार या सामान्य बीमारी के नाम पर भी बिना उचित जांच के मरीजों को दवाएं और इंजेक्शन देना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी मरीज को दवा या इंजेक्शन देने से पहले उसकी बीमारी, उम्र, पूर्व स्वास्थ्य स्थिति, एलर्जी और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय पहलुओं का आकलन करना जरूरी होता है। बिना उचित चिकित्सकीय सलाह के उपचार मरीज के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
चमेली देवी की मौत का मामला अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच के दायरे में है। परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं।
फिलहाल इस घटना ने कानपुर देहात में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, कथित झोलाछापों की गतिविधियों और अवैध क्लीनिकों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत को लेकर गंभीर चर्चा जरूर शुरू कर दी है।