यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर सीमा बढ़ाने की मांग, व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, जालौन। डिजिटल भुगतान व्यवस्था को व्यापारियों के लिए अधिक सुविधाजनक और आर्थिक रूप से संतुलित बनाए जाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, जनपद जालौन ने प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। व्यापार मंडल ने यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर की न्यूनतम सीमा और मासिक अधिकतम शुल्क सीमा में संशोधन किए जाने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई जाने वाली किसी भी व्यवस्था में छोटे और मध्यम व्यापारियों के आर्थिक हितों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

व्यापार मंडल के अनुसार यूपीआई पिछले कुछ वर्षों में देश की भुगतान व्यवस्था का अहम हिस्सा बन गया है। बाजारों, दुकानों, प्रतिष्ठानों और विभिन्न सेवाओं में बड़ी संख्या में ग्राहक यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर रहे हैं। इससे नकदी रखने, खुले पैसे की समस्या और भुगतान की प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम हुआ है। व्यापारियों के लिए भी डिजिटल लेनदेन ने भुगतान प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया है।

एमडीआर को लेकर व्यापारियों की चिंता

व्यापार मंडल ने ज्ञापन में कहा कि सरकार की ओर से 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर निर्धारित किए जाने तथा मासिक अधिकतम एमडीआर सीमा एक लाख रुपये रखने के प्रस्ताव को लेकर व्यापारिक समुदाय में चिंता है। संगठन का तर्क है कि यदि बड़े मूल्य के डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ता है तो इसका सीधा प्रभाव कारोबार की लागत पर पड़ सकता है।

व्यापार मंडल ने कहा कि विशेष रूप से ऐसे छोटे और मध्यम कारोबारी, जिनका कारोबार लगातार डिजिटल भुगतान पर निर्भर हो रहा है, उनके लिए प्रत्येक अतिरिक्त शुल्क महत्वपूर्ण हो सकता है। व्यापारियों का मानना है कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें कारोबारियों को सुविधा मिले और उन पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव भी न पड़े।

2 हजार की जगह 10 हजार रुपये की सीमा की मांग

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की कोर इकाई की बैठक में इस विषय पर चर्चा के बाद एमडीआर लागू होने की न्यूनतम लेनदेन सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया गया। संगठन ने मांग की है कि 2,000 रुपये की मौजूदा प्रस्तावित सीमा को बढ़ाकर 10,000 रुपये किया जाए।

व्यापार मंडल का कहना है कि इससे रोजमर्रा के छोटे और मध्यम मूल्य के डिजिटल लेनदेन पर व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क के दबाव से राहत मिल सकती है। संगठन के मुताबिक यूपीआई की सबसे बड़ी ताकत उसकी व्यापक स्वीकार्यता है और इसे बनाए रखने के लिए शुल्क संबंधी व्यवस्था भी व्यावहारिक होनी चाहिए।

व्यापारियों ने यह भी कहा कि आज ग्राहक छोटी खरीदारी से लेकर बड़े भुगतान तक यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। यदि डिजिटल भुगतान पर शुल्क संबंधी चिंताएं बढ़ती हैं तो इसका असर व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के व्यवहार पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को ऐसी सीमा तय करनी चाहिए, जिससे डिजिटल भुगतान का विस्तार जारी रहे।

मासिक एमडीआर सीमा पांच लाख करने की मांग

व्यापार मंडल ने केवल न्यूनतम लेनदेन सीमा में बदलाव की मांग ही नहीं की, बल्कि मासिक अधिकतम एमडीआर सीमा में भी वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। संगठन चाहता है कि एक लाख रुपये की मासिक अधिकतम सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाए।

व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार का आकार और डिजिटल भुगतान का अनुपात अलग होता है। ऐसे में सभी व्यापारियों पर एक जैसी सीमा लागू करना व्यावहारिक नहीं हो सकता। अधिक कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों में डिजिटल भुगतान का कुल मूल्य स्वाभाविक रूप से अधिक हो सकता है। इसलिए एमडीआर की मासिक सीमा निर्धारित करते समय व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

डिजिटल भुगतान से पीछे न लौटें व्यापारी

ज्ञापन में व्यापार मंडल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने देश के व्यापारिक क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है। यूपीआई के माध्यम से ग्राहक और व्यापारी दोनों को तेजी से भुगतान और राशि प्राप्त करने की सुविधा मिली है। भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड होने से लेनदेन में पारदर्शिता भी बढ़ती है।

व्यापार मंडल का कहना है कि शुल्क से जुड़ी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, जिससे व्यापारी डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कम करने लगें। संगठन ने आशंका जताई कि यदि डिजिटल भुगतान की लागत व्यापारियों के लिए अधिक बढ़ती है तो कुछ कारोबारी नकद लेनदेन को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकते हैं। इससे देश में कैशलेस और डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

छोटे और मध्यम कारोबारियों पर विशेष ध्यान की मांग

व्यापार मंडल ने सरकार से आग्रह किया है कि एमडीआर संबंधी नीति तैयार करते समय छोटे दुकानदारों, लघु उद्यमियों और मध्यम श्रेणी के कारोबारियों की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए। इन व्यापारियों के लिए कारोबार की लागत में होने वाली छोटी वृद्धि भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

संगठन का कहना है कि डिजिटल भुगतान की सफलता केवल तकनीकी सुविधा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इससे जुड़े आर्थिक नियम भी कारोबारियों के अनुकूल होने चाहिए। यदि व्यापारी सहजता से डिजिटल भुगतान स्वीकार करेंगे तो ग्राहक भी इसका अधिक इस्तेमाल करेंगे। इससे यूपीआई का नेटवर्क और मजबूत होगा।

पारदर्शिता और तेज भुगतान व्यवस्था का हवाला

व्यापार मंडल ने यूपीआई की खूबियों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान ने व्यापारिक गतिविधियों को गति दी है। लेनदेन कुछ ही क्षणों में पूरा हो जाता है और भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है। इससे नकदी के प्रबंधन से जुड़ी कई परेशानियां भी कम होती हैं।

संगठन के अनुसार डिजिटल भुगतान व्यवस्था से ग्राहकों को भी सुविधा मिली है। उन्हें बड़ी मात्रा में नकदी साथ रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती। छोटे कारोबारी भी अब डिजिटल भुगतान स्वीकार कर अपने ग्राहकों को अधिक विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं।

प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, जनपद जालौन ने प्रधानमंत्री से पूरे मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया है। संगठन ने मांग की है कि एमडीआर लागू होने की न्यूनतम सीमा को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये और मासिक अधिकतम सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाए।

व्यापार मंडल का कहना है कि इन बदलावों से व्यापारियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक दबाव को कम किया जा सकेगा। साथ ही डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता भी बनी रहेगी। संगठन का मानना है कि व्यापारी हितों और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के बीच संतुलन बनाकर ऐसी नीति तैयार की जानी चाहिए, जिससे दोनों उद्देश्यों को साथ आगे बढ़ाया जा सके।

कैशलेस अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

व्यापार मंडल ने कहा कि भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार देश की बदलती आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यूपीआई ने भुगतान प्रक्रिया को आम लोगों और कारोबारियों के लिए सरल बनाया है। इसलिए इससे जुड़े शुल्क और नियमों में बदलाव करते समय दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया जाना आवश्यक है।

संगठन के मुताबिक यदि व्यापारियों को उचित राहत मिलती है तो वे डिजिटल भुगतान को पहले की तरह अपनाते रहेंगे और ग्राहकों को भी यूपीआई के माध्यम से भुगतान की सुविधा देते रहेंगे। इससे पारदर्शी लेनदेन को बढ़ावा मिलने के साथ नकद पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

व्यापार मंडल ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार व्यापारियों की मांग पर विचार करेगी और एमडीआर की प्रस्तावित सीमा में आवश्यक संशोधन करेगी। संगठन का कहना है कि व्यापारियों की लागत को नियंत्रित रखते हुए डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करना देश की अर्थव्यवस्था के लिए अधिक उपयोगी साबित होगा।

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यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर सीमा बढ़ाने की मांग, व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 5, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, जालौन। डिजिटल भुगतान व्यवस्था को व्यापारियों के लिए अधिक सुविधाजनक और आर्थिक रूप से संतुलित बनाए जाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, जनपद जालौन ने प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। व्यापार मंडल ने यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर की न्यूनतम सीमा और मासिक अधिकतम शुल्क सीमा में संशोधन किए जाने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई जाने वाली किसी भी व्यवस्था में छोटे और मध्यम व्यापारियों के आर्थिक हितों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

व्यापार मंडल के अनुसार यूपीआई पिछले कुछ वर्षों में देश की भुगतान व्यवस्था का अहम हिस्सा बन गया है। बाजारों, दुकानों, प्रतिष्ठानों और विभिन्न सेवाओं में बड़ी संख्या में ग्राहक यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर रहे हैं। इससे नकदी रखने, खुले पैसे की समस्या और भुगतान की प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम हुआ है। व्यापारियों के लिए भी डिजिटल लेनदेन ने भुगतान प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया है।

एमडीआर को लेकर व्यापारियों की चिंता

व्यापार मंडल ने ज्ञापन में कहा कि सरकार की ओर से 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर निर्धारित किए जाने तथा मासिक अधिकतम एमडीआर सीमा एक लाख रुपये रखने के प्रस्ताव को लेकर व्यापारिक समुदाय में चिंता है। संगठन का तर्क है कि यदि बड़े मूल्य के डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ता है तो इसका सीधा प्रभाव कारोबार की लागत पर पड़ सकता है।

व्यापार मंडल ने कहा कि विशेष रूप से ऐसे छोटे और मध्यम कारोबारी, जिनका कारोबार लगातार डिजिटल भुगतान पर निर्भर हो रहा है, उनके लिए प्रत्येक अतिरिक्त शुल्क महत्वपूर्ण हो सकता है। व्यापारियों का मानना है कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें कारोबारियों को सुविधा मिले और उन पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव भी न पड़े।

2 हजार की जगह 10 हजार रुपये की सीमा की मांग

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की कोर इकाई की बैठक में इस विषय पर चर्चा के बाद एमडीआर लागू होने की न्यूनतम लेनदेन सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया गया। संगठन ने मांग की है कि 2,000 रुपये की मौजूदा प्रस्तावित सीमा को बढ़ाकर 10,000 रुपये किया जाए।

व्यापार मंडल का कहना है कि इससे रोजमर्रा के छोटे और मध्यम मूल्य के डिजिटल लेनदेन पर व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क के दबाव से राहत मिल सकती है। संगठन के मुताबिक यूपीआई की सबसे बड़ी ताकत उसकी व्यापक स्वीकार्यता है और इसे बनाए रखने के लिए शुल्क संबंधी व्यवस्था भी व्यावहारिक होनी चाहिए।

व्यापारियों ने यह भी कहा कि आज ग्राहक छोटी खरीदारी से लेकर बड़े भुगतान तक यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। यदि डिजिटल भुगतान पर शुल्क संबंधी चिंताएं बढ़ती हैं तो इसका असर व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के व्यवहार पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को ऐसी सीमा तय करनी चाहिए, जिससे डिजिटल भुगतान का विस्तार जारी रहे।

मासिक एमडीआर सीमा पांच लाख करने की मांग

व्यापार मंडल ने केवल न्यूनतम लेनदेन सीमा में बदलाव की मांग ही नहीं की, बल्कि मासिक अधिकतम एमडीआर सीमा में भी वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। संगठन चाहता है कि एक लाख रुपये की मासिक अधिकतम सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाए।

व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार का आकार और डिजिटल भुगतान का अनुपात अलग होता है। ऐसे में सभी व्यापारियों पर एक जैसी सीमा लागू करना व्यावहारिक नहीं हो सकता। अधिक कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों में डिजिटल भुगतान का कुल मूल्य स्वाभाविक रूप से अधिक हो सकता है। इसलिए एमडीआर की मासिक सीमा निर्धारित करते समय व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

डिजिटल भुगतान से पीछे न लौटें व्यापारी

ज्ञापन में व्यापार मंडल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने देश के व्यापारिक क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है। यूपीआई के माध्यम से ग्राहक और व्यापारी दोनों को तेजी से भुगतान और राशि प्राप्त करने की सुविधा मिली है। भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड होने से लेनदेन में पारदर्शिता भी बढ़ती है।

व्यापार मंडल का कहना है कि शुल्क से जुड़ी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, जिससे व्यापारी डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कम करने लगें। संगठन ने आशंका जताई कि यदि डिजिटल भुगतान की लागत व्यापारियों के लिए अधिक बढ़ती है तो कुछ कारोबारी नकद लेनदेन को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकते हैं। इससे देश में कैशलेस और डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

छोटे और मध्यम कारोबारियों पर विशेष ध्यान की मांग

व्यापार मंडल ने सरकार से आग्रह किया है कि एमडीआर संबंधी नीति तैयार करते समय छोटे दुकानदारों, लघु उद्यमियों और मध्यम श्रेणी के कारोबारियों की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए। इन व्यापारियों के लिए कारोबार की लागत में होने वाली छोटी वृद्धि भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

संगठन का कहना है कि डिजिटल भुगतान की सफलता केवल तकनीकी सुविधा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इससे जुड़े आर्थिक नियम भी कारोबारियों के अनुकूल होने चाहिए। यदि व्यापारी सहजता से डिजिटल भुगतान स्वीकार करेंगे तो ग्राहक भी इसका अधिक इस्तेमाल करेंगे। इससे यूपीआई का नेटवर्क और मजबूत होगा।

पारदर्शिता और तेज भुगतान व्यवस्था का हवाला

व्यापार मंडल ने यूपीआई की खूबियों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान ने व्यापारिक गतिविधियों को गति दी है। लेनदेन कुछ ही क्षणों में पूरा हो जाता है और भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है। इससे नकदी के प्रबंधन से जुड़ी कई परेशानियां भी कम होती हैं।

संगठन के अनुसार डिजिटल भुगतान व्यवस्था से ग्राहकों को भी सुविधा मिली है। उन्हें बड़ी मात्रा में नकदी साथ रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती। छोटे कारोबारी भी अब डिजिटल भुगतान स्वीकार कर अपने ग्राहकों को अधिक विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं।

प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, जनपद जालौन ने प्रधानमंत्री से पूरे मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया है। संगठन ने मांग की है कि एमडीआर लागू होने की न्यूनतम सीमा को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये और मासिक अधिकतम सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाए।

व्यापार मंडल का कहना है कि इन बदलावों से व्यापारियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक दबाव को कम किया जा सकेगा। साथ ही डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता भी बनी रहेगी। संगठन का मानना है कि व्यापारी हितों और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के बीच संतुलन बनाकर ऐसी नीति तैयार की जानी चाहिए, जिससे दोनों उद्देश्यों को साथ आगे बढ़ाया जा सके।

कैशलेस अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

व्यापार मंडल ने कहा कि भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार देश की बदलती आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यूपीआई ने भुगतान प्रक्रिया को आम लोगों और कारोबारियों के लिए सरल बनाया है। इसलिए इससे जुड़े शुल्क और नियमों में बदलाव करते समय दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया जाना आवश्यक है।

संगठन के मुताबिक यदि व्यापारियों को उचित राहत मिलती है तो वे डिजिटल भुगतान को पहले की तरह अपनाते रहेंगे और ग्राहकों को भी यूपीआई के माध्यम से भुगतान की सुविधा देते रहेंगे। इससे पारदर्शी लेनदेन को बढ़ावा मिलने के साथ नकद पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

व्यापार मंडल ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार व्यापारियों की मांग पर विचार करेगी और एमडीआर की प्रस्तावित सीमा में आवश्यक संशोधन करेगी। संगठन का कहना है कि व्यापारियों की लागत को नियंत्रित रखते हुए डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करना देश की अर्थव्यवस्था के लिए अधिक उपयोगी साबित होगा।