अतरौली में नाली और बरसाती नाले की कागजी खुदाई का आरोप, ग्रामीणों ने डीएम से मांगी जांच
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
प्रधान और सचिव पर विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप, ग्रामीणों ने स्थलीय सत्यापन और भुगतान की जांच की उठाई मांग

उरई (जालौन)। माधौगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत अतरौली में विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले टिकुरी, धर्मपुरा, छुटका की खोड़ और अतरौली गांव के कई ग्रामीण सोमवार को जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की कथित मिलीभगत से सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में नाली निर्माण और बरसाती पानी की निकासी के लिए नाले की खुदाई सहित कई कार्य कागजों में पूरे दिखाए गए हैं, जबकि मौके पर उनकी स्थिति अलग है। आरोप लगाया गया कि जिन कार्यों को अभिलेखों में पूर्ण दर्शाकर उनके लिए भुगतान कराया गया, उनमें से कुछ काम जमीन पर दिखाई नहीं देते। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
कागजों में पूरा दिखाने का आरोप
ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में जल निकासी की समस्या को दूर करने के उद्देश्य से नाली और बरसाती नाले की खुदाई के कार्य प्रस्तावित किए गए थे। ग्रामीणों के अनुसार इन कार्यों के लिए सरकारी स्तर से धनराशि स्वीकृत हुई और भुगतान की प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई, लेकिन जिन स्थानों पर कार्य होना बताया गया है, वहां अपेक्षित काम नहीं कराया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यों को अभिलेखों में पूर्ण दर्शाकर भुगतान करा लिया गया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे सरकारी धन के इस्तेमाल और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी वजह से ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि कागजी रिकॉर्ड के साथ-साथ संबंधित स्थानों का भौतिक सत्यापन भी कराया जाए।
पक्के निर्माण और पुलिया को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों ने केवल नाली और बरसाती नाले की खुदाई तक ही अपनी शिकायत सीमित नहीं रखी है। उन्होंने ग्राम पंचायत में कराए गए पक्के निर्माण, पुलिया और डैम से संबंधित कार्यों में भी कथित मनमानी का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों के लिए कई स्थानों को चिह्नित किए जाने की बात कही गई थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद कुछ निर्माण कार्य ऐसे स्थानों पर कराए गए, जिनसे सीमित लोगों को ही लाभ पहुंचने की स्थिति बनती है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान के करीबी माने जाने वाले लोगों के खेतों अथवा उनके आवागमन वाले रास्तों के आसपास भी कार्य कराए गए।
हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर यह देखा जाए कि कार्य स्वीकृत प्रस्ताव के अनुरूप हुआ या नहीं और उससे सार्वजनिक हित कितना पूरा हुआ।
करीब 15 स्थानों के चयन का भी मुद्दा
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायत क्षेत्र में करीब 15 स्थानों को चिह्नित किए जाने की बात सामने आई थी। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि इन स्थानों पर विकास कार्य प्रस्तावित थे तो उनकी प्राथमिकता, उपयोगिता और वास्तविक क्रियान्वयन की स्थिति क्या है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित प्रस्ताव, कार्ययोजना, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, भुगतान संबंधी दस्तावेज और कार्य पूर्ण होने के प्रमाण की जांच की जाए। साथ ही यह भी सत्यापित किया जाए कि जिन कार्यों के लिए सरकारी धन खर्च हुआ, वे वास्तव में जमीन पर मौजूद हैं या नहीं।
स्थलीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से विशेष रूप से स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल कार्यालय में रखे दस्तावेजों के आधार पर मामले की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ सकती। इसके लिए अधिकारियों की टीम को गांवों में पहुंचकर मौके पर कार्यों की स्थिति देखनी चाहिए।
ग्रामीणों के अनुसार यदि किसी नाली, बरसाती नाले, पुलिया, डैम अथवा अन्य निर्माण कार्य के लिए धन जारी किया गया है तो उसकी लंबाई, चौड़ाई, निर्माण की गुणवत्ता और उपयोगिता का भी परीक्षण होना चाहिए। इसके साथ ही भुगतान की गई धनराशि और वास्तविक कार्य की लागत के बीच भी मिलान कराया जाना चाहिए।
अभिलेखों और भुगतान की जांच पर जोर
शिकायतकर्ताओं ने पंचायत से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की जांच कराने की भी मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक कार्य स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए। इसमें संबंधित कार्य की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, अनुमानित लागत, कार्यादेश, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर और भुगतान विवरण जैसे दस्तावेजों को शामिल किए जाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि दस्तावेजों और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गांवों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि विकास कार्यों के नाम पर धन खर्च हुआ हो और उसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला हो तो मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के माध्यम से होना बाकी है। प्रशासनिक स्तर पर जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने तथ्यात्मक हैं और पंचायत में स्वीकृत कार्य वास्तव में कितनी मात्रा और गुणवत्ता में कराए गए हैं।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने और जांच में अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने भविष्य में ग्राम पंचायत में होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा ग्रामीणों को कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराने की भी मांग रखी।
ज्ञापन देने वालों में माता प्रसाद, राजेंद्र, प्रीतम, राहुल पाल सिंह, प्रभुदयाल, वीरेंद्र सिंह सहित अन्य ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन शिकायत का संज्ञान लेकर संबंधित अभिलेखों की जांच और मौके का सत्यापन कराएगा। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और उसके बाद सामने आने वाले निष्कर्षों पर टिकी हैं।