जिला कारागार उरई पहुंचीं सचिव मनाली चन्द्रा, बंदियों की समस्याएं सुनीं और विधिक सहायता के दिए निर्देश

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, 5 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने सोमवार को जिला कारागार उरई का साप्ताहिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जेल की विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ बैरकों में पहुंचकर बंदियों से सीधे संवाद किया और उनकी कानूनी एवं व्यक्तिगत समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही विधिक सेवाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

जेल परिसर के निरीक्षण के दौरान सचिव ने अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली। कारागार के मुख्य प्रवेश द्वार पर मरम्मत का कार्य भी चल रहा था। उन्होंने जेल प्रशासन से कहा कि बंदियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जिन मामलों में विधिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है, उनकी सूचना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तक समय से पहुंचाई जाए।

जमानत मिलने के बाद भी जेल में रह रहे बंदियों की मांगी जानकारी

निरीक्षण के दौरान सचिव मनाली चन्द्रा ने विशेष रूप से उन बंदियों के मामलों पर ध्यान देने के निर्देश दिए, जिन्हें सक्षम न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, लेकिन आवश्यक जमानतगीर उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी रिहाई लंबित है। उन्होंने जेल प्रशासन से ऐसे सभी बंदियों की सूची तैयार कर तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा।

उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल आवश्यक जमानत प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण अनावश्यक रूप से अधिक समय तक कारागार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों में नियमानुसार आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराते हुए प्रभावी पैरवी का प्रयास किया जाना चाहिए, ताकि पात्र बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके।

आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों को मिले कानूनी मदद

सचिव ने आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बंदियों को मिलने वाली विधिक सहायता की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन बंदियों के पास अपने मुकदमे की पैरवी के लिए निजी अधिवक्ता नियुक्त करने की आर्थिक क्षमता नहीं है, उन्हें नियमानुसार निःशुल्क कानूनी सहायता दिलाई जाए।

उन्होंने जिला अधिकार प्राप्त समिति, जालौन के माध्यम से पात्र बंदियों को जमानत संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि आर्थिक स्थिति किसी व्यक्ति को न्याय पाने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकती। जरूरतमंद बंदियों तक विधिक सेवा योजनाओं का लाभ पहुंचाना संबंधित संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

मुकदमों की पैरवी और विधिक सहायता की स्थिति जानी

निरीक्षण के दौरान श्रीमती मनाली चन्द्रा ने बंदियों से उनके मुकदमों की वर्तमान स्थिति के बारे में बातचीत की। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि किन बंदियों को अधिवक्ता उपलब्ध है और किन लोगों को कानूनी सहायता की जरूरत है। जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं अथवा किसी कारण से उनके मामलों में प्रभावी पैरवी नहीं हो पा रही है, उन्हें विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने जेल प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों, मुकदमे की प्रक्रिया और उपलब्ध विधिक विकल्पों की जानकारी समय-समय पर दी जाती रहे। इसका उद्देश्य बंदियों को अपने मामलों को समझने और न्यायिक प्रक्रिया में प्रभावी रूप से भाग लेने में सक्षम बनाना है।

महिला बंदियों और बच्चों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा

जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान सचिव ने महिला बंदियों से संबंधित व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। उन्होंने महिला बंदियों तथा उनके साथ रह रहे बच्चों के लिए उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में जेल प्रशासन से जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। स्वास्थ्य, खान-पान और दैनिक जरूरतों से जुड़ी सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। बच्चों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भी उपयुक्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर उन्होंने जोर दिया।

लीगल एड हेल्प डेस्क का किया निरीक्षण

इसके बाद सचिव ने जेल के मुलाकाती क्षेत्र में स्थापित लीगल एड हेल्प डेस्क का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपलब्ध सुविधाओं और बंदियों तथा उनके परिजनों को दी जा रही कानूनी सहायता के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान कई बंदियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनकी समस्याएं पूछी गईं।

बंदियों से बातचीत के दौरान किसी ने भी कोई विशेष समस्या सामने नहीं रखी। इसके बावजूद सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जेल में आने वाले प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को विधिक सहायता की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो और किसी बंदी को कानूनी जानकारी के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े।

विधिक साक्षरता शिविर में बताए गए कानूनी अधिकार

निरीक्षण के बाद जिला कारागार परिसर में ‘निःशुल्क विधिक सेवाएं एवं कार्य प्रणाली’ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। शिविर की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने की।

कार्यक्रम में चीफ एलएडीसी श्री विश्राम सिंह ने बंदियों को संविधान के अनुच्छेद 39ए के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान में समाज के गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों को न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने बंदियों को समझाया कि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण कोई व्यक्ति कानूनी सहायता से वंचित न रहे, इसके लिए विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पात्र लोगों को निःशुल्क कानूनी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। शिविर में मौजूद बंदियों को विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया तथा संबंधित सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।

दर्जनों बंदियों ने लिया शिविर में हिस्सा

विधिक साक्षरता शिविर में जिला कारागार के दर्जनों बंदी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का उद्देश्य कारागार में निरुद्ध लोगों को न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित जानकारी देना तथा उन्हें उपलब्ध विधिक सेवाओं के प्रति जागरूक करना रहा।

निरीक्षण और शिविर के दौरान जेल प्रशासन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच समन्वय पर भी जोर दिया गया, ताकि जरूरतमंद बंदियों की कानूनी समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान कराया जा सके।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री प्रशान्त मौर्य, कारापाल श्री प्रदीप कुमार, उपकारापाल श्री अमर सिंह, उपकारापाल श्रीमती सुखवती तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के लिपिक श्री शुभम् शुक्ला सहित जेल प्रशासन के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों से स्पष्ट है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का फोकस केवल कानूनी जानकारी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद बंदियों को प्रभावी कानूनी सहायता, जमानत प्रक्रिया में सहयोग और न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर भी है। ऐसे निरीक्षणों और विधिक साक्षरता कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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जिला कारागार उरई पहुंचीं सचिव मनाली चन्द्रा, बंदियों की समस्याएं सुनीं और विधिक सहायता के दिए निर्देश

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 5, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, 5 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने सोमवार को जिला कारागार उरई का साप्ताहिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जेल की विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ बैरकों में पहुंचकर बंदियों से सीधे संवाद किया और उनकी कानूनी एवं व्यक्तिगत समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही विधिक सेवाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

जेल परिसर के निरीक्षण के दौरान सचिव ने अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली। कारागार के मुख्य प्रवेश द्वार पर मरम्मत का कार्य भी चल रहा था। उन्होंने जेल प्रशासन से कहा कि बंदियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जिन मामलों में विधिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है, उनकी सूचना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तक समय से पहुंचाई जाए।

जमानत मिलने के बाद भी जेल में रह रहे बंदियों की मांगी जानकारी

निरीक्षण के दौरान सचिव मनाली चन्द्रा ने विशेष रूप से उन बंदियों के मामलों पर ध्यान देने के निर्देश दिए, जिन्हें सक्षम न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, लेकिन आवश्यक जमानतगीर उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी रिहाई लंबित है। उन्होंने जेल प्रशासन से ऐसे सभी बंदियों की सूची तैयार कर तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा।

उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल आवश्यक जमानत प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण अनावश्यक रूप से अधिक समय तक कारागार में नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों में नियमानुसार आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराते हुए प्रभावी पैरवी का प्रयास किया जाना चाहिए, ताकि पात्र बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके।

आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों को मिले कानूनी मदद

सचिव ने आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बंदियों को मिलने वाली विधिक सहायता की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन बंदियों के पास अपने मुकदमे की पैरवी के लिए निजी अधिवक्ता नियुक्त करने की आर्थिक क्षमता नहीं है, उन्हें नियमानुसार निःशुल्क कानूनी सहायता दिलाई जाए।

उन्होंने जिला अधिकार प्राप्त समिति, जालौन के माध्यम से पात्र बंदियों को जमानत संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि आर्थिक स्थिति किसी व्यक्ति को न्याय पाने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकती। जरूरतमंद बंदियों तक विधिक सेवा योजनाओं का लाभ पहुंचाना संबंधित संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

मुकदमों की पैरवी और विधिक सहायता की स्थिति जानी

निरीक्षण के दौरान श्रीमती मनाली चन्द्रा ने बंदियों से उनके मुकदमों की वर्तमान स्थिति के बारे में बातचीत की। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि किन बंदियों को अधिवक्ता उपलब्ध है और किन लोगों को कानूनी सहायता की जरूरत है। जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं अथवा किसी कारण से उनके मामलों में प्रभावी पैरवी नहीं हो पा रही है, उन्हें विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने जेल प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों, मुकदमे की प्रक्रिया और उपलब्ध विधिक विकल्पों की जानकारी समय-समय पर दी जाती रहे। इसका उद्देश्य बंदियों को अपने मामलों को समझने और न्यायिक प्रक्रिया में प्रभावी रूप से भाग लेने में सक्षम बनाना है।

महिला बंदियों और बच्चों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा

जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान सचिव ने महिला बंदियों से संबंधित व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। उन्होंने महिला बंदियों तथा उनके साथ रह रहे बच्चों के लिए उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में जेल प्रशासन से जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। स्वास्थ्य, खान-पान और दैनिक जरूरतों से जुड़ी सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। बच्चों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भी उपयुक्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर उन्होंने जोर दिया।

लीगल एड हेल्प डेस्क का किया निरीक्षण

इसके बाद सचिव ने जेल के मुलाकाती क्षेत्र में स्थापित लीगल एड हेल्प डेस्क का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपलब्ध सुविधाओं और बंदियों तथा उनके परिजनों को दी जा रही कानूनी सहायता के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान कई बंदियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनकी समस्याएं पूछी गईं।

बंदियों से बातचीत के दौरान किसी ने भी कोई विशेष समस्या सामने नहीं रखी। इसके बावजूद सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जेल में आने वाले प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को विधिक सहायता की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो और किसी बंदी को कानूनी जानकारी के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े।

विधिक साक्षरता शिविर में बताए गए कानूनी अधिकार

निरीक्षण के बाद जिला कारागार परिसर में ‘निःशुल्क विधिक सेवाएं एवं कार्य प्रणाली’ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। शिविर की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने की।

कार्यक्रम में चीफ एलएडीसी श्री विश्राम सिंह ने बंदियों को संविधान के अनुच्छेद 39ए के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान में समाज के गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों को न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने बंदियों को समझाया कि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण कोई व्यक्ति कानूनी सहायता से वंचित न रहे, इसके लिए विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पात्र लोगों को निःशुल्क कानूनी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। शिविर में मौजूद बंदियों को विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया तथा संबंधित सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।

दर्जनों बंदियों ने लिया शिविर में हिस्सा

विधिक साक्षरता शिविर में जिला कारागार के दर्जनों बंदी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का उद्देश्य कारागार में निरुद्ध लोगों को न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित जानकारी देना तथा उन्हें उपलब्ध विधिक सेवाओं के प्रति जागरूक करना रहा।

निरीक्षण और शिविर के दौरान जेल प्रशासन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच समन्वय पर भी जोर दिया गया, ताकि जरूरतमंद बंदियों की कानूनी समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान कराया जा सके।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री प्रशान्त मौर्य, कारापाल श्री प्रदीप कुमार, उपकारापाल श्री अमर सिंह, उपकारापाल श्रीमती सुखवती तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के लिपिक श्री शुभम् शुक्ला सहित जेल प्रशासन के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों से स्पष्ट है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का फोकस केवल कानूनी जानकारी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद बंदियों को प्रभावी कानूनी सहायता, जमानत प्रक्रिया में सहयोग और न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर भी है। ऐसे निरीक्षणों और विधिक साक्षरता कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।