भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर IMF का भरोसा बढ़ा, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP वृद्धि दर 7.3% अनुमानित

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की GDP विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। यह अनुमान भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और निरंतर सुधारों को दर्शाता है।
📈 वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूती
IMF की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं धीमी वृद्धि और महंगाई के दबाव से जूझ रही हैं, वहीं भारत ने स्थिर विकास, घरेलू मांग और निवेश के दम पर अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है। यह भारत को दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करता है।
🏭 किन कारकों से मिली अर्थव्यवस्था को रफ्तार
IMF के अनुसार भारत की आर्थिक प्रगति के पीछे कई अहम कारण हैं:
- मजबूत घरेलू उपभोग
- बुनियादी ढांचे में बढ़ता सरकारी निवेश
- सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों में सुधार
- डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप्स का विस्तार
इन सभी कारकों ने मिलकर आर्थिक गतिविधियों को गति दी है।
💼 रोजगार और निवेश के लिए सकारात्मक संकेत
GDP वृद्धि दर में सुधार से रोजगार के अवसर बढ़ने और विदेशी निवेश आकर्षित होने की संभावना भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अनुमान भारत की वैश्विक आर्थिक साख को और मजबूत करेगा।
🌍 वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका
IMF की रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बना रहेगा। निर्यात, तकनीक और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
⚖️ सतर्कता भी जरूरी
हालांकि IMF ने भारत के लिए सकारात्मक अनुमान दिया है, लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि:
- वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- जलवायु से जुड़ी चुनौतियां
आगे चलकर आर्थिक स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
🔔 निष्कर्ष
IMF का यह संशोधित अनुमान भारत की अर्थव्यवस्था में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यदि नीतिगत सुधार और निवेश की गति बनी रही, तो भारत आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की ओर और मजबूती से आगे बढ़ सकता है।
