फ़रवरी 12, 2026

अपहरण–हत्या कांड में मुठभेड़, एक बदमाश ढेर, एक गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपहरण और हत्या के एक जघन्य मामले का पुलिस ने त्वरित खुलासा करते हुए अपराधियों को कड़ी जवाबी कार्रवाई के जरिए रोक दिया। बरगढ़ थाना क्षेत्र में हुई यह घटना पुलिस की सक्रिय कार्यप्रणाली और अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।


🧒 अपहरण से हत्या तक की पूरी कहानी

22 जनवरी 2026 की शाम बरगढ़ कस्बे में कपड़ा व्यवसायी अशोक केसरवानी के 13 वर्षीय बेटे आयुष केसरवानी का अचानक अपहरण कर लिया गया। घटना के कुछ घंटों बाद ही बदमाशों ने व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से परिजनों से 40 लाख रुपये की फिरौती की मांग की।

घबराए परिजनों ने बिना समय गंवाए पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह के निर्देशन में कई टीमों का गठन कर सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया, जो पूरी रात चलता रहा।


🔎 सुबह के सन्नाटे में हुई मुठभेड़

23 जनवरी की सुबह करीब साढ़े सात बजे बरगढ़ क्षेत्र के परानु बाबा जंगल में पुलिस और अपहरणकर्ताओं का आमना-सामना हुआ। खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की।

  • मुख्य आरोपी इरफान मुठभेड़ में मारा गया
  • दूसरा आरोपी कल्लू घायल अवस्था में गिरफ्तार किया गया
  • तीसरे अभियुक्त की तलाश अब भी जारी है

पुलिस ने मौके से मोबाइल लोकेटर फोन, हथियार और वारदात में इस्तेमाल किया गया वाहन भी बरामद किया है।


👮 पुलिस की तत्परता बनी उदाहरण

इस पूरे ऑपरेशन को मिशन शक्ति 5.0 के तहत एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, खासकर बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से। चित्रकूट पुलिस की तेज़ कार्रवाई ने यह साबित किया कि संवेदनशील मामलों में देरी की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाती।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी पुलिस की कार्रवाई की व्यापक सराहना हुई। लोगों ने #GoodWorkUPP और #UPPolice जैसे हैशटैग्स के साथ पुलिस के साहस और प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।


🚧 जनाक्रोश और प्रशासन की पहल

जब यह स्पष्ट हुआ कि अपहृत बालक की हत्या कर दी गई है, तो क्षेत्र में गहरा आक्रोश फैल गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रखकर आवागमन बाधित कर दिया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचे, परिजनों से बातचीत की और आश्वासन देकर मार्ग अवरोध समाप्त कराया। परिजनों ने मांग की कि सभी दोषियों को कठोरतम दंड मिले।


✍️ अंतिम बात

चित्रकूट का यह मामला एक ओर अपराध की क्रूरता को उजागर करता है, तो दूसरी ओर पुलिस की सजगता और कर्तव्यनिष्ठा को भी सामने लाता है। समय रहते की गई कार्रवाई से न केवल कानून का इकबाल बुलंद हुआ है, बल्कि समाज में यह संदेश भी गया है कि अपराध का रास्ता अंततः विनाश की ओर ही ले जाता है।


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