फ़रवरी 12, 2026

पूर्वोदय का केंद्र: बजट 2026-27 में पश्चिम बंगाल की रणनीतिक अहमियत

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केंद्र सरकार के बजट 2026-27 को लेकर राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज़ रही कि क्या पश्चिम बंगाल को पर्याप्त प्राथमिकता दी गई है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल को “पूर्वोदय” — अर्थात पूर्वी भारत के उदय — की व्यापक रणनीति में केंद्रीय स्थान दिया गया है। सरकार का दृष्टिकोण यह संकेत देता है कि पूर्वी राज्यों को राष्ट्रीय विकास की नई धुरी बनाने की तैयारी की जा रही है, और इस प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।

औद्योगिक पुनरुत्थान की रूपरेखा

पूर्वी तट औद्योगिक कॉरिडोर (East Coast Industrial Corridor) को गति देने की घोषणा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दुर्गापुर को इस कॉरिडोर के प्रमुख नोड के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव राज्य की औद्योगिक विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। आसनसोल-दुर्गापुर बेल्ट को एक समेकित विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना से इस क्षेत्र में निवेश, रोजगार और आधारभूत संरचना को नई ऊर्जा मिलने की संभावना है।

यदि योजनाएँ समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो यह क्षेत्र इस्पात, इंजीनियरिंग और भारी उद्योगों के लिए पूर्वी भारत का मुख्य आधार बन सकता है।

कनेक्टिविटी: उत्तर बंगाल का नया आयाम

परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में प्रस्तावित वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विशेष महत्व रखता है। इससे उत्तर बंगाल देश के अन्य हिस्सों से अत्याधुनिक रेल संपर्क द्वारा जुड़ सकेगा। सिलीगुड़ी, जो पहले ही “चिकन नेक” क्षेत्र के कारण सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, अब तेज़ रफ्तार परिवहन के चलते एक बड़े लॉजिस्टिक एवं ट्रांजिट केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

यह परियोजना पर्यटन, व्यापार और सीमावर्ती राज्यों के साथ संपर्क को भी प्रोत्साहित करेगी।

कृषि और परंपरागत उद्योगों को मजबूती

राष्ट्रीय फाइबर मिशन के अंतर्गत जूट क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल की गई है। जूट उद्योग लंबे समय से पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था की पहचान रहा है। हुगली के आसपास स्थित मिलों और लाखों जूट किसानों को इससे सीधा लाभ मिल सकता है।

इसके अतिरिक्त, चमड़ा उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ड्यूटी-फ्री इनपुट सूची में जूते के ऊपरी हिस्से को शामिल करना और निर्यात की समयसीमा बढ़ाना निर्यातकों के लिए राहतकारी कदम है। इससे राज्य के पारंपरिक क्लस्टरों को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा

‘पूर्वोदय पर्यटन गंतव्य’ योजना के तहत विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल विकसित करने की परिकल्पना में पश्चिम बंगाल को भी शामिल किया गया है। स्थान चयन का अधिकार राज्य सरकार को देने से स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर और क्षेत्रीय विशेषताओं को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।

यह पहल दार्जिलिंग की पर्वतीय सुंदरता से लेकर सुंदरबन के जैव-विविध क्षेत्र तक, विभिन्न संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला सकती है।

सामाजिक सरोकार और जनहित

तेंदू पत्तों पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की दर में कमी से बीड़ी उद्योग से जुड़े आदिवासी समुदायों को राहत मिलने की उम्मीद है। बांकुड़ा, पुरुलिया और मिदनापुर जैसे जिलों में इससे आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इस प्रकार, बजट में केवल औद्योगिक और अवसंरचनात्मक पहल ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील निर्णय भी शामिल किए गए हैं।

निष्कर्ष: क्या पश्चिम बंगाल सचमुच धुरी है?

सरकार का दावा है कि ये घोषणाएँ दर्शाती हैं कि पश्चिम बंगाल को बजट में उपेक्षित नहीं किया गया, बल्कि उसे पूर्वी भारत के उदय की रणनीति का प्रमुख केंद्र बनाया गया है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि योजनाएँ कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती हैं और केंद्र-राज्य समन्वय कितना सुदृढ़ रहता है।

यदि योजनाएँ समय पर क्रियान्वित हुईं, तो पश्चिम बंगाल केवल “पूर्वोदय” का सहभागी ही नहीं, बल्कि उसका नेतृत्वकर्ता भी बन सकता है।


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