AI से होगी ग्रामीण सड़कों की जांच, मोबाइल वीडियो से सामने आएंगी सड़क की खामियां
नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026। भारत में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को तकनीक से जोड़ने की दिशा में सड़क निगरानी का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। ग्रामीण सड़कों की स्थिति का आकलन करने के लिए मोबाइल वीडियो, डिजिटल डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़क निरीक्षण को केवल पारंपरिक मैनुअल जांच तक सीमित रखने के बजाय उसे अधिक डेटा आधारित, व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। गांवों को बाजार, स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और शहरों से जोड़ने में इनका बड़ा योगदान होता है। ऐसे में सड़क की गुणवत्ता और समय पर रखरखाव सीधे तौर पर ग्रामीण आवागमन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा विषय है। सरकार पहले से ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण संपर्क को मजबूत करने पर काम कर रही है। अब डिजिटल निगरानी और AI जैसी तकनीकें इस व्यवस्था को अधिक आधुनिक बनाने में भूमिका निभा सकती हैं।
मोबाइल वीडियो से सड़क की तस्वीर होगी दर्ज
नई तकनीकी व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि सड़क की वास्तविक स्थिति को मोबाइल वीडियो या कैमरे के माध्यम से रिकॉर्ड किया जा सकता है। इस वीडियो में सड़क की सतह, गड्ढे, दरारें, किनारों की स्थिति और अन्य दिखाई देने वाली समस्याओं से संबंधित दृश्य जानकारी दर्ज की जा सकती है।
इसके बाद AI आधारित सॉफ्टवेयर वीडियो और तस्वीरों में मौजूद पैटर्न का विश्लेषण कर संभावित खामियों की पहचान करने में मदद कर सकता है। इस प्रक्रिया से निरीक्षण करने वाली टीम को उन स्थानों की जानकारी जल्दी मिल सकती है, जहां मरम्मत या अतिरिक्त जांच की जरूरत है।
इस तरह की तकनीक का व्यापक उपयोग अभी विकास और परीक्षण के स्तर पर अलग-अलग सड़क प्रणालियों में देखा जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए भी सरकार ने AI और मशीन लर्निंग आधारित वीडियो विश्लेषण का इस्तेमाल करने की योजना सामने रखी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सड़क प्रबंधन में कैमरा डेटा और AI का महत्व बढ़ रहा है।
गड्ढों और दरारों की पहचान में मदद
सड़क निरीक्षण में सबसे आम समस्याओं में गड्ढे, सतह पर दरारें, सड़क का असमान होना और जल निकासी से जुड़ी परेशानियां शामिल हो सकती हैं। पारंपरिक व्यवस्था में इन समस्याओं को दर्ज करने के लिए निरीक्षक को मौके पर जाकर सड़क देखनी पड़ती है और फिर रिपोर्ट तैयार करनी होती है।
AI आधारित वीडियो विश्लेषण इस प्रक्रिया के कुछ हिस्सों को स्वचालित कर सकता है। कैमरे से रिकॉर्ड किए गए फुटेज में सॉफ्टवेयर सड़क की सतह से जुड़े संकेतों को पहचानकर संभावित दोषों को चिह्नित कर सकता है। इसके बाद मानव निरीक्षक उन निष्कर्षों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई तय कर सकते हैं।
इस मॉडल का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि निरीक्षण के दौरान बड़ी मात्रा में दृश्य डेटा तैयार किया जा सके। भविष्य में इसी डेटा की मदद से यह भी देखा जा सकता है कि किसी सड़क की स्थिति समय के साथ किस तरह बदली है।
ग्रामीण सड़कों के रखरखाव में मिल सकती है मदद
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण के साथ-साथ मौजूदा सड़कों के रखरखाव पर भी जोर दिया जा रहा है। जुलाई 2026 में ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में PMGSY के विभिन्न घटकों के तहत देशभर में 2,905 सड़कों की कुल 15,647.78 किलोमीटर लंबाई का निर्माण पूरा हुआ और 1,042 पुलों का निर्माण भी पूरा किया गया। वित्त वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में ग्रामीण सड़कों के उन्नयन तथा पहले से निर्मित सड़कों के रखरखाव को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया है।
ऐसे बड़े सड़क नेटवर्क की निगरानी में डिजिटल तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि सड़क की स्थिति से जुड़ा डेटा नियमित रूप से उपलब्ध हो, तो संबंधित विभाग संभावित खराबियों की पहचान करके प्राथमिकता के आधार पर निरीक्षण और मरम्मत की योजना बना सकते हैं।
केवल AI पर निर्भर नहीं होगी व्यवस्था
AI को सड़क निरीक्षण का सहायक उपकरण माना जाना अधिक व्यावहारिक है। कैमरा किसी गड्ढे या दरार को पहचान सकता है, लेकिन उसके कारण, गंभीरता और वास्तविक मरम्मत की आवश्यकता का अंतिम आकलन प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों द्वारा किया जाना जरूरी रहेगा।
मौसम, बारिश, धूल, रोशनी, कैमरे की गुणवत्ता और सड़क पर मौजूद वाहनों जैसी परिस्थितियां वीडियो विश्लेषण को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए AI से मिलने वाले परिणामों की मानवीय जांच महत्वपूर्ण होगी।
इसका मतलब यह है कि भविष्य की व्यवस्था में तकनीक और मानव विशेषज्ञता एक-दूसरे का स्थान लेने के बजाय एक-दूसरे की मदद कर सकती हैं। AI बड़ी मात्रा में डेटा को तेजी से छांट सकता है, जबकि इंजीनियर और निरीक्षक अंतिम तकनीकी निर्णय ले सकते हैं।
पहले से मौजूद डिजिटल निगरानी व्यवस्था
ग्रामीण सड़क प्रबंधन में डिजिटल तकनीक का उपयोग पूरी तरह नया नहीं है। PMGSY के कामों की निगरानी के लिए OMMAS यानी Online Management, Monitoring and Accounting System का इस्तेमाल किया जाता है। गुणवत्ता निरीक्षण से जुड़ी जानकारी भी डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाती है और गुणवत्ता मॉनिटर मौके से जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड कर सकते हैं।
इसी तरह ग्रामीण सड़कों के रखरखाव के लिए eMARG नामक इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था विकसित की गई है। NIC के अनुसार यह प्रणाली ग्रामीण सड़कों के रखरखाव के प्रबंधन और निगरानी में डेटा एनालिटिक्स, AI, मशीन लर्निंग, GIS और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करती है।
इस पृष्ठभूमि में मोबाइल वीडियो और AI आधारित सड़क जांच को डिजिटल निगरानी व्यवस्था के अगले चरण के रूप में देखा जा सकता है।
राष्ट्रीय राजमार्गों से मिल रहा तकनीकी अनुभव
सड़क निरीक्षण में AI के इस्तेमाल का अनुभव राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी विकसित किया जा रहा है। मार्च 2026 में NHAI ने लगभग 40,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर AI Powered Dashcam Analytics Services लागू करने की योजना घोषित की थी। इसमें Route Patrol Vehicles पर कैमरे लगाकर नियमित सर्वेक्षण करने और AI/ML मॉडल के माध्यम से 30 से अधिक प्रकार के दोषों तथा अनियमितताओं की पहचान करने की बात कही गई थी। इनमें गड्ढे, सड़क की दरारें, खराब लेन मार्किंग, क्षतिग्रस्त क्रैश बैरियर और जलभराव जैसी समस्याएं शामिल हैं।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर विकसित हो रही ऐसी तकनीकी क्षमताएं भविष्य में अन्य सड़क नेटवर्क के लिए भी उपयोगी अनुभव उपलब्ध करा सकती हैं। हालांकि ग्रामीण सड़कों की भौगोलिक परिस्थितियां और सड़क संरचना अलग-अलग होने के कारण वहां इस्तेमाल होने वाली तकनीक को स्थानीय जरूरतों के अनुसार अनुकूलित करना आवश्यक होगा।
निरीक्षण से लेकर मरम्मत तक जुड़ सकता है पूरा सिस्टम
AI आधारित निरीक्षण की असली उपयोगिता तब बढ़ेगी, जब सड़क की पहचान से लेकर उसकी मरम्मत तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से जुड़ सके। उदाहरण के लिए किसी सड़क पर समस्या मिलने के बाद उसकी लोकेशन, तस्वीर, वीडियो और निरीक्षण संबंधी जानकारी एक डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हो सकती है।
इसके बाद संबंधित विभाग को समस्या की सूचना भेजी जा सकती है। मरम्मत होने के बाद दोबारा वीडियो या तस्वीर लेकर पहले और बाद की स्थिति की तुलना भी संभव हो सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि दर्ज की गई समस्या वास्तव में दूर हुई या नहीं।
राष्ट्रीय राजमार्गों की AI आधारित निगरानी व्यवस्था में भी सड़क की स्थिति की तुलना समय के साथ करने और डेटा को केंद्रीय प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित असर
अगर मोबाइल वीडियो और AI आधारित सड़क निरीक्षण व्यवस्था बड़े स्तर पर सफल होती है, तो इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्तरों पर दिखाई दे सकता है। नियमित निरीक्षण से सड़क की खराब स्थिति का पता जल्दी लगाने में मदद मिल सकती है। इससे छोटी समस्या के समय रहते सामने आने पर भविष्य में बड़े मरम्मत कार्य की जरूरत को कम करने की संभावना बन सकती है।
इसके अलावा डिजिटल रिकॉर्ड से निरीक्षण प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। अलग-अलग समय पर बनाए गए वीडियो और तस्वीरों की तुलना करके सड़क की स्थिति में आए बदलावों को समझना आसान हो सकता है।
हालांकि इसके लिए मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटी, गुणवत्तापूर्ण कैमरा उपकरण, प्रशिक्षित कर्मचारी, पर्याप्त डेटा और स्पष्ट तकनीकी मानक जरूरी होंगे। ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की उपलब्धता और भौगोलिक विविधता को भी ध्यान में रखना होगा।
तकनीक के साथ जवाबदेही भी जरूरी
AI किसी सड़क की समस्या को पहचानने में मदद कर सकता है, लेकिन सड़क की मरम्मत और रखरखाव के लिए प्रशासनिक कार्रवाई जरूरी रहेगी। इसलिए तकनीकी प्रणाली के साथ स्पष्ट जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
यदि किसी सड़क की खराबी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होती है, तो उसके बाद निरीक्षण, स्वीकृति, मरम्मत और पुनः सत्यापन की प्रक्रिया भी दर्ज की जा सकती है। इससे सड़क रखरखाव में डेटा आधारित निगरानी को बढ़ावा मिल सकता है।
ग्रामीण सड़कों की AI आधारित जांच का व्यापक उद्देश्य केवल आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि सड़क की वास्तविक स्थिति को समय पर समझना और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर तरीके से उपयोग करना है। आने वाले समय में मोबाइल वीडियो, GIS, डिजिटल मॉनिटरिंग और AI का संयोजन ग्रामीण सड़क प्रबंधन को अधिक डेटा आधारित बना सकता है। हालांकि किसी भी नई प्रणाली की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीकी परीक्षण के परिणाम वास्तविक परिस्थितियों में कितने सटीक आते हैं और उनके आधार पर कितनी तेजी से सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।