नफरत भरे भाषण पर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस की सख्त चिंता, बोले—हिंसा और अत्याचार को बढ़ावा दे सकता है हेट स्पीच
18 सितंबर 2026 | अंतरराष्ट्रीय समाचार संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने नफरत फैलाने वाले भाषण यानी…
18 सितंबर 2026 | अंतरराष्ट्रीय समाचार
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने नफरत फैलाने वाले भाषण यानी हेट स्पीच को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता जताई है। 17 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक संदेश में उन्होंने कहा कि नफरत भरी भाषा हिंसा को उकसा सकती है, संघर्ष को बढ़ा सकती है और गंभीर अत्याचारों के लिए माहौल तैयार करने में योगदान दे सकती है।
गुटेरेस ने अपने संदेश में दुनिया को अतीत से सीख लेने की अपील करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियां पहले भी देखी जा चुकी हैं और आज भी कई जगहों पर इसके प्रभाव दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने लोगों से नफरत, भय और हिंसा के चक्र को समाप्त करने के लिए सामूहिक आवाज उठाने का आह्वान किया।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव का यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में सामाजिक और राजनीतिक विभाजन, सशस्त्र संघर्ष तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ सामग्री को लेकर चिंता बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र पहले भी कह चुका है कि हेट स्पीच सामाजिक एकता को कमजोर कर सकती है और कुछ परिस्थितियों में हिंसा का जोखिम बढ़ा सकती है।

गुटेरेस ने हेट स्पीच को बताया गंभीर खतरा
गुटेरेस के अनुसार नफरत भरी भाषा केवल शब्दों तक सीमित समस्या नहीं है। जब किसी समुदाय, समूह या पहचान को लगातार निशाना बनाया जाता है, तो इससे सामाजिक दूरी, भेदभाव और तनाव बढ़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र की 2026 की पहल में भी हेट स्पीच को हिंसा, संघर्ष और अत्याचार से जुड़े जोखिमों के संदर्भ में गंभीर चुनौती बताया गया है।
उन्होंने अपने हालिया संदेश में यह भी संकेत दिया कि दुनिया को अतीत की घटनाओं से सबक लेना चाहिए। उनका कहना है कि नफरत का प्रसार यदि समय रहते रोका नहीं गया तो इसके परिणाम व्यापक हो सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हेट स्पीच का असर विशेष रूप से उन समुदायों पर पड़ सकता है जो पहले से भेदभाव या सामाजिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। जून 2026 में अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर गुटेरेस ने महिलाओं, प्रवासियों, शरणार्थियों, LGBTQIA+ लोगों, दिव्यांग व्यक्तियों और अन्य अल्पसंख्यक समूहों को निशाना बनाए जाने की समस्या का उल्लेख किया था।
सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका
आज हेट स्पीच का प्रसार केवल पारंपरिक माध्यमों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल माध्यमों ने किसी संदेश को बहुत कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाना आसान बना दिया है।
गुटेरेस ने जून 2026 में कहा था कि डिजिटल युग में नफरत भरी सामग्री पहले की तुलना में तेजी से फैल सकती है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका को भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया था। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कुछ डिजिटल प्रणालियां सनसनीखेज और विभाजनकारी सामग्री के प्रसार को बढ़ा सकती हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि तकनीक स्वयं नफरत का कारण है। समस्या उस सामग्री के निर्माण, प्रसार और उसके प्रभाव से जुड़ी है जो किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ भेदभाव अथवा हिंसा को बढ़ावा दे सकती है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी
हेट स्पीच के खिलाफ कार्रवाई की चर्चा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि नफरत भरी सामग्री से निपटने के प्रयासों को मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए।
गुटेरेस ने 2026 में अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसे हानिकारक संदेशों के लिए बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
इस संतुलन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को अपने विचार रखने का अधिकार मिले, लेकिन किसी समुदाय के खिलाफ हिंसा या भेदभाव के लिए उकसाने वाली सामग्री को सामान्य सामाजिक संवाद का हिस्सा न बनाया जाए।
संयुक्त राष्ट्र की रणनीति क्या है?
संयुक्त राष्ट्र लंबे समय से हेट स्पीच से निपटने के लिए एक बहुस्तरीय दृष्टिकोण पर जोर देता रहा है। इसमें शिक्षा, जागरूकता, डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी, समुदायों के बीच संवाद और हिंसा के शुरुआती संकेतों की पहचान जैसे उपाय शामिल हैं।
जून 2026 में गुटेरेस ने हेट स्पीच के खिलाफ शिक्षा को महत्वपूर्ण उपाय बताया था। उन्होंने कहा था कि लोगों को यह समझना जरूरी है कि नफरत फैलाने वाली भाषा को पहचानकर उसका विरोध कैसे किया जाए। साथ ही, जिन लोगों या समुदायों को ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, उन्हें समर्थन देने की जरूरत है।
जून में भी दिया था स्पष्ट संदेश
17 सितंबर के संदेश से पहले भी गुटेरेस ने जून 2026 में International Day for Countering Hate Speech के अवसर पर इस विषय पर विस्तृत संदेश दिया था। उन्होंने हेट स्पीच को अमानवीयकरण की प्रक्रिया से जोड़ते हुए कहा था कि यह कई बार हिंसा, संघर्ष और अत्याचार की दिशा में जाने वाले रास्ते का हिस्सा बन सकती है।
इसी क्रम में उन्होंने सरकारों, तकनीकी कंपनियों, नागरिक समाज और आम लोगों की भूमिका पर जोर दिया था। संयुक्त राष्ट्र का दृष्टिकोण है कि केवल सरकारों की कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
संवाद और सामाजिक एकता पर जोर
गुटेरेस के संदेश का एक प्रमुख पहलू संवाद है। उनका मानना है कि भय, नफरत और विभाजन को बढ़ाने के बजाय समाजों में आपसी समझ को मजबूत करने की जरूरत है।
जून 2026 में मस्कट प्लान ऑफ एक्शन के अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा, हिंसा से प्रभावित लोगों के समर्थन, सरकारों और तकनीकी कंपनियों की मजबूत भूमिका तथा स्थानीय स्तर पर संवाद को महत्वपूर्ण उपायों के रूप में रेखांकित किया था।
उन्होंने पारंपरिक और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया था। ऐसे नेता अपने समुदायों में संवाद बढ़ाने, अफवाहों का खंडन करने और तनाव को कम करने में योगदान दे सकते हैं।
दुनिया के लिए सामूहिक जिम्मेदारी
17 सितंबर के संदेश में गुटेरेस ने मूल रूप से यही अपील की कि नफरत को सामान्य नहीं बनने दिया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से सामूहिक रूप से आवाज उठाने और भय, घृणा तथा हिंसा के चक्र को खत्म करने की दिशा में काम करने को कहा।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हेट स्पीच का मुकाबला केवल कानूनी कार्रवाई का विषय नहीं है। शिक्षा, जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार, तथ्यपरक संवाद, मानवाधिकारों का सम्मान और विभिन्न समुदायों के बीच सहयोग भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
वर्तमान डिजिटल दौर में यह मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि किसी भी भड़काऊ संदेश का प्रभाव स्थानीय सीमाओं से बाहर तेजी से पहुंच सकता है। इसी कारण संयुक्त राष्ट्र सरकारों, तकनीकी कंपनियों और नागरिक समाज से मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
निष्कर्ष
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का 17 सितंबर 2026 का संदेश हेट स्पीच के संभावित सामाजिक प्रभावों को लेकर उनकी लंबे समय से व्यक्त चिंता की कड़ी में देखा जा सकता है। उनका कहना है कि नफरत भरी भाषा हिंसा और संघर्ष के जोखिम को बढ़ाने वाली परिस्थितियों में योगदान कर सकती है।
ऐसे समय में जब सोशल मीडिया और नई डिजिटल तकनीकों के कारण सूचनाओं का प्रसार बेहद तेज हो गया है, जिम्मेदार संवाद, तथ्यपरक जानकारी और मानवाधिकारों के सम्मान की आवश्यकता महत्वपूर्ण बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र का जोर इस बात पर है कि समाज नफरत और विभाजन के बजाय संवाद, समावेश और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़े।
स्रोत: संयुक्त राष्ट्र और महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के आधिकारिक संदेश।