चित्रकूट के परदवां मजरा में विकास की रोशनी अब भी दूर, सड़क और बिजली के अभाव में ग्रामीणों की जिंदगी बेहाल
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी गांव के समग्र विकास के लिए सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। खराब सड़क से स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कृषि और स्थानीय व्यापार पर सीधा असर पड़ता है, जबकि बिजली की कमी बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीण परिवारों की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
चित्रकूट, उत्तर प्रदेश। विकास के तमाम दावों के बीच चित्रकूट जिले के मऊ ब्लॉक क्षेत्र का परदवां मजरा (कनभय पुरवा) आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में बेहतर सड़क और नियमित बिजली जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण रोजमर्रा की जिंदगी कठिन हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से समस्याओं को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखी जा रही है, लेकिन उन्हें अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है।
गांव की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि जब देश और प्रदेश में सड़क, बिजली और ग्रामीण विकास को लेकर लगातार योजनाएं संचालित की जा रही हैं, तब दूरदराज के छोटे-छोटे मजरे अभी भी बुनियादी सुविधाओं से क्यों वंचित हैं।
पक्की सड़क नहीं होने से आवागमन मुश्किल
परदवां मजरा के ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायत सड़क को लेकर है। स्थानीय लोगों के अनुसार गांव तक पहुंचने वाला रास्ता खराब होने के कारण बरसात के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है। रास्ते की स्थिति खराब होने से पैदल चलने वाले लोगों के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहनों को भी आवाजाही में दिक्कत होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं होती, बल्कि यह गांव की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों की आधारभूत जरूरत है। सड़क खराब होने से बाजार तक पहुंचने, कृषि उपज ले जाने, जरूरी सामान मंगाने और बच्चों को स्कूल पहुंचाने में अतिरिक्त कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब किसी ग्रामीण को अचानक चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है। ग्रामीणों के मुताबिक खराब रास्ते के कारण मरीज को अस्पताल ले जाने में समय लग सकता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए यह समस्या और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
एंबुलेंस पहुंचने को लेकर भी चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों में सड़क की स्थिति बड़ी बाधा बन जाती है। यदि किसी व्यक्ति को तत्काल अस्पताल ले जाना हो तो खराब रास्ते के कारण वाहन की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता तभी प्रभावी हो सकती है, जब मरीज को समय पर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए अच्छी सड़क और परिवहन व्यवस्था मौजूद हो। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग गांव की भौगोलिक स्थिति और आबादी को देखते हुए सड़क निर्माण को प्राथमिकता दें।
बिजली की समस्या से रोजमर्रा का जीवन प्रभावित
सड़क के साथ-साथ बिजली की समस्या भी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बताई जा रही है। बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से घरों के दैनिक कामकाज, बच्चों की पढ़ाई और छोटे स्तर पर होने वाली आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ता है।
आज के समय में बिजली केवल रोशनी तक सीमित नहीं है। मोबाइल फोन चार्ज करने से लेकर ऑनलाइन शिक्षा, सरकारी सेवाओं तक पहुंच और कृषि संबंधी कई गतिविधियां बिजली पर निर्भर हैं। ऐसे में बिजली की अनुपलब्धता ग्रामीण परिवारों को आधुनिक सुविधाओं से दूर कर देती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है। यदि शाम और रात के समय बिजली उपलब्ध न हो तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और शहरों में रहने वाले बच्चों के बीच सुविधाओं का अंतर और बढ़ सकता है।
खेती-किसानी पर भी पड़ रहा असर
परदवां मजरा के लोगों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण आधार खेती-किसानी है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क की खराब स्थिति के कारण कृषि कार्यों में भी परेशानी होती है। खेतों से उपज को बाजार तक ले जाने के लिए बेहतर रास्ते की आवश्यकता होती है।
यदि परिवहन व्यवस्था कमजोर हो तो किसानों को अपनी उपज ले जाने में अधिक समय और अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है। कृषि उपकरणों, खाद, बीज और अन्य आवश्यक सामग्री को गांव तक पहुंचाना भी मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों का मानना है कि सड़क का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा नहीं देगा, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है। बेहतर सड़क होने पर किसान अपनी उपज को अपेक्षाकृत आसानी से नजदीकी बाजार तक पहुंचा सकेंगे और गांव में आने-जाने वाले लोगों के लिए भी सुविधा बढ़ेगी।
शिक्षा पर भी असर
ग्रामीणों ने बच्चों की शिक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। खराब सड़क के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों को आवागमन में कठिनाई हो सकती है, जबकि बिजली की कमी पढ़ाई के समय को प्रभावित करती है।
ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा को मजबूत करने के लिए विद्यालयों के साथ-साथ परिवहन, बिजली और डिजिटल सुविधाओं का विकास भी जरूरी है। यदि किसी गांव में ये सुविधाएं कमजोर हैं तो बच्चों के लिए उपलब्ध अवसर सीमित हो सकते हैं।
जनप्रतिनिधियों से नाराजगी
ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने सड़क और बिजली की समस्या को लेकर कई बार स्थानीय स्तर पर अपनी शिकायतें रखीं। ग्रामीण अविनाश कुमार और अन्य लोगों का कहना है कि उन्होंने प्रधान, विधायक तथा प्रशासनिक अधिकारियों से समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन अभी तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली है।
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान गांव की समस्याओं पर ध्यान देने और समाधान का भरोसा दिया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद वही समस्याएं फिर सामने खड़ी रहती हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
अब कार्रवाई की उम्मीद
परदवां मजरा के ग्रामीण अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम चाहते हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि गांव तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए और बिजली व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और समयबद्ध तरीके से काम शुरू करें तो वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान संभव है।
विकास की असली तस्वीर गांवों से तय होगी
ग्रामीण विकास का अर्थ केवल बड़े प्रोजेक्ट और शहरों का विस्तार नहीं है। विकास की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब दूरदराज के छोटे मजरे भी सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ें।
चित्रकूट के परदवां मजरा की समस्या इसी व्यापक चुनौती की ओर संकेत करती है। ग्रामीणों की मांग बहुत बुनियादी है—उन्हें ऐसा रास्ता चाहिए जिससे वे सुरक्षित तरीके से अपने गांव से बाहर आ-जा सकें और ऐसी बिजली व्यवस्था चाहिए जिससे उनके घरों में बच्चों की पढ़ाई तथा दैनिक जीवन सुचारु रूप से चल सके।
अब निगाह प्रशासन और संबंधित विभागों पर है कि ग्रामीणों की शिकायतों का संज्ञान लेकर मौके की वास्तविक स्थिति की जांच की जाती है या नहीं और सड़क व बिजली की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम कब उठाए जाते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी वर्षों पुरानी मांग अब सिर्फ कागजों और आश्वासनों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धरातल पर भी बदलाव दिखाई देगा।