‘डोंट आस्क, डोंट टेल’ नीति की 15वीं बरसी पर नैन्सी पेलोसी का बयान, सैन्य सेवा में भेदभाव पर फिर उठी चर्चा

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वॉशिंगटन, 21 सितंबर 2026।

अमेरिका में समलैंगिक सैनिकों की सैन्य सेवा से जुड़ी पुरानी नीति ‘डोंट आस्क, डोंट टेल’ (Don’t Ask, Don’t Tell) को समाप्त हुए 15 वर्ष पूरे होने के मौके पर अमेरिकी सांसद नैन्सी पेलोसी ने एक बार फिर इस नीति को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। 20 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने पोस्ट में पेलोसी ने कहा कि एक समय अमेरिकी सैन्य व्यवस्था में इस नीति को सुरक्षा के लिए जरूरी बताया गया था, लेकिन बाद में यह धारणा गलत साबित हुई।

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पेलोसी ने अपने संदेश में नीति को भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि भेदभाव ने अमेरिका को कभी अधिक सुरक्षित नहीं बनाया और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेगा। उनके पोस्ट के साथ 2010 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा ‘डोंट आस्क, डोंट टेल’ नीति को समाप्त करने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए जाने की तस्वीर भी दिखाई गई है।

यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति और सैन्य इतिहास में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। वर्ष 1993 में लागू हुई इस नीति के तहत अमेरिकी सेना में समलैंगिक या उभयलिंगी होने की पहचान को लेकर एक विशेष व्यवस्था बनाई गई थी। इसके तहत सैन्य अधिकारियों को सैनिकों की यौन अभिविन्यास के बारे में पूछताछ नहीं करनी थी, जबकि सैनिकों को भी अपनी पहचान सार्वजनिक रूप से बताने से बचना पड़ता था। हालांकि, खुले तौर पर समलैंगिक होने की स्थिति में सैन्य सेवा पर रोक बनी हुई थी। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार यह नीति 28 फरवरी 1994 से 20 सितंबर 2011 तक प्रभावी रही।

2010 में शुरू हुआ नीति समाप्त करने का अंतिम चरण

‘डोंट आस्क, डोंट टेल’ को समाप्त करने की प्रक्रिया वर्ष 2010 में तेज हुई। तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नीति को समाप्त करने के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कई बार अपनी स्थिति रखी। नवंबर 2010 में रक्षा विभाग की समीक्षा के बाद ओबामा प्रशासन ने कहा था कि सैन्यकर्मियों और उनके परिवारों के बीच बड़ी संख्या नई व्यवस्था के तहत खुले तौर पर सेवा करने वाले समलैंगिक और लेस्बियन सैनिकों के साथ काम करने के लिए तैयार थी।

18 दिसंबर 2010 को अमेरिकी सीनेट ने ‘Don’t Ask, Don’t Tell Repeal Act of 2010’ को मंजूरी दी। इसके बाद 22 दिसंबर 2010 को राष्ट्रपति ओबामा ने इस कानून पर हस्ताक्षर किए। हालांकि कानून पर हस्ताक्षर के साथ नीति उसी दिन समाप्त नहीं हुई। कानून में सैन्य तैयारी और संक्रमण से जुड़े कुछ औपचारिक चरण निर्धारित किए गए थे।

22 जुलाई 2011 को राष्ट्रपति ओबामा ने घोषणा की कि नीति समाप्त करने के लिए आवश्यक शर्तें पूरी हो गई हैं। इसके बाद 60 दिनों की अवधि के बाद 20 सितंबर 2011 को ‘डोंट आस्क, डोंट टेल’ औपचारिक रूप से समाप्त हो गई।

नीति को लेकर सुरक्षा और सैन्य क्षमता पर बहस

इस नीति के समर्थन और विरोध में लंबे समय तक अलग-अलग तर्क दिए जाते रहे। नीति के समर्थकों की ओर से यह चिंता व्यक्त की जाती थी कि इसके समाप्त होने से सैन्य अनुशासन, यूनिट के भीतर तालमेल, भर्ती और सैनिकों को बनाए रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, नीति समाप्त करने के समर्थकों का तर्क था कि किसी सैनिक की यौन पहचान को सैन्य सेवा की योग्यता से अलग देखा जाना चाहिए। 2010 में अमेरिकी रक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान सैन्य नेतृत्व और अधिकारियों के बीच इस बात पर भी चर्चा हुई कि नई व्यवस्था लागू करने से सैन्य प्रभावशीलता और यूनिट एकजुटता पर क्या असर पड़ सकता है।

ओबामा प्रशासन ने उस समय कहा था कि नीति को समाप्त करने की प्रक्रिया इस तरह पूरी की जाएगी कि सैन्य तैयारी, अनुशासन और प्रभावशीलता बनी रहे। राष्ट्रपति के आधिकारिक बयान में भी सैन्य नेतृत्व की भूमिका और व्यवस्थित संक्रमण पर जोर दिया गया था।

20 सितंबर 2011 का ऐतिहासिक बदलाव

20 सितंबर 2011 को इस नीति के औपचारिक रूप से समाप्त होने के बाद समलैंगिक सैनिकों को अपनी यौन पहचान छिपाए बिना अमेरिकी सशस्त्र बलों में सेवा करने की अनुमति मिली। अमेरिकी रक्षा विभाग ने बाद के वर्षों में इस दिन को नीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में याद किया है।

रक्षा विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस नीति के दौरान यौन अभिविन्यास के कारण बड़ी संख्या में सैन्यकर्मियों को सेवा से अलग किया गया था। विभाग ने बाद में ऐसे पुराने रिकॉर्डों की समीक्षा और कुछ मामलों में डिस्चार्ज रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया भी शुरू की।

रक्षा विभाग ने 2023 में बताया था कि ‘डोंट आस्क, डोंट टेल’ के तहत अलग किए गए कुछ पूर्व सैन्यकर्मियों को कम अनुकूल डिस्चार्ज मिला था, जिसका असर उन्हें मिलने वाले कुछ पूर्व-सैनिक लाभों पर पड़ सकता था। विभाग ने पात्र मामलों में रिकॉर्ड सुधारने की दिशा में कार्रवाई की।

पेलोसी की टिप्पणी का संदर्भ

2026 में नीति समाप्त हुए 15 वर्ष पूरे होने पर पेलोसी की टिप्पणी इसी ऐतिहासिक बदलाव को याद करती है। उनके सोशल मीडिया पोस्ट का मुख्य संदेश यह है कि सैन्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बनाई गई नीतियों का मूल्यांकन समय के साथ उनके वास्तविक प्रभावों के आधार पर किया जाना चाहिए।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पेलोसी का पोस्ट एक राजनीतिक नेता का सार्वजनिक वक्तव्य है। उनके बयान में नीति को लेकर स्पष्ट मूल्यांकन प्रस्तुत किया गया है, जबकि ‘डोंट आस्क, डोंट टेल’ के इतिहास को समझने के लिए उस समय की सैन्य, राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को भी देखना आवश्यक है।

नीति समाप्त होने के बाद क्या बदला?

नीति समाप्त होने के बाद अमेरिकी सैन्य व्यवस्था में समलैंगिक सैनिकों के खुले तौर पर सेवा करने का रास्ता साफ हुआ। रक्षा विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, नीति हटने के बाद कई प्रक्रियाओं में बदलाव किए गए, जबकि ऐसी अनेक सैन्य नीतियां पहले से ही यौन अभिविन्यास के आधार पर तटस्थ थीं।

2011 में नीति समाप्त होने के बाद अमेरिकी सैन्य संस्थानों ने इसके कार्यान्वयन को लेकर प्रशिक्षण और प्रशासनिक तैयारियां की थीं। बाद में रक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को सैन्य संस्थान के भीतर बड़े प्रशासनिक बदलावों में से एक के रूप में वर्णित किया।

इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि नीति को समाप्त करना केवल कानून में बदलाव नहीं था। इसके साथ उन हजारों पूर्व सैनिकों के रिकॉर्ड, सेवा इतिहास और अधिकारों से जुड़े सवाल भी सामने आए जिन्हें पुरानी व्यवस्था के दौरान सेना से अलग किया गया था।

15 साल बाद भी क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

‘डोंट आस्क, डोंट टेल’ की समाप्ति को 15 वर्ष पूरे होना अमेरिकी सैन्य इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय की याद दिलाता है। इस घटना के जरिए यह समझा जा सकता है कि सैन्य नीतियां समय के साथ सामाजिक परिस्थितियों, कानूनी बदलावों और सैन्य नेतृत्व की समीक्षा के आधार पर कैसे बदलती हैं।

20 सितंबर 2011 को नीति की औपचारिक समाप्ति के समय ओबामा प्रशासन ने इसे सैन्य सेवा में खुलेपन और समानता से जोड़कर देखा था। रक्षा विभाग ने भी बाद के वर्षों में इस बदलाव की वर्षगांठ पर सैन्यकर्मियों और पूर्व सैनिकों से जुड़े पुराने रिकॉर्डों को सुधारने की दिशा में कदमों का उल्लेख किया है।

इस तरह, 2026 में पेलोसी का बयान केवल एक पुरानी नीति की वर्षगांठ से जुड़ी टिप्पणी नहीं है, बल्कि अमेरिकी सैन्य इतिहास में उस दौर को फिर से चर्चा में लाता है जब सैनिकों की निजी पहचान, सैन्य अनुशासन, समानता और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर व्यापक राजनीतिक बहस हुई थी। ‘डोंट आस्क, डोंट टेल’ की कहानी आज भी अमेरिकी नीति-निर्माण में कानून, सैन्य संस्थानों और नागरिक अधिकारों के बीच संबंध को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनी हुई है।

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