अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस पर एंटोनियो गुटेरेस का संदेश: दुनिया में शांति के लिए सामूहिक प्रयास और संवाद पर जोर

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नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026।
संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया में बढ़ते संघर्षों, हिंसा और विभाजन के बीच शांति की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शांति की उपलब्धता बेहद सीमित दिखाई दे

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रही है, लेकिन इसके बावजूद दुनिया के आम लोग, स्वयंसेवक, नागरिक समाज के प्रतिनिधि, शांति कार्यकर्ता और संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिक बदलाव के लिए काम कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की थीम “Investing in Peace: For Everyone, Everywhere, Every Day” यानी “शांति में निवेश: सभी के लिए, हर जगह, हर दिन” है।

शांति को केवल युद्ध की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं किया जा सकता

गुटेरेस के संदेश में शांति को केवल युद्ध या हथियारबंद संघर्ष की समाप्ति के रूप में देखने के बजाय व्यापक सामाजिक व्यवस्था से जोड़ा गया है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक शांति का संबंध सुरक्षा, सम्मान, अवसर और सहयोग से भी है। इसका अर्थ ऐसी परिस्थितियां तैयार करना है, जहां लोग भय और हिंसा से मुक्त होकर अपने दैनिक जीवन को आगे बढ़ा सकें।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में कई संघर्ष अधिक जटिल होते जा रहे हैं और उनका प्रभाव सीमाओं के पार भी दिखाई देता है। ऐसे माहौल में बातचीत, कूटनीति और सहयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। गुटेरेस ने अपने संदेश में इसी दिशा में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया है।

आम लोग भी शांति निर्माण में निभा सकते हैं भूमिका

गुटेरेस ने अपने संदेश में विशेष रूप से उन लोगों का उल्लेख किया जो स्थानीय स्तर पर शांति के लिए काम कर रहे हैं। इनमें स्वयंसेवक, सामाजिक कार्यकर्ता, नागरिक समाज के नेता, शांति सैनिक और शांति स्थापित करने वाले अन्य लोग शामिल हैं।

उनके अनुसार, शांति केवल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों या सरकारों के बीच होने वाली वार्ताओं से नहीं बनती। इसका निर्माण समाज के छोटे-छोटे स्तरों पर भी होता है। पड़ोस, स्कूल, समुदाय और स्थानीय संस्थाओं में संवाद तथा आपसी समझ बढ़ाने वाले प्रयास भी शांति की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

इस दृष्टिकोण में स्थानीय समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई है। जब अलग-अलग समूहों के बीच मतभेद पैदा होते हैं, तब बातचीत और एक-दूसरे की बात सुनने की प्रक्रिया तनाव कम करने में मदद कर सकती है।

गुटेरेस ने विश्व नेताओं से शांति में निवेश की अपील की

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस से पहले 9 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में जापानी पीस बेल समारोह के दौरान भी गुटेरेस ने शांति के लिए ठोस प्रयासों की आवश्यकता बताई थी। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश को शांति निर्माण से जोड़ते हुए संस्थानों और व्यवस्थाओं में लोगों के विश्वास को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कूटनीति, संवाद, बातचीत और शांति स्थापना को संघर्षों से निपटने के महत्वपूर्ण साधनों के रूप में रेखांकित किया। उनके संदेश में युद्धों और संघर्षों को समाप्त करने के लिए राजनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की अपील भी शामिल थी।

विकास और शांति के बीच संबंध

संयुक्त राष्ट्र के 2026 के संदेश में शांति को सतत विकास से भी जोड़ा गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों में निवेश समाजों को अधिक स्थिर बनाने में योगदान दे सकता है।

जब लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा तक बेहतर पहुंच मिलती है, तो उनके लिए आर्थिक और सामाजिक अवसरों का विस्तार होता है। इसी कारण संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष की थीम में “शांति में निवेश” को व्यापक अर्थ दिया है। इसका उद्देश्य केवल संघर्ष के समय प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां तैयार करना है जिनमें शांतिपूर्ण समाज विकसित हो सकें।

मानवाधिकार और सम्मान पर भी जोर

गुटेरेस के संदेश में मानवाधिकार और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा की रक्षा को भी शांति की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, टिकाऊ शांति के लिए ऐसी व्यवस्थाओं की जरूरत होती है जिनमें लोगों की आवाज सुनी जाए और उन्हें सम्मान मिले।

इस संदर्भ में सामाजिक विभाजन को कम करना और विभिन्न समुदायों के बीच संवाद स्थापित करना महत्वपूर्ण है। किसी भी समाज में जब लोगों के बीच अविश्वास बढ़ता है, तो संवाद की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की भूमिका

शांति स्थापना के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2026 में 11 शांति अभियानों में 51,000 से अधिक नागरिक, सैन्य और पुलिसकर्मी सेवा दे रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में स्थिरता कायम करने, नागरिकों की सहायता करने और राजनीतिक समाधान के लिए परिस्थितियां तैयार करने में योगदान देना है।

संयुक्त राष्ट्र ने यह भी बताया है कि 1948 के बाद से लगभग 4,500 शांति सैनिकों की जान शांति स्थापना के प्रयासों में जा चुकी है। वर्ष 2025 में ही 59 शांति सैनिकों की मृत्यु हुई थी।

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस का इतिहास

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1981 में इस दिवस की स्थापना की थी। बाद में 2001 में महासभा ने 21 सितंबर को अहिंसा और संघर्ष विराम के लिए समर्पित दिवस के रूप में निर्धारित किया।

इस दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में शांति के आदर्शों को मजबूत करना और लोगों को हिंसा तथा संघर्ष के स्थान पर संवाद और सहयोग की दिशा में प्रेरित करना है।

इस वर्ष की थीम का संदेश

2026 की थीम “Investing in Peace: For Everyone, Everywhere, Every Day” इस विचार को सामने रखती है कि शांति के लिए केवल संकट के समय कदम उठाना पर्याप्त नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, शांति निर्माण लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और इसमें सरकारों के साथ-साथ समुदायों तथा आम नागरिकों की भी भूमिका है।

इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र ने ऐसे लोगों को “everyday architects of peace” यानी रोजमर्रा के जीवन में शांति की नींव रखने वाले लोगों के रूप में रेखांकित किया है, जो स्थानीय स्तर पर समुदायों को जोड़ने और संवाद को आगे बढ़ाने का काम करते हैं।

युवाओं और समुदायों की भागीदारी

शांति निर्माण में युवा वर्ग की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्कूलों और समुदायों में संवाद, सहयोग तथा विभिन्न विचारों को समझने की प्रक्रिया सामाजिक विश्वास को मजबूत करने में योगदान दे सकती है।

संयुक्त राष्ट्र ने लोगों से छोटे-छोटे स्तर पर शांति के लिए कदम उठाने की अपील की है। किसी की मदद करना, सकारात्मक बदलाव के लिए आवाज उठाना, संवाद आयोजित करना और शांति से जुड़े संदेशों को आगे बढ़ाना ऐसे प्रयासों में शामिल हैं।

निष्कर्ष

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 2026 पर एंटोनियो गुटेरेस का संदेश दुनिया में जारी संघर्षों के बीच शांति निर्माण के लिए निरंतर प्रयासों पर केंद्रित है। उनका संदेश कूटनीति, संवाद, मानवाधिकार, सतत विकास और शांति स्थापना जैसे क्षेत्रों में निवेश की आवश्यकता को रेखांकित करता है। संयुक्त राष्ट्र का इस वर्ष का अभियान यह भी बताता है कि शांति केवल विश्व नेताओं की जिम्मेदारी नहीं है; स्थानीय समुदायों, नागरिक समाज, स्वयंसेवकों और आम लोगों के प्रयास भी इसकी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

21 सितंबर का यह दिवस इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया को याद दिलाता है कि संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और सहयोग की आवश्यकता लगातार बनी रहती है। संयुक्त राष्ट्र के 2026 संदेश का केंद्रीय विचार यही है कि शांति को केवल एक लक्ष्य के रूप में नहीं, बल्कि हर दिन किए जाने वाले प्रयास के रूप में देखा जाए।

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