ट्रंप और जेलेंस्की की न्यूयॉर्क में मुलाकात पर बनी सहमति, यूक्रेन युद्ध के बीच कूटनीतिक प्रयासों को मिली नई गति

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नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026।
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच न्यूयॉर्क में मुलाकात पर सहमति बनी है। जेलेंस्की ने 20 सितंबर को ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद इसकी जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने बातचीत को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की और न्यूयॉर्क में आमने-सामने मिलने का फैसला किया है।

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यह मुलाकात संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान होने की उम्मीद है। ऐसे समय में दोनों नेताओं की प्रस्तावित बैठक को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, बैठक से किसी निश्चित समझौते या युद्धविराम की घोषणा होगी, ऐसा अभी कहना संभव नहीं है।

जेलेंस्की ने बातचीत को बताया महत्वपूर्ण

जेलेंस्की के अनुसार, ट्रंप के साथ उनकी बातचीत में युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा हुई। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए आगे बढ़ने के रास्ते तलाश रहे हैं। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि शांति की दिशा में आगे बढ़ना यूक्रेन की पहली प्राथमिकता है।

उनके बयान के मुताबिक, बातचीत में तनाव कम करने के संभावित कदमों और सुरक्षा से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर भी विचार हुआ। इनमें ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और आम लोगों के जीवन की सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अमेरिकी टीम के साथ मिलकर काम कर रहा है और गंभीर कदम उठाने के लिए तैयार है।

इससे यह संकेत मिलता है कि प्रस्तावित ट्रंप-जेलेंस्की बैठक केवल सामान्य द्विपक्षीय वार्ता तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि युद्ध से जुड़े व्यावहारिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर भी केंद्रित हो सकती है।

विटकॉफ और कुशनर की कीव यात्रा का भी जिक्र

जेलेंस्की ने बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रतिनिधियों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की यूक्रेन यात्रा के लिए भी ट्रंप का धन्यवाद किया। दोनों अमेरिकी प्रतिनिधियों ने सितंबर की शुरुआत में कीव में जेलेंस्की और यूक्रेनी अधिकारियों के साथ बातचीत की थी।

यूक्रेनी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, विटकॉफ और कुशनर के साथ हुई वार्ता का उद्देश्य बातचीत की प्रक्रिया को फिर से सक्रिय करना और शांति की दिशा में संभावनाओं को तलाशना था। जेलेंस्की ने उस समय भी कहा था कि बातचीत के किसी भी ऐसे प्रारूप का महत्व है, जिससे कूटनीतिक प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

विटकॉफ और कुशनर की कीव यात्रा से पहले अमेरिकी प्रतिनिधियों ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी बातचीत की थी। इस क्रम ने अमेरिकी प्रशासन की ओर से रूस और यूक्रेन दोनों पक्षों के साथ समानांतर संपर्क की कोशिश को रेखांकित किया।

तनाव कम करने के उपायों पर जोर

यूक्रेन और रूस के बीच सैन्य संघर्ष जारी रहने के बावजूद कूटनीतिक स्तर पर कुछ सीमित तनाव-घटाने वाले विकल्पों पर चर्चा होती रही है। सितंबर की शुरुआत में जेलेंस्की ने कहा था कि बातचीत की प्रक्रिया से जुड़े शहरों पर हवाई हमलों को लेकर अस्थायी संयम बरतने की तैयारी है और रूस से भी इसी तरह के कदम की अपेक्षा की गई थी।

हालांकि, इसके बाद भी दोनों देशों के बीच हमलों की खबरें सामने आती रही हैं। हालिया रिपोर्टों में रूस और यूक्रेन के बीच हवाई हमलों में तेजी का उल्लेख किया गया है। ऐसे माहौल में किसी व्यापक शांति समझौते तक पहुंचना अभी भी एक जटिल कूटनीतिक चुनौती बना हुआ है।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दे

जेलेंस्की ने ट्रंप के साथ बातचीत के संदर्भ में ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। रूस-यूक्रेन संघर्ष का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा है। ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों और युद्ध से जुड़ी अनिश्चितताओं ने क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापक वैश्विक बाजारों पर भी असर डाला है।

खाद्य सुरक्षा भी लंबे समय से इस संघर्ष का एक अहम अंतरराष्ट्रीय पहलू रही है। यूक्रेन वैश्विक कृषि आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए युद्ध और परिवहन संबंधी व्यवधानों का असर अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजारों पर पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने भी यूक्रेन युद्ध को वैश्विक खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा से जोड़कर चिंता व्यक्त की है।

रूस पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी कोशिश

जेलेंस्की ने अपने संदेश में ट्रंप द्वारा रूस से संबंधित प्रतिबंध विधेयक पर हस्ताक्षर किए जाने का भी स्वागत किया। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने सितंबर में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े विधेयक को पारित किया था, जिसमें रूसी अधिकारियों, बैंकों और तेल कारोबार से संबंधित संस्थाओं को प्रभावित करने वाले उपाय शामिल थे।

यूक्रेन लंबे समय से रूस पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाने की मांग करता रहा है। अमेरिका की प्रतिबंध नीति को लेकर अमेरिकी राजनीति में भी अलग-अलग मत सामने आए हैं। इसलिए इस कदम का वास्तविक प्रभाव रूस की अर्थव्यवस्था और युद्ध संबंधी निर्णयों पर किस हद तक पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

न्यूयॉर्क बैठक से क्या उम्मीदें?

ट्रंप और जेलेंस्की की प्रस्तावित बैठक ऐसे समय में हो रही है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दुनिया के कई प्रमुख नेता न्यूयॉर्क में मौजूद रहेंगे। इस वजह से यूक्रेन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए यह सप्ताह महत्वपूर्ण हो सकता है।

दोनों नेताओं के बीच बातचीत में युद्धविराम, सुरक्षा गारंटी, ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा और आगे की बातचीत जैसे मुद्दे उठने की संभावना है। हालांकि, इन मुद्दों पर रूस और यूक्रेन के रुख में अंतर बना हुआ है। इसलिए किसी भी संभावित समझौते के लिए कई चरणों की बातचीत की आवश्यकता पड़ सकती है।

जेलेंस्की ने बैठक को लेकर कहा है कि इसमें महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना हो सकती है और वर्तमान समय में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों से यह भी स्पष्ट है कि सैन्य संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और दोनों पक्षों के बीच कई मूलभूत मतभेद बने हुए हैं।

आगे की दिशा पर नजर

ट्रंप-जेलेंस्की बैठक की सबसे बड़ी अहमियत इस बात में होगी कि दोनों नेता बातचीत की प्रक्रिया को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं। अमेरिकी प्रतिनिधियों की मॉस्को और कीव यात्राओं के बाद उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र महासभा दोनों देशों से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का बड़ा मंच उपलब्ध कराएगी।

फिलहाल यह स्पष्ट है कि यूक्रेन शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ संपर्क बनाए रखना चाहता है। वहीं, अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहा है। लेकिन किसी अंतिम शांति समझौते की राह में सुरक्षा, क्षेत्रीय नियंत्रण और युद्धविराम जैसे जटिल मुद्दे मौजूद हैं।

इसलिए न्यूयॉर्क में प्रस्तावित मुलाकात को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संपर्क के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसके परिणामों के बारे में निष्कर्ष बैठक और उसके बाद होने वाली वार्ताओं के आधार पर ही निकाला जा सकेगा। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रखना और तनाव कम करने के संभावित रास्ते तलाशना कूटनीतिक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।

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