यूक्रेन में रूसी हवाई हमलों का बढ़ता दबाव, खेरसॉन के मठ पर ड्रोन हमले में पादरी की मौत; जेलेंस्की ने प्रतिबंध बढ़ाने की अपील की
कीव, 21 सितंबर 2026। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में हवाई हमलों की तीव्रता लगातार चर्चा में बनी हुई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि बीते एक सप्ताह में रूस की ओर से यूक्रेनी क्षेत्रों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन, हवाई बम और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इसी दौरान खेरसॉन क्षेत्र के एक पुरुष मठ पर हुए ड्रोन हमले में एक पादरी की मौत और चार अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

जेलेंस्की ने 20 सितंबर को जारी अपने बयान में कहा कि सात दिनों के दौरान यूक्रेन पर 2,000 से अधिक हमलावर ड्रोन भेजे गए। इसके अलावा करीब 1,700 हवाई बम और 19 अलग-अलग मिसाइलों के इस्तेमाल का भी उन्होंने दावा किया। यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, हमलों का प्रभाव कई इलाकों में नागरिक और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर पड़ा है।
खेरसॉन के मठ को बनाया गया ड्रोन हमले का निशाना
खेरसॉन क्षेत्र में 19 सितंबर को हुई एक घटना ने विशेष चिंता पैदा की। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, नोवोरायस्क समुदाय के चेरवोनी मायाक गांव में स्थित पुरुष मठ पर दोपहर के समय एफपीवी ड्रोन से हमला किया गया।
क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख ओलेक्सांद्र प्रोकुदिन के अनुसार, हमले में 71 वर्षीय पादरी की जान चली गई। घटना में चार अन्य पादरी भी घायल हुए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक घायल पादरियों की उम्र 31, 51, 51 और 53 वर्ष बताई गई है।
प्रारंभिक रिपोर्टों में घायलों को विस्फोट और मलबे अथवा छर्रों से संबंधित चोटें आने की जानकारी दी गई। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने स्थिति का जायजा लिया और घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।
जेलेंस्की ने मृत पादरी के निधन पर संवेदना व्यक्त करते हुए उनके परिवार और परिचितों के प्रति शोक जताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को लगातार रूसी हवाई हमलों के बीच अपनी आबादी की सुरक्षा के लिए प्रयास करना पड़ रहा है।
कई क्षेत्रों में नुकसान का यूक्रेनी अधिकारियों का दावा
यूक्रेनी राष्ट्रपति के बयान के अनुसार, हाल के हमलों का असर देश के कई हिस्सों में दिखाई दिया। उन्होंने खार्किव, सुमी और ओडेसा जैसे क्षेत्रों में नागरिक तथा महत्वपूर्ण ढांचे को नुकसान पहुंचने की बात कही।
निप्रॉपेट्रोस और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में आवासीय इमारतों के प्रभावित होने की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा विन्नित्सिया, कीव, झितोमिर और चर्कासी क्षेत्रों में भी शाम और रात के दौरान हमलों की खबरें सामने आईं।
इन घटनाओं से जुड़े आंकड़े मुख्य रूप से यूक्रेनी अधिकारियों द्वारा जारी किए गए हैं। इसलिए अलग-अलग घटनाओं और नुकसान के आंकड़ों को संबंधित अधिकारियों के दावों के रूप में देखना जरूरी है, क्योंकि युद्ध के दौरान स्वतंत्र रूप से हर घटना की पुष्टि करना हमेशा संभव नहीं होता।
एक सप्ताह में हजारों ड्रोन इस्तेमाल होने का दावा
जेलेंस्की के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर रूस ने 2,000 से ज्यादा हमलावर ड्रोन का इस्तेमाल किया। उन्होंने इनमें बड़ी संख्या में जेट-चालित ड्रोन होने का दावा भी किया। इसके साथ लगभग 1,700 हवाई बम और 19 मिसाइलों के इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में हवाई और ड्रोन आधारित हमले अब भी सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बने हुए हैं। ड्रोन अपेक्षाकृत कम लागत में दूर स्थित लक्ष्यों तक पहुंचने और लगातार हमले करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
हालांकि किसी भी पक्ष द्वारा जारी सैन्य आंकड़ों को स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापित करना महत्वपूर्ण होता है। युद्ध क्षेत्र से आने वाली सूचनाओं में समय के साथ बदलाव भी हो सकता है।
कीव क्षेत्र में भी जनहानि की खबर
हालिया घटनाओं के बीच कीव क्षेत्र में भी ड्रोन हमले से जुड़ी गंभीर खबर सामने आई। रॉयटर्स ने यूक्रेनी अधिकारियों के हवाले से बताया कि एक रूसी ड्रोन हमले में चार लोगों की मौत हुई, जिनमें तीन बच्चे शामिल थे।
इसके अलावा विभिन्न इलाकों में इमारतों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी भी सामने आई। ऐसी घटनाओं ने एक बार फिर आबादी वाले क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।
यूक्रेन के लिए चुनौती केवल हवाई हमलों को रोकना नहीं है, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, परिवहन नेटवर्क, आवासीय क्षेत्रों और अन्य आवश्यक सेवाओं को भी लगातार संचालित रखना है।
जेलेंस्की ने अमेरिका, यूरोप और जी7 से मांगा दबाव बढ़ाने का कदम
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपने ताजा बयान में पश्चिमी देशों से रूस पर अतिरिक्त दबाव बनाने की अपील की। उन्होंने अमेरिका, यूरोपीय देशों और जी7 के सदस्यों से नए प्रतिबंधात्मक उपायों पर विचार करने का आग्रह किया।
जेलेंस्की का कहना है कि रूस पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए सहयोगी देशों के पास अतिरिक्त विकल्प मौजूद हैं। उनका तर्क है कि ऐसे कदम रूस के लिए युद्ध की लागत बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के प्रभाव और उनकी प्रभावशीलता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग आकलन मौजूद हैं। प्रतिबंधों का वास्तविक प्रभाव अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, व्यापार और सैन्य आपूर्ति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरीके से दिखाई दे सकता है।
इस विशेष अपील पर रूस की ओर से कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में दर्ज नहीं है।
रूस भी यूक्रेनी ड्रोन हमलों की शिकायत करता रहा है
रूस-यूक्रेन संघर्ष में केवल यूक्रेन ही रूसी हमलों की बात नहीं करता। रूसी अधिकारी भी समय-समय पर यूक्रेन की ओर से किए गए ड्रोन हमलों की जानकारी देते रहे हैं।
20 सितंबर को रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने मॉस्को क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन गतिविधि से संबंधित घटनाओं की जानकारी दी। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों के दौरान एक तेल रिफाइनरी और कुछ अन्य स्थान प्रभावित हुए तथा बड़ी संख्या में ड्रोन को नष्ट या रोकने का दावा किया गया।
इससे स्पष्ट है कि ड्रोन युद्ध का प्रभाव दोनों देशों के अपेक्षाकृत दूर स्थित इलाकों तक पहुंच रहा है। संघर्ष अब केवल जमीन पर मौजूद अग्रिम मोर्चों तक सीमित नहीं है।
हवाई रक्षा क्षमता बनी अहम जरूरत
लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच यूक्रेन के लिए हवाई रक्षा प्रणाली की क्षमता महत्वपूर्ण बनी हुई है। यूक्रेनी सरकार लंबे समय से अपने सहयोगी देशों से अतिरिक्त वायु रक्षा उपकरण और सैन्य सहायता उपलब्ध कराने की मांग करती रही है।
हवाई रक्षा प्रणालियों का उद्देश्य आने वाले ड्रोन और मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले रोकना होता है। लेकिन बड़े पैमाने पर होने वाले हमलों के दौरान किसी देश की रक्षा प्रणाली के सामने एक साथ कई लक्ष्यों से निपटने की चुनौती रहती है।
यूक्रेन की ओर से पश्चिमी देशों से सहायता की मांग इसी व्यापक सुरक्षा आवश्यकता के संदर्भ में की जाती रही है।
युद्ध के साथ कूटनीतिक प्रयास भी जारी
सैन्य गतिविधियों के समानांतर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। विभिन्न देश युद्ध को समाप्त करने, बातचीत की संभावनाएं तलाशने और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपने-अपने स्तर पर पहल करते रहे हैं।
हालांकि जमीन पर जारी हमलों और राजनीतिक स्तर पर चल रही बातचीत के बीच अभी भी कई गंभीर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ प्रतिबंधों, अंतरराष्ट्रीय सहायता और कूटनीतिक संपर्कों पर भी नजर रहेगी।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का असर दोनों देशों की नागरिक आबादी के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। खेरसॉन के मठ पर हुआ ताजा हमला इसी व्यापक संघर्ष की मानवीय कीमत को सामने लाता है।