NBCS-2026 पर राष्ट्रीय कार्यशाला: 100 वर्ष की सोच के साथ भविष्य का भारत बनाने पर जोर
सुदाम बाबू स्टेट ब्यूरो ओडिशा
हिट एंड हॉट न्यूज़
भुवनेश्वर | 19 सितंबर 2026
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आधुनिक, सुरक्षित, टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “Building Future Bharat with NBCS-2026” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के भवन निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, इंजीनियरों, प्रशासनिक प्रतिनिधियों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन इंडियन बिल्डिंग्स कांग्रेस (IBC) के ओडिशा स्टेट चैप्टर और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यशाला के समापन सत्र में ओडिशा के कानून, लोक निर्माण और आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज तैयार की जा रही आधारभूत संरचनाओं को केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि उनके निर्माण में आने वाली कई पीढ़ियों की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने पर विशेष जोर दिया।

100 वर्ष की सोच के साथ हो बुनियादी ढांचे का निर्माण
मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि आधुनिक बुनियादी ढांचा किसी भी राज्य और देश के विकास की आधारशिला है। इसलिए भवन, सड़क, सार्वजनिक उपयोग की संरचनाएं और अन्य परियोजनाएं तैयार करते समय उनके लंबे समय तक उपयोग में बने रहने की क्षमता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने परियोजनाओं की योजना और निर्माण में 100 वर्ष की दृष्टि अपनाने की आवश्यकता बताई। उनका जोर केवल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि ऐसी व्यवस्थाओं के विकास पर था जो समय के साथ बदलती परिस्थितियों, तकनीकी आवश्यकताओं और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर सकें।
उनके अनुसार किसी भी बड़ी निर्माण परियोजना का मूल्यांकन सिर्फ इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वह कितनी जल्दी तैयार हुई या उसकी प्रारंभिक लागत कितनी रही। यह भी देखना जरूरी है कि वह संरचना भविष्य में कितनी सुरक्षित रहेगी, उसका रखरखाव कितना प्रभावी होगा और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप उसमें आवश्यक सुधार कितनी आसानी से किए जा सकेंगे।
संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा पर विशेष ध्यान
कार्यशाला में भवनों और अन्य निर्माण परियोजनाओं की संरचनात्मक मजबूती को महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने रखा गया। आधुनिक निर्माण तकनीकों के विस्तार के साथ यह आवश्यकता भी बढ़ रही है कि निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों और सुरक्षा प्रावधानों का गंभीरता से पालन किया जाए।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के भारत का बुनियादी ढांचा केवल देखने में आधुनिक नहीं, बल्कि संरचनात्मक रूप से मजबूत और सुरक्षित भी होना चाहिए। इसके लिए डिजाइन, निर्माण सामग्री, निर्माण प्रक्रिया, निरीक्षण और रखरखाव—सभी स्तरों पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने भी इस बात पर चर्चा की कि भवन की सुरक्षा केवल निर्माण के समय की गुणवत्ता पर निर्भर नहीं करती। समय बीतने के साथ किसी भी संरचना की स्थिति में परिवर्तन हो सकता है। इसलिए नियमित निरीक्षण और समय-समय पर संरचनात्मक जांच को निर्माण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना जरूरी है।

आपदा-रोधी ढांचे की आवश्यकता
ओडिशा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे पर भी कार्यशाला में विशेष चर्चा हुई। NBCS-2026 के संदर्भ में विशेषज्ञों ने इस बात पर विचार किया कि भवनों और अन्य संरचनाओं को संभावित आपदाओं के प्रभाव को ध्यान में रखकर किस तरह तैयार किया जा सकता है।
आपदा-लचीला निर्माण केवल भवन की मजबूती तक सीमित नहीं है। इसमें निर्माण की जगह, डिजाइन, उपयोग की जाने वाली सामग्री, सुरक्षा प्रणालियां और आपदा की स्थिति में लोगों की सुरक्षित आवाजाही जैसे अनेक पहलू शामिल होते हैं।
कार्यशाला का उद्देश्य इन सभी पहलुओं को व्यापक निर्माण व्यवस्था के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करना था, ताकि भविष्य में तैयार होने वाला बुनियादी ढांचा असामान्य परिस्थितियों में भी अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सके।
परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर जोर
मंत्री हरिचंदन ने निर्माण परियोजनाओं को पूरा करने में लगने वाले समय को कम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। लंबे समय तक चलने वाली परियोजनाओं से न केवल लागत और संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं में भी देरी होती है।
हालांकि, परियोजना की गति बढ़ाने का अर्थ गुणवत्ता या सुरक्षा से समझौता करना नहीं होना चाहिए। कार्यशाला में चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू यही रहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर योजना, कुशल कार्यबल और मानकीकृत प्रक्रियाओं की सहायता से निर्माण कार्य को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाया जा सकता है।
इस दृष्टिकोण के तहत परियोजना की शुरुआत से लेकर उसके रखरखाव तक विभिन्न चरणों में समन्वय स्थापित करना आवश्यक माना गया।

हरित बुनियादी ढांचे को बढ़ावा
कार्यशाला में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी भविष्य की निर्माण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और निर्माण गतिविधियों के बीच पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
हरित बुनियादी ढांचे की अवधारणा में संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, ऊर्जा दक्षता, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और लंबे समय तक टिकाऊ निर्माण व्यवस्था जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाता है।
मंत्री ने निर्माण क्षेत्र से जुड़े हितधारकों से आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को अपनाने का आग्रह किया। इसके साथ ही वैकल्पिक निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।
वैकल्पिक निर्माण सामग्री पर चर्चा
निर्माण क्षेत्र में पारंपरिक सामग्रियों के साथ-साथ वैकल्पिक सामग्रियों के प्रयोग की संभावनाएं भी कार्यशाला के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल रहीं।
विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि बदलते समय में ऐसी निर्माण सामग्री और तकनीकों को अपनाने की जरूरत है, जो संरचना की गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखते हुए संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग में सहायता कर सकें।
वैकल्पिक निर्माण सामग्री को अपनाने से पहले उसके तकनीकी गुणों, टिकाऊपन, सुरक्षा और निर्धारित मानकों के अनुरूप होने की जांच आवश्यक है। इसी कारण मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया।
भवन रखरखाव में IoT तकनीक का इस्तेमाल
कार्यशाला में IoT आधारित बिल्डिंग मेंटेनेंस सिस्टम को लेकर भी चर्चा हुई। इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी IoT तकनीक की मदद से भवनों से संबंधित विभिन्न प्रणालियों की निगरानी और रखरखाव को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
भविष्य में स्मार्ट तकनीक आधारित रखरखाव व्यवस्था भवनों की कार्यक्षमता और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की निगरानी में उपयोगी हो सकती है। इससे किसी संभावित समस्या का पता समय रहते लगाने और रखरखाव की योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।
कार्यशाला में इस प्रकार की उभरती तकनीकों को भविष्य के निर्माण और भवन प्रबंधन से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
NBCS-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा
कार्यशाला का केंद्रीय विषय NBCS-2026 रहा। विशेषज्ञों ने इसके विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और निर्माण क्षेत्र में मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदमों पर विचार किया।
NBCS-2026 के संदर्भ में चर्चा के दौरान निर्माण सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, आपदा-रोधी क्षमता, टिकाऊ निर्माण और गुणवत्ता आधारित खरीद प्रणाली जैसे विषय प्रमुख रहे।
कार्यशाला में यह बात सामने आई कि किसी भी भवन निर्माण मानक की सफलता केवल उसके तैयार होने पर निर्भर नहीं करती। उसका वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब संबंधित विभाग, इंजीनियर, निर्माण एजेंसियां, निरीक्षण संस्थाएं और अन्य हितधारक उसे व्यवहार में प्रभावी ढंग से लागू करें।
दस वर्ष से अधिक पुराने भवनों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की सिफारिश
राष्ट्रीय कार्यशाला में एक महत्वपूर्ण सिफारिश यह भी रही कि 10 वर्ष से अधिक पुराने भवनों का संरचनात्मक ऑडिट कराया जाना चाहिए।
समय के साथ भवनों की संरचनात्मक स्थिति में बदलाव आ सकता है। नियमित निरीक्षण से ऐसी समस्याओं की पहचान में सहायता मिल सकती है, जिन्हें नजरअंदाज करने पर भविष्य में बड़ी चुनौती पैदा हो सकती है।
संरचनात्मक ऑडिट के माध्यम से भवन की वर्तमान स्थिति का आकलन किया जा सकता है और आवश्यक होने पर मरम्मत, सुधार या अन्य तकनीकी उपायों की योजना बनाई जा सकती है।
इस सिफारिश को विशेष महत्व इसलिए भी दिया गया क्योंकि भवन सुरक्षा केवल नए निर्माण तक सीमित विषय नहीं है। पहले से मौजूद भवनों की सुरक्षा और रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
प्रशिक्षित और लाइसेंस प्राप्त ऑडिटरों की कमी
कार्यशाला में यह भी सामने आया कि विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित और लाइसेंस प्राप्त संरचनात्मक ऑडिटरों की उपलब्धता एक चुनौती है।
यदि पुराने भवनों के बड़े स्तर पर संरचनात्मक ऑडिट की व्यवस्था करनी है तो पर्याप्त संख्या में योग्य विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। इसके लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आवश्यक योग्यता वाले पेशेवरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ध्यान देना होगा।
इस संदर्भ में विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। इससे संरचनात्मक ऑडिट की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ भवन सुरक्षा से जुड़े मानकों के प्रभावी अनुपालन में भी मदद मिल सकती है।
जागरूकता और क्षमता निर्माण को प्राथमिकता
कार्यशाला में लगातार जागरूकता कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण पहलों की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
निर्माण मानकों में समय के साथ तकनीकी बदलाव आते रहते हैं। ऐसे में इंजीनियरों, निर्माण विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों और संबंधित संस्थानों को नए प्रावधानों और तकनीकों के बारे में नियमित रूप से जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।
केवल नियम तैयार करना पर्याप्त नहीं है। नियमों को समझने और उन्हें व्यवहार में लागू करने के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता भी आवश्यक है।
इसी कारण NBCS-2026 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार चलाने की सिफारिश की गई।
अग्नि सुरक्षा पर विशेषज्ञों की चर्चा
कार्यशाला में फायर सेफ्टी यानी अग्नि सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। भवनों की योजना और निर्माण में अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रावधानों का पालन लोगों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ विषय है।
विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि भवनों की डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया में सुरक्षा उपायों को शुरुआत से शामिल किया जाना चाहिए। आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षित निकासी और संबंधित सुरक्षा व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी पर्याप्त ध्यान देना आवश्यक है।
अग्नि सुरक्षा को केवल एक तकनीकी आवश्यकता के बजाय समग्र भवन सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
निर्माण सुरक्षा में मानकों की भूमिका
निर्माण स्थल पर काम करने वाले लोगों और परियोजना से जुड़े अन्य व्यक्तियों की सुरक्षा भी कार्यशाला के प्रमुख विषयों में रही।
निर्माण कार्यों में अनेक तकनीकी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इसलिए सुरक्षित कार्य प्रणाली, मानकों का पालन, उचित निगरानी और प्रशिक्षित कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
NBCS-2026 के संदर्भ में निर्माण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मानकों और प्रक्रियाओं को व्यवहारिक रूप से लागू करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
गुणवत्ता आधारित खरीद प्रणाली
कार्यशाला में क्वालिटी प्रोक्योरमेंट सिस्टम यानी गुणवत्ता आधारित खरीद प्रणाली पर भी चर्चा की गई।
किसी निर्माण परियोजना की गुणवत्ता केवल इंजीनियरिंग डिजाइन या निर्माण स्थल पर काम की गुणवत्ता से तय नहीं होती। परियोजना के लिए खरीदी जाने वाली सामग्री, उपकरण और सेवाओं की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है।
इसलिए खरीद प्रक्रिया में केवल लागत को आधार न बनाकर गुणवत्ता, मानकों के अनुरूपता और दीर्घकालिक उपयोगिता जैसे पहलुओं को भी महत्व देने की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
नीति संबंधी सिफारिशें प्रशासन के सामने प्रस्तुत
कार्यक्रम के दौरान इंडियन बिल्डिंग्स कांग्रेस की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य इंजीनियर मनोरंजन मिश्रा ने सेमिनार से सामने आई एकीकृत नीति सिफारिशों को राज्य प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया।
इन सिफारिशों का उद्देश्य निर्माण क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पहलुओं को व्यापक नीति दृष्टिकोण के साथ जोड़ना था। इसमें भवन सुरक्षा, संरचनात्मक ऑडिट, प्रशिक्षण, टिकाऊ निर्माण, तकनीकी नवाचार और मानकों के अनुपालन जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई।
नीति सिफारिशों को प्रशासन के सामने रखने से कार्यशाला में हुई तकनीकी और विशेषज्ञ चर्चाओं को नीति स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
भविष्य के भारत की निर्माण व्यवस्था पर व्यापक दृष्टिकोण
“Building Future Bharat with NBCS-2026” विषय ने कार्यशाला को केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रखा। इसमें भविष्य के भारत के लिए ऐसी आधारभूत संरचना विकसित करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई, जो सुरक्षित, टिकाऊ, तकनीकी रूप से आधुनिक और आपदा के समय अधिक लचीली हो।
भारत में शहरों और कस्बों का विस्तार लगातार नई निर्माण आवश्यकताएं पैदा कर रहा है। ऐसे में आज बनाए जा रहे भवन और बुनियादी ढांचे आने वाले वर्षों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हों, इसके लिए योजना निर्माण के स्तर पर ही दीर्घकालिक सोच आवश्यक है।
100 वर्ष के दृष्टिकोण की चर्चा इसी व्यापक सोच को दर्शाती है।
तकनीक और निर्माण क्षेत्र का बढ़ता संबंध
कार्यशाला में उभरती तकनीकों को निर्माण क्षेत्र से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। IoT आधारित प्रणालियां इसका एक उदाहरण हैं।
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से डिजाइन, निर्माण, निरीक्षण और रखरखाव के क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो रहे हैं। लेकिन तकनीकी समाधान अपनाते समय उनकी विश्वसनीयता, सुरक्षा और व्यावहारिक उपयोगिता का भी ध्यान रखना आवश्यक है।
इसलिए भविष्य की निर्माण व्यवस्था में तकनीकी नवाचार और मानकीकरण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
ओडिशा के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश
भुवनेश्वर में आयोजित यह राष्ट्रीय कार्यशाला ओडिशा के लिए भी महत्वपूर्ण रही। राज्य में भविष्य के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सुरक्षा, टिकाऊपन और आपदा-रोधी क्षमता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
कार्यशाला में प्रस्तुत विचार राज्य में भवन निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के लिए नीति और कार्यान्वयन स्तर पर उपयोगी हो सकते हैं।
विशेषकर पुराने भवनों के संरचनात्मक ऑडिट, प्रशिक्षित ऑडिटरों की उपलब्धता, क्षमता निर्माण और हरित निर्माण से जुड़े विषयों को व्यापक रूप से सामने रखा गया।
विभिन्न विशेषज्ञों और संस्थानों की भागीदारी
राष्ट्रीय कार्यशाला में भवन निर्माण और मानकीकरण से जुड़े कई प्रमुख विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यक्रम में NBCS समिति के अध्यक्ष इंजीनियर वासुदेवन सुरेश, पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल (स्टैंडर्डाइजेशन) इंजीनियर संजय पंत, डायरेक्टर ऑफ सिविल इंजीनियरिंग एवं NBC यूनिट के प्रमुख इंजीनियर अरुण कुमार एस., तथा IBC ओडिशा स्टेट चैप्टर के चेयरमैन इंजीनियर विजय चंद्र त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों और संस्थानों के इंजीनियर एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।
विशेषज्ञों की भागीदारी ने कार्यशाला में तकनीकी दृष्टिकोण और विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों को साझा करने का अवसर प्रदान किया।
सुरक्षित भवनों से सुरक्षित समाज तक
भवन सुरक्षा का सीधा संबंध समाज की सुरक्षा से है। स्कूल, अस्पताल, कार्यालय, आवासीय भवन और सार्वजनिक उपयोग की संरचनाएं बड़ी संख्या में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी होती हैं।
इसलिए इनका निर्माण केवल इंजीनियरिंग परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कार्य के रूप में देखा जाना आवश्यक है।
कार्यशाला में इसी व्यापक दृष्टिकोण के तहत निर्माण मानकों, सुरक्षा उपायों और रखरखाव व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
टिकाऊ निर्माण भविष्य की जरूरत
आज निर्माण क्षेत्र के सामने विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने की चुनौती भी है। इसी कारण टिकाऊ निर्माण पद्धतियों को अपनाना भविष्य के बुनियादी ढांचे की महत्वपूर्ण आवश्यकता के रूप में सामने आया।
हरित तकनीक, वैकल्पिक निर्माण सामग्री और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल जैसे उपायों को व्यापक निर्माण रणनीति में शामिल करने की जरूरत पर चर्चा हुई।
यह दृष्टिकोण ऐसी संरचनाएं विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है जिनकी उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहे और जिनके रखरखाव में संसाधनों का अधिक विवेकपूर्ण उपयोग हो।
100 वर्ष की योजना का व्यापक अर्थ
मंत्री द्वारा 100 वर्ष की दृष्टि से बुनियादी ढांचे की योजना बनाने की बात का व्यापक अर्थ यह है कि आज के निर्माण को भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़कर देखा जाए।
किसी भी संरचना का जीवन केवल उसके निर्माण के दिन से निर्धारित नहीं होता। उसके डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव, उपयोग और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलन की क्षमता भी उसकी दीर्घकालिक उपयोगिता को प्रभावित करती है।
इसलिए भविष्य की परियोजनाओं में शुरुआती योजना से ही दीर्घकालिक रखरखाव और सुरक्षा को शामिल करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
नीति, तकनीक और विशेषज्ञता का समन्वय
कार्यशाला से यह संदेश सामने आया कि सुरक्षित और भविष्य के अनुकूल बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए केवल एक संस्था या एक विभाग का प्रयास पर्याप्त नहीं है।
सरकार, मानकीकरण संस्थाएं, इंजीनियरिंग विशेषज्ञ, निर्माण एजेंसियां, ऑडिटर और तकनीकी संस्थान—सभी के बीच समन्वय आवश्यक है।
नीति निर्माण के साथ तकनीकी विशेषज्ञता और जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन को जोड़ना ही किसी भी निर्माण मानक को प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
कार्यशाला का व्यापक निष्कर्ष
भुवनेश्वर में आयोजित “Building Future Bharat with NBCS-2026” राष्ट्रीय कार्यशाला ने भारत में भविष्य के निर्माण की दिशा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को एक मंच पर लाया।
कार्यशाला में दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा, संरचनात्मक सुरक्षा, आपदा-रोधी निर्माण, अग्नि सुरक्षा, हरित तकनीक, वैकल्पिक निर्माण सामग्री, IoT आधारित रखरखाव, गुणवत्ता आधारित खरीद और पुराने भवनों के संरचनात्मक ऑडिट जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
इसके साथ ही प्रशिक्षित और लाइसेंस प्राप्त ऑडिटरों की कमी को दूर करने, जागरूकता बढ़ाने तथा क्षमता निर्माण को मजबूत करने की आवश्यकता भी सामने रखी गई।
मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन का 100 वर्ष की दृष्टि से बुनियादी ढांचे की योजना बनाने का संदेश इस कार्यशाला का प्रमुख बिंदु रहा। वहीं इंजीनियर मनोरंजन मिश्रा द्वारा नीति संबंधी सिफारिशों को राज्य प्रशासन के सामने प्रस्तुत किया जाना तकनीकी चर्चाओं को नीति प्रक्रिया से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
कुल मिलाकर, कार्यशाला में विभिन्न हितधारकों ने इस विचार को रेखांकित किया कि भविष्य का बुनियादी ढांचा केवल आधुनिक दिखाई देने वाला नहीं, बल्कि सुरक्षित, टिकाऊ, गुणवत्तापूर्ण, आपदा-रोधी और लंबे समय तक उपयोगी होना चाहिए। NBCS-2026 के संदर्भ में हुई चर्चाओं ने भवन निर्माण क्षेत्र में मानकों, प्रशिक्षण, निरीक्षण और तकनीकी नवाचार के महत्व को भी सामने रखा।
भविष्य के भारत के निर्माण में ऐसी ही दीर्घकालिक सोच, तकनीकी क्षमता और मानकों के प्रभावी अनुपालन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। भुवनेश्वर की यह राष्ट्रीय कार्यशाला इसी व्यापक उद्देश्य के साथ विभिन्न विशेषज्ञों और संस्थानों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास रही।