पोहा कैसे बनता है? जानिए खेत से आपकी थाली तक का पूरा सफर

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एक्सपर्ट टेक

पोषण विशेषज्ञों और खाद्य प्रसंस्करण विशेषज्ञों के अनुसार, पोहा केवल एक स्वादिष्ट नाश्ता ही नहीं बल्कि संतुलित आहार का भी अच्छा हिस्सा है। धान को भिगोने, भाप देने और चपटा करने की प्रक्रिया के कारण पोहा जल्दी पक जाता है और आसानी से पच जाता है। यदि इसे मूंगफली, हरी सब्जियों, मटर, अंकुरित दाल, करी पत्ता और नींबू के साथ तैयार किया जाए, तो इसकी पोषण गुणवत्ता और भी बेहतर हो जाती है। हालांकि, स्वास्थ्य लाभ बनाए रखने के लिए पोहा में तेल और नमक का संतुलित उपयोग करना चाहिए। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में खाया गया पोहा ऊर्जा देने वाला, हल्का और पौष्टिक नाश्ता साबित हो सकता है।

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प्रस्तावना

पोहा भारत के सबसे लोकप्रिय और पौष्टिक नाश्तों में से एक है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात सहित कई राज्यों में इसे बड़े स्वाद से खाया जाता है। हल्का, जल्दी बनने वाला और आसानी से पचने वाला पोहा चपटे चावल (Flattened Rice) से तैयार किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खेतों में उगने वाला धान आखिर पोहा कैसे बन जाता है? आइए जानते हैं पोहा बनने की पूरी प्रक्रिया।

पोहा क्या होता है?

पोहा धान (चावल) से बनाया जाने वाला एक खाद्य पदार्थ है। इसमें चावल के दानों को विशेष प्रक्रिया से तैयार कर उन्हें चपटा किया जाता है। यही चपटे चावल आगे चलकर पोहा कहलाते हैं।

पोहा बनाने की पूरी प्रक्रिया

1. धान की कटाई

सबसे पहले खेतों में धान की फसल पकने के बाद उसकी कटाई की जाती है। कटाई के बाद धान को सुखाया जाता है ताकि उसमें मौजूद अतिरिक्त नमी निकल जाए।

2. धान की सफाई

कटे हुए धान को मशीनों की मदद से साफ किया जाता है। इसमें मिट्टी, पत्थर, भूसा और अन्य अशुद्धियों को अलग कर दिया जाता है।

3. धान को भिगोना

साफ किए गए धान को कई घंटों तक पानी में भिगोया जाता है। इससे धान के दाने नरम हो जाते हैं और आगे की प्रक्रिया आसान हो जाती है।

4. भाप या उबाल देना

भीगे हुए धान को भाप दी जाती है या हल्का उबाला जाता है। इस प्रक्रिया से चावल के दाने मजबूत हो जाते हैं और उनका पोषण भी काफी हद तक सुरक्षित रहता है।

5. सुखाना

भाप देने के बाद धान को धूप या आधुनिक ड्रायर में अच्छी तरह सुखाया जाता है ताकि उसमें नमी न रहे।

6. भूसी निकालना

सूखे धान को राइस मिल में भेजा जाता है, जहां उसकी बाहरी भूसी हटाकर चावल अलग किए जाते हैं।

7. चावल को चपटा करना

अब चावल को हल्का गर्म करके विशेष रोलर मशीनों से दबाया जाता है। दबाव के कारण चावल के दाने चपटे हो जाते हैं और यही पोहा बन जाता है।

8. ग्रेडिंग और पैकिंग

तैयार पोहा को मोटाई और आकार के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। इसके बाद उसे साफ करके पैक किया जाता है और बाजार में बिक्री के लिए भेज दिया जाता है।

पोहा के प्रकार

  • मोटा पोहा
  • पतला पोहा
  • लाल पोहा
  • ब्राउन पोहा
  • ऑर्गेनिक पोहा

हर प्रकार का उपयोग अलग-अलग व्यंजनों में किया जाता है।

पोहा खाने के फायदे

  • आसानी से पच जाता है।
  • ऊर्जा का अच्छा स्रोत है।
  • इसमें वसा (फैट) कम होती है।
  • आयरन और कार्बोहाइड्रेट की अच्छी मात्रा होती है।
  • सुबह के नाश्ते के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है।
  • लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है।

स्वादिष्ट पोहा कैसे बनाया जाता है?

तैयार पोहा को पहले हल्के पानी से धोया जाता है। इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म करके राई, जीरा, करी पत्ता, हरी मिर्च, प्याज और मूंगफली का तड़का लगाया जाता है। फिर हल्दी, नमक और पोहा डालकर कुछ मिनट तक मिलाया जाता है। अंत में हरा धनिया, नींबू का रस और चाहें तो सेव डालकर परोसा जाता है।

निष्कर्ष

पोहा केवल एक स्वादिष्ट नाश्ता नहीं, बल्कि धान से तैयार होने वाला एक विशेष खाद्य उत्पाद है। खेतों में उगने वाले धान से लेकर आपकी थाली तक पहुंचने के लिए इसे कई चरणों—सफाई, भिगोने, भाप देने, सुखाने, भूसी निकालने और चपटा करने—से गुजरना पड़ता है। यही वैज्ञानिक और पारंपरिक प्रक्रिया पोहा को स्वादिष्ट, पौष्टिक और लंबे समय तक सुरक्षित रखने योग्य बनाती है। इसलिए अगली बार जब आप पोहा खाएं, तो उसके पीछे की मेहनत और निर्माण प्रक्रिया को भी जरूर याद करें।

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