रायबरेली में पुश्तैनी मकान को लेकर विवाद, बच्चों और दिव्यांग भाइयों के साथ DM कार्यालय पहुंचा परिवार

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रविकांत पाण्डेय

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ रायबरेली

रायबरेली/सलोन। जिले के सलोन कोतवाली क्षेत्र से पारिवारिक संपत्ति को लेकर विवाद का एक मामला सामने आया है। तलरेजा भट्टा, रायबरेली रोड बाईपास क्षेत्र के निवासी रघु नंदन ने अपने चचेरे भाई पर पुश्तैनी मकान और उससे जुड़ी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। मामले में स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने का दावा करते हुए पीड़ित परिवार अपने बच्चों और दो दिव्यांग भाइयों के साथ जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचा और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।

परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी संपत्ति से जुड़े मामले का निष्पक्ष समाधान कराना है। पीड़ित ने प्रशासन के सामने अपनी शिकायत रखते हुए संबंधित जमीन और मकान के संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कराने तथा नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

कई दशकों पुराना बताया जा रहा है मकान

रघु नंदन के अनुसार, जिस संपत्ति को लेकर विवाद सामने आया है, वह उनके परिवार का पुराना पुश्तैनी मकान है। परिवार का दावा है कि यह मकान करीब चार से पांच दशक पुराना था। समय के साथ भवन काफी जर्जर हो गया और बाद में उसका एक हिस्सा अथवा पूरा ढांचा गिर गया। वर्तमान में परिवार वहां निवास नहीं कर रहा है।

पीड़ित के मुताबिक, मकान के जर्जर होने और परिवार के वहां नहीं रहने की स्थिति को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि इसी परिस्थिति का फायदा उठाकर उनके चचेरे भाई राधेश्याम उक्त संपत्ति पर अपना कब्जा स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

रघु नंदन का कहना है कि पारिवारिक बंटवारे के बाद राधेश्याम अपना हिस्सा लेकर अलग रह रहे हैं। ऐसे में जिस हिस्से को लेकर वर्तमान विवाद है, उस पर दोबारा अधिकार जताने का कोई आधार नहीं होना चाहिए। हालांकि संपत्ति के वास्तविक अधिकार और हिस्सेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद ही किया जा सकता है।

विरोध करने पर धमकाने का आरोप

पीड़ित परिवार ने अपने चचेरे भाई पर विरोध करने के दौरान धमकी देने के भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने अपनी संपत्ति पर किसी प्रकार का हस्तक्षेप किए जाने का विरोध किया तो कथित तौर पर उन्हें परेशान किया गया और दबाव बनाने की कोशिश की गई।

परिवार का आरोप है कि लगातार विवाद के कारण उनके सामने असुरक्षा की स्थिति पैदा हो गई है। इसी वजह से उन्होंने प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। मामले में दूसरे पक्ष का बयान सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

स्थानीय पुलिस पर भी उठाए सवाल

पीड़ित परिवार का दावा है कि उन्होंने अपनी शिकायत लेकर सलोन कोतवाली में संपर्क किया था। परिवार के मुताबिक, उन्होंने पुलिस से मामले की जांच और सुरक्षा की मांग की, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली।

पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए परिवार ने उच्च प्रशासनिक अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने का फैसला किया। इसी क्रम में परिवार जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचा।

पीड़ितों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को अपनी पैतृक संपत्ति पर अवैध कब्जे का खतरा महसूस होता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा शिकायत की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। परिवार ने प्रशासन से भी यही अपेक्षा जताई है।

बच्चों और दिव्यांग भाइयों के साथ पहुंचे कार्यालय

मामले में उस समय विशेष ध्यान गया जब रघु नंदन अपने परिवार के छोटे बच्चों और दो दिव्यांग भाइयों को साथ लेकर जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचे। परिवार ने अधिकारियों के सामने अपनी परिस्थितियां बताते हुए मदद की गुहार लगाई।

पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि लंबे समय से चल रहे पारिवारिक तनाव का उनके परिवार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। परिवार की ओर से दावा किया गया कि उनके दो दिव्यांग भाइयों की मानसिक स्थिति भी इस विवाद और कथित प्रताड़ना के कारण प्रभावित हुई है।

ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति की मानसिक या चिकित्सकीय स्थिति से संबंधित दावों की पुष्टि चिकित्सकीय दस्तावेजों और विशेषज्ञों की जांच से ही की जा सकती है। इसलिए प्रशासनिक जांच के साथ संबंधित दस्तावेजों की भी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

DM कार्यालय में रखी शिकायत

परिवार ने जिला अधिकारी कार्यालय में अपनी शिकायत प्रस्तुत करते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। शिकायत में संपत्ति से जुड़े विवाद, कथित कब्जे के प्रयास और धमकी से संबंधित आरोपों का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है।

पीड़ित परिवार के अनुसार, जिला अधिकारी ने उनकी बात सुनी और मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने की बात भी परिवार की ओर से कही गई है।

अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासनिक जांच में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के दावों की किस प्रकार जांच की जाती है।

राजस्व रिकॉर्ड और पुराने दस्तावेज हो सकते हैं अहम

पुश्तैनी संपत्ति से जुड़े विवाद में केवल मौखिक दावों के आधार पर स्थिति तय करना मुश्किल होता है। ऐसे मामलों में खतौनी, खसरा, बैनामा, पारिवारिक बंटवारे से संबंधित दस्तावेज, पुराने राजस्व रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाण महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

यदि संपत्ति का पहले पारिवारिक बंटवारा हुआ था, तो उस बंटवारे से संबंधित दस्तावेज या गवाह भी मामले की वास्तविक स्थिति समझने में मदद कर सकते हैं। प्रशासन द्वारा दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित भूमि और मकान पर किसका वैधानिक अधिकार है।

निष्पक्ष जांच की मांग

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से किसी एक पक्ष के दबाव में आए बिना निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिवार चाहता है कि जमीन और मकान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच हो तथा यदि किसी प्रकार का अवैध कब्जा या धमकी का मामला सामने आता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

वहीं, पूरे मामले में दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया और पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आना भी जरूरी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और संपत्ति के अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल यह मामला पारिवारिक संपत्ति के अधिकार और कथित कब्जे के विवाद से जुड़ा हुआ है। जिला अधिकारी कार्यालय में शिकायत पहुंचने के बाद परिवार को प्रशासनिक जांच से समाधान की उम्मीद है। अब संबंधित विभागों की जांच और दोनों पक्षों के दस्तावेजों के परीक्षण से आगे की तस्वीर सामने आने की संभावना है।

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