दही कैसे बनता है? जानिए घर पर स्वादिष्ट और गाढ़ा दही जमाने का आसान तरीका
दही भारतीय खानपान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत के लगभग हर क्षेत्र में दही का इस्तेमाल भोजन के साथ किया जाता है। कहीं इसे चावल के साथ खाया जाता है, तो कहीं रायता, कढ़ी, लस्सी, छाछ और अन्य स्वादिष्ट व्यंजन बनाने में इसका उपयोग होता है। गर्मियों में दही से बने खाद्य पदार्थ विशेष रूप से पसंद किए जाते हैं। दही न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि इसमें मौजूद पोषक तत्व भी इसे दैनिक आहार का एक उपयोगी हिस्सा बनाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि साधारण दूध कुछ घंटों में गाढ़े और स्वादिष्ट दही में कैसे बदल जाता है? इसके पीछे एक प्राकृतिक वैज्ञानिक प्रक्रिया काम करती है।

दही क्या होता है?
दही दूध से बनने वाला एक किण्वित खाद्य पदार्थ है। इसे तैयार करने के लिए दूध में थोड़ी मात्रा में पहले से जमा हुआ दही मिलाया जाता है। पुराने दही में मौजूद लाभकारी लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दूध की प्राकृतिक शर्करा यानी लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदलने लगते हैं। इस प्रक्रिया को किण्वन कहा जाता है।
जब दूध में लैक्टिक एसिड की मात्रा बढ़ती है, तो उसकी अम्लता बढ़ जाती है। इससे दूध में मौजूद प्रोटीन की संरचना बदलती है और दूध धीरे-धीरे गाढ़ा होकर जमने लगता है। इसी तरह सामान्य दूध दही में परिवर्तित हो जाता है। दही का स्वाद, गाढ़ापन और खट्टापन मुख्य रूप से दूध की गुणवत्ता, तापमान और जमने में लगने वाले समय पर निर्भर करता है।
घर पर दही बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
घर पर दही बनाने के लिए बहुत अधिक सामग्री की जरूरत नहीं होती। सामान्य रसोई में उपलब्ध दो चीजों से ही अच्छा दही तैयार किया जा सकता है।
- एक लीटर ताजा दूध
- एक से दो चम्मच ताजा जमा हुआ दही
दूध गाय या भैंस का हो सकता है। भैंस के दूध में सामान्यतः वसा और ठोस पदार्थों की मात्रा अधिक होने के कारण दही अधिक गाढ़ा बन सकता है। वहीं गाय के दूध से भी स्वादिष्ट दही तैयार किया जा सकता है। दूध की गुणवत्ता और उसमें मौजूद वसा की मात्रा के अनुसार दही की बनावट अलग-अलग हो सकती है।
दही बनाने का सही तरीका
पहला चरण: दूध को अच्छी तरह गर्म करें
सबसे पहले एक साफ बर्तन में एक लीटर दूध लें। दूध को गर्म करके उबाल आने दें। यदि आप पैकेट वाला पाश्चुरीकृत दूध इस्तेमाल कर रहे हैं, तब भी उसे पर्याप्त गर्म करने से दही जमाने के लिए अच्छी परिस्थितियां बन सकती हैं। दूध को गर्म करते समय बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि वह बर्तन के तले में न लगे।
दूध को गर्म करने से उसमें मौजूद अनचाहे सूक्ष्मजीवों की संख्या कम करने में मदद मिलती है। साथ ही, दूध के प्रोटीन में होने वाले बदलाव दही को बेहतर गाढ़ापन देने में सहायक हो सकते हैं।
दूसरा चरण: दूध को उचित तापमान तक ठंडा करें
दूध गर्म करने के बाद उसे कुछ समय के लिए ठंडा होने दें। दही जमाने के लिए दूध न तो बहुत गर्म होना चाहिए और न ही बहुत ठंडा। सामान्य रूप से लगभग 40 से 45 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयोगी रहता है, हालांकि सही तापमान इस्तेमाल किए जा रहे बैक्टीरिया पर भी निर्भर करता है।
यदि दूध बहुत गर्म होगा, तो दही जमाने वाले लाभकारी बैक्टीरिया प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, दूध अधिक ठंडा होने पर किण्वन की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है और दही जमने में ज्यादा समय लग सकता है।
तीसरा चरण: दूध में थोड़ा दही मिलाएं
अब एक साफ कटोरी में एक या दो चम्मच ताजा दही लें। इसमें थोड़ा गुनगुना दूध मिलाकर अच्छी तरह घोल लें। इसके बाद इस मिश्रण को पूरे दूध में डालकर हल्के हाथ से मिला दें।
ध्यान रखें कि दही जमाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पुराना दही ताजा और अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए। यदि उसमें असामान्य गंध, फफूंद या खराब होने के संकेत दिखाई दें, तो उसका उपयोग न करें।
चौथा चरण: दूध को ढककर गर्म स्थान पर रखें
दही मिलाने के बाद बर्तन को ढक्कन से ढक दें। अब इसे ऐसी जगह रखें जहां तापमान अपेक्षाकृत स्थिर और गर्म हो। सामान्य परिस्थितियों में दही को जमने में लगभग 6 से 10 घंटे लग सकते हैं। ठंडे मौसम में इससे अधिक समय भी लग सकता है।
दही जमते समय बर्तन को बार-बार हिलाने या खोलकर देखने से बचें। स्थिर तापमान और बिना छेड़छाड़ के रखा गया दूध सामान्यतः अच्छी तरह जमता है।
पांचवां चरण: दही जमने के बाद फ्रिज में रखें
जब दूध अच्छी तरह जम जाए और उसकी बनावट गाढ़ी हो जाए, तो बर्तन को फ्रिज में रख दें। ठंडा करने से किण्वन की गति धीमी हो जाती है और दही की बनावट बेहतर बनी रहती है।
यदि आप गाढ़ा दही पसंद करते हैं, तो दूध को गर्म करते समय कुछ देर तक हल्का उबाल सकते हैं, ताकि थोड़ा पानी वाष्पित हो जाए। इससे दही में ठोस पदार्थों का अनुपात बढ़ता है और वह अधिक गाढ़ा बन सकता है।
दही जमने के पीछे कौन-सा विज्ञान काम करता है?
दही बनने की प्रक्रिया में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये बैक्टीरिया दूध में मौजूद लैक्टोज का उपयोग करके लैक्टिक एसिड बनाते हैं। जैसे-जैसे एसिड बढ़ता है, दूध का पीएच कम होने लगता है।
दूध में मौजूद मुख्य प्रोटीनों में से एक कैसिइन होता है। दूध की अम्लता बढ़ने पर कैसिइन के कण एक-दूसरे के पास आकर जाल जैसी संरचना बनाते हैं। इस संरचना में पानी और दूध के अन्य घटक फंस जाते हैं। इसी कारण दूध तरल अवस्था से गाढ़े दही में बदल जाता है।
दही का जमना केवल दूध को ठंडा या गर्म करने का परिणाम नहीं है। यह सूक्ष्मजीवों, तापमान, अम्लता और दूध की संरचना के बीच होने वाली एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है।
दही को गाढ़ा और स्वादिष्ट बनाने के उपाय
घर पर अच्छा दही जमाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
सबसे पहले, अच्छी गुणवत्ता वाले दूध का चुनाव करें। दूध को पर्याप्त गर्म करने और फिर सही तापमान तक ठंडा करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। दही मिलाने की मात्रा भी संतुलित रखें। बहुत कम मात्रा में जामन डालने से प्रक्रिया धीमी हो सकती है, जबकि जरूरत से अधिक खट्टा जामन स्वाद और बनावट को प्रभावित कर सकता है।
दही जमाने के लिए साफ बर्तन का इस्तेमाल करें। बर्तन में साबुन या अन्य सफाई पदार्थों के अवशेष नहीं रहने चाहिए। सर्दियों में बर्तन को अपेक्षाकृत गर्म स्थान पर रखना उपयोगी होता है, जबकि गर्मियों में अत्यधिक गर्म जगह पर रखने से दही जल्दी खट्टा हो सकता है।
दही जमने के बाद उसे समय पर फ्रिज में रखना भी जरूरी है। इससे उसका स्वाद और गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।
दही खाने के क्या फायदे हैं?
दही में प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्व हो सकते हैं। इनकी मात्रा दूध के प्रकार और दही बनाने की विधि पर निर्भर करती है। कैल्शियम और प्रोटीन हड्डियों, मांसपेशियों और शरीर के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं।
दही में मौजूद जीवित बैक्टीरिया की कुछ किस्में आंतों के सूक्ष्मजीव समुदाय को सहारा दे सकती हैं। हालांकि, हर दही में एक जैसे बैक्टीरिया नहीं होते और सभी दही उत्पादों के प्रभाव समान नहीं होते।
कुछ लोगों को दूध की तुलना में दही पचाना आसान लग सकता है, क्योंकि किण्वन के दौरान लैक्टोज की कुछ मात्रा टूट जाती है। फिर भी लैक्टोज असहिष्णुता वाले लोगों की सहनशीलता अलग-अलग हो सकती है।
दही को संतुलित भोजन के साथ खाना उपयोगी है। इसे फल, चावल, रोटी या अन्य खाद्य पदार्थों के साथ खाया जा सकता है। हालांकि, दही किसी बीमारी का अपने आप में इलाज नहीं है और संतुलित आहार का विकल्प भी नहीं है।
दही बनाते समय होने वाली सामान्य गलतियां
कई बार घर पर दही ठीक से नहीं जमता। इसका सबसे सामान्य कारण दूध का बहुत गर्म या बहुत ठंडा होना है। गलत तापमान के कारण जामन में मौजूद बैक्टीरिया ठीक से काम नहीं कर पाते।
दूसरी गलती खराब या बहुत पुराना जामन इस्तेमाल करना है। इससे दही का स्वाद बिगड़ सकता है या वह ठीक से नहीं जम सकता। इसी प्रकार, बहुत ठंडे वातावरण में दूध रखने पर किण्वन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
यदि दही में फफूंद, असामान्य रंग, खराब गंध या अन्य संदिग्ध बदलाव दिखाई दें, तो उसे खाना सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए। केवल अधिक देर तक रखने से खराब दही ठीक नहीं हो जाता।
बाजार में मिलने वाला दही कैसे बनाया जाता है?
बड़े स्तर पर दही बनाने वाली डेयरी कंपनियां भी मूल रूप से इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन वहां तापमान और गुणवत्ता पर अधिक नियंत्रित तरीके से निगरानी रखी जाती है। दूध को निर्धारित तापमान पर गर्म किया जाता है, फिर उपयुक्त तापमान तक ठंडा करके उसमें चुने हुए बैक्टीरिया का कल्चर मिलाया जाता है।
इसके बाद दूध को नियंत्रित परिस्थितियों में जमाया जाता है। आवश्यक बनावट प्राप्त होने पर किण्वन को धीमा करने के लिए उत्पाद को ठंडा किया जाता है। कुछ उत्पादों में दूध के ठोस पदार्थों की मात्रा बढ़ाने या मनचाही बनावट प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त प्रसंस्करण भी किया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों की विधियां और उत्पादों की संरचना अलग हो सकती हैं।
निष्कर्ष
दही बनाना एक सरल प्रक्रिया है, जिसमें दूध, थोड़ा-सा जामन, उचित तापमान और पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। दूध को गर्म करके सही तापमान तक ठंडा किया जाता है, फिर उसमें पुराना दही मिलाकर कुछ घंटों के लिए रखा जाता है। इस दौरान लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दूध को गाढ़े और स्वादिष्ट दही में बदल देते हैं।
सही विधि अपनाकर घर पर स्वादिष्ट दही आसानी से बनाया जा सकता है। दूध की गुणवत्ता, साफ-सफाई, तापमान और समय का ध्यान रखने से दही की बनावट तथा स्वाद बेहतर होते हैं। इस तरह रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाला दही विज्ञान और पारंपरिक खाद्य ज्ञान का एक अच्छा उदाहरण है।