डिजिटल ठगी पर कड़ा प्रहार: अयोध्या पुलिस ने पीड़ितों को लौटाए ₹5.66 लाख

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आज के डिजिटल युग में जहां तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगना शुरू कर दिया है। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें अज्ञात व्यक्तियों ने शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के नाम पर अधिक मुनाफ़े का लालच देकर और स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाते हुए दो पीड़ितों से कुल ₹5,66,620 की ठगी कर ली।

सांकेतिक तस्वीर

साइबर अपराधियों ने बड़ी चालाकी से पीड़ितों को विश्वास में लिया। पहले उन्हें निवेश पर भारी मुनाफ़े का झांसा दिया गया और बाद में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डराया गया कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस डर और लालच के बीच फंसकर पीड़ितों ने अपनी मेहनत की कमाई अपराधियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दी।

मामले की जानकारी मिलते ही अयोध्या पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए साइबर सेल की मदद से जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रेल के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ठगी गई पूरी राशि ₹5,66,620 को सफलतापूर्वक वापस करा दिया। यह कार्रवाई न केवल पीड़ितों के लिए राहतभरी रही, बल्कि साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस की सक्रियता का भी प्रमाण है।

पुलिस ने इस अवसर पर आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर से सतर्क रहें, जिसमें अत्यधिक मुनाफ़े का लालच दिया जाए या डराकर पैसे मांगे जाएं। कोई भी सरकारी अधिकारी फोन पर इस तरह पैसे की मांग नहीं करता है।

यदि किसी के खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसा निकलता है, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। समय रहते की गई शिकायत से पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

साइबर सुरक्षा आज हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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डिजिटल ठगी पर कड़ा प्रहार: अयोध्या पुलिस ने पीड़ितों को लौटाए ₹5.66 लाख

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अप्रैल 21, 2026

आज के डिजिटल युग में जहां तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगना शुरू कर दिया है। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें अज्ञात व्यक्तियों ने शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के नाम पर अधिक मुनाफ़े का लालच देकर और स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाते हुए दो पीड़ितों से कुल ₹5,66,620 की ठगी कर ली।

सांकेतिक तस्वीर

साइबर अपराधियों ने बड़ी चालाकी से पीड़ितों को विश्वास में लिया। पहले उन्हें निवेश पर भारी मुनाफ़े का झांसा दिया गया और बाद में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डराया गया कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस डर और लालच के बीच फंसकर पीड़ितों ने अपनी मेहनत की कमाई अपराधियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दी।

मामले की जानकारी मिलते ही अयोध्या पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए साइबर सेल की मदद से जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रेल के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ठगी गई पूरी राशि ₹5,66,620 को सफलतापूर्वक वापस करा दिया। यह कार्रवाई न केवल पीड़ितों के लिए राहतभरी रही, बल्कि साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस की सक्रियता का भी प्रमाण है।

पुलिस ने इस अवसर पर आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर से सतर्क रहें, जिसमें अत्यधिक मुनाफ़े का लालच दिया जाए या डराकर पैसे मांगे जाएं। कोई भी सरकारी अधिकारी फोन पर इस तरह पैसे की मांग नहीं करता है।

यदि किसी के खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसा निकलता है, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। समय रहते की गई शिकायत से पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

साइबर सुरक्षा आज हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।