माल्टा में पत्रकार हत्या मामले में बड़ा फैसला, यॉर्गेन फेनेच बरी होने के बाद फिर उठे न्याय और जवाबदेही पर सवाल

0

वैलेटा, माल्टा। माल्टा में खोजी पत्रकार और भ्रष्टाचार-विरोधी आवाज डैफ्ने कारुआना गैलिजिया की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में अदालत के फैसले ने देश की राजनीति, न्याय व्यवस्था और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कारोबारी यॉर्गेन फेनेच को 2017 में हुई पत्रकार की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोपों से 2 सितंबर 2026 को बरी कर दिया गया। जूरी ने दोनों आरोपों पर 8-1 के बहुमत से उन्हें दोषी नहीं माना।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब डैफ्ने कारुआना गैलिजिया की हत्या को लगभग नौ वर्ष होने वाले हैं। उनकी हत्या ने न केवल माल्टा को झकझोर दिया था, बल्कि पूरे यूरोप में पत्रकारों की सुरक्षा, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और कानून के शासन से जुड़े सवालों को भी प्रमुखता से सामने ला दिया था। फेनेच के बरी होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस हत्या के पीछे आदेश देने वाले व्यक्ति या लोगों की पहचान और कानूनी जवाबदेही कब तय होगी।

कौन थीं डैफ्ने कारुआना गैलिजिया?

डैफ्ने कारुआना गैलिजिया माल्टा की प्रमुख खोजी पत्रकारों में शामिल थीं। वह राजनीतिक भ्रष्टाचार, कारोबारी हितों और सत्ता के प्रभाव से जुड़े मामलों पर लगातार रिपोर्टिंग करती थीं। उनके लेखों और ब्लॉग ने माल्टा की राजनीति में कई प्रभावशाली लोगों को असहज किया था।

उनकी पत्रकारिता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कथित वित्तीय अनियमितताओं और सत्ता तथा कारोबार के बीच संबंधों की पड़ताल था। उन्होंने कई ऐसे मुद्दे उठाए जिनका असर माल्टा की तत्कालीन राजनीतिक व्यवस्था पर पड़ा।

अक्टूबर 2017 में उनकी हत्या ने पूरे देश को हिला दिया। उनकी हत्या के बाद माल्टा में बड़े पैमाने पर राजनीतिक दबाव और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया और माल्टा की कानून-व्यवस्था तथा पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए।

यॉर्गेन फेनेच पर क्या आरोप थे?

यॉर्गेन फेनेच माल्टा के एक प्रमुख कारोबारी हैं। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि उन्होंने डैफ्ने कारुआना गैलिजिया की हत्या की योजना को आगे बढ़ाने और उसके लिए धन उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई। उन पर हत्या में मिलीभगत और हत्या करने के उद्देश्य से आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे। दोष सिद्ध होने की स्थिति में उन्हें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती थी।

अभियोजन पक्ष ने अपने मामले में मेल्विन थ्यूमा की गवाही को महत्वपूर्ण आधार बनाया। थ्यूमा पर आरोप था कि उन्होंने हत्या की योजना में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। अभियोजन के अनुसार फेनेच ने हत्या के लिए धन उपलब्ध कराया और थ्यूमा के माध्यम से हत्यारों तक भुगतान पहुंचाया गया।

हालांकि बचाव पक्ष ने इन दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामले की प्रमुख गवाही में विरोधाभास थे और जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिले।

जूरी ने क्यों किया बरी?

लगभग दो महीने चली सुनवाई में जूरी ने बड़ी मात्रा में गवाही और साक्ष्यों पर विचार किया। रिपोर्टों के अनुसार सुनवाई के दौरान 100 से अधिक गवाहों से बयान लिए गए और जूरी ने लगभग आठ घंटे विचार-विमर्श करने के बाद फैसला सुनाया।

जूरी का काम यह तय करना था कि अभियोजन पक्ष फेनेच के खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित कर पाया या नहीं। अंततः 8-1 के फैसले में जूरी ने दोनों आरोपों में उन्हें दोषी नहीं माना। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने हत्या की घटना पर कोई संदेह जताया, बल्कि यह कि फेनेच के खिलाफ लगाए गए विशिष्ट आरोपों को साबित करने के लिए उपलब्ध साक्ष्य जूरी को पर्याप्त नहीं लगे।

फेनेच ने अपनी ओर से यह स्वीकार किया था कि उन्हें हत्या की योजना के बारे में जानकारी थी और उन्होंने थ्यूमा को धन दिया था। हालांकि उनका कहना था कि उन्होंने हत्या का आदेश नहीं दिया और उनका उद्देश्य हत्या करवाना नहीं था। बचाव पक्ष ने इसी अंतर को अपने तर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।

हत्या को लेकर पहले भी हुई हैं सजाएं

डैफ्ने की हत्या के मामले में कई लोगों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। हत्या को अंजाम देने और बम की व्यवस्था करने से जुड़े लोगों को अलग-अलग अवधि की जेल की सजाएं मिली हैं। लेकिन फेनेच के बरी होने के बाद एक बड़ा कानूनी सवाल अब भी कायम है—हत्या का आदेश किसने दिया और उसके लिए भुगतान किसने किया?

यही वह प्रश्न है जो डैफ्ने के परिवार, पत्रकार संगठनों और माल्टा के राजनीतिक वर्ग के बीच सबसे अधिक चर्चा में है। पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर काम करने वाली संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स ने भी कहा है कि हत्या के पीछे जिम्मेदार लोगों की पूरी जवाबदेही अभी स्थापित नहीं हुई है।

मामले में राजनीतिक संबंधों ने बढ़ाई जटिलता

यह मामला केवल एक हत्या की जांच तक सीमित नहीं रहा। सुनवाई के दौरान कारोबार, राजनीति और सत्ता के प्रभाव से जुड़े कई आरोपों और दावों पर चर्चा हुई। पूर्व प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट के करीबी सहयोगियों के नाम भी इस व्यापक मामले में सामने आए। हालांकि विभिन्न व्यक्तियों पर लगे आरोपों और उनकी कानूनी स्थिति अलग-अलग रही है।

मामले की जांच के दौरान सरकारी और पुलिस तंत्र से कथित सूचनाओं के लीक होने तथा जांच प्रक्रिया में कमियों को लेकर भी सवाल उठे। कुछ महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों के उपलब्ध न होने की बात भी सामने आई। इससे बचाव पक्ष को अभियोजन की जांच पर सवाल उठाने का आधार मिला।

फैसले के बाद माल्टा में नाराजगी

फेनेच के बरी होने के बाद माल्टा में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया तेज हो गई। डैफ्ने के परिवार ने फैसले पर निराशा व्यक्त की और इसे न्याय की प्रक्रिया के लिए गंभीर झटका बताया। पत्रकार संगठनों ने भी कहा कि हत्या के पीछे मौजूद सभी जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना जरूरी है।

सरकार ने फैसले के बाद लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। दूसरी ओर विपक्ष और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के समर्थकों ने मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं।

यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रोबर्टा मेत्सोला ने भी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डैफ्ने के मामले में न्याय की लड़ाई जारी रहनी चाहिए। इससे स्पष्ट है कि यह मामला केवल माल्टा की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप में कानून के शासन और पत्रकारों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

अब आगे क्या होगा?

फेनेच के बरी होने के बाद जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई का सवाल फिर महत्वपूर्ण हो गया है। माल्टा के अटॉर्नी जनरल की ओर से फैसले के खिलाफ अपील की संभावना पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही, डैफ्ने की हत्या से जुड़े व्यापक मामलों और अन्य आरोपों की जांच पर भी नजर बनी हुई है।

मामले की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हत्या को अंजाम देने वालों और कथित तौर पर इसके पीछे मौजूद व्यक्ति या नेटवर्क के बीच कानूनी रूप से मजबूत कड़ी स्थापित की जाए। फेनेच को बरी किए जाने के बाद यह काम और कठिन हो गया है।

पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिए बड़ा संदेश

डैफ्ने कारुआना गैलिजिया की कहानी केवल माल्टा की एक पत्रकार की हत्या की कहानी नहीं है। यह इस सवाल से भी जुड़ी है कि लोकतांत्रिक समाज में पत्रकार सत्ता और भ्रष्टाचार पर कितनी स्वतंत्रता से सवाल उठा सकते हैं और ऐसी पत्रकारिता करने वालों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाती है।

उनकी हत्या के बाद माल्टा में स्वतंत्र पत्रकारिता, न्याय व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर लंबे समय तक बहस चली। 2021 की एक स्वतंत्र जांच ने भी माल्टा के राज्य तंत्र को ऐसा वातावरण पैदा करने के लिए जिम्मेदार ठहराया था जिसमें हत्या के लिए दण्डहीनता की संस्कृति ने भूमिका निभाई।

फेनेच का बरी होना इस बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। अदालत का फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत अंतिम तथ्यात्मक स्थिति हो सकता है, लेकिन इससे डैफ्ने की हत्या के पीछे मौजूद व्यापक सवाल समाप्त नहीं हुए हैं।

निष्कर्ष

यॉर्गेन फेनेच का बरी होना डैफ्ने कारुआना गैलिजिया हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ है। 8-1 के फैसले ने अभियोजन पक्ष के उस दावे को स्वीकार नहीं किया कि फेनेच हत्या की साजिश में दोषी भूमिका निभाने के लिए पर्याप्त रूप से जिम्मेदार साबित हुए।

लेकिन इस फैसले के साथ ही माल्टा के सामने एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—अगर हत्या को अंजाम देने वाले दोषी ठहराए जा चुके हैं, तो उस साजिश के पीछे अंतिम जिम्मेदारी किसकी थी?

यही सवाल डैफ्ने के परिवार, पत्रकार संगठनों और माल्टा के नागरिक समाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बना हुआ है। आने वाले दिनों में संभावित अपील और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं यह तय कर सकती हैं कि यह मामला आगे किस दिशा में जाता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि डैफ्ने कारुआना गैलिजिया की हत्या और उससे जुड़ी जवाबदेही की बहस माल्टा की राजनीति और यूरोपीय पत्रकारिता जगत में लंबे समय तक जारी रहने वाली है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें