यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संघर्षविराम की घोषणा का किया स्वागत: कूटनीति को प्राथमिकता देने की अपील

24 जून 2025, ब्रसेल्स — विश्व राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित संघर्षविराम की घोषणा का जोरदार स्वागत किया है। उन्होंने इसे “शांति और स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम” करार दिया और सभी पक्षों से बातचीत और कूटनीति के रास्ते को प्राथमिकता देने की अपील की।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “यह संघर्षविराम एक जरूरी विराम है जो हमें नए सिरे से संवाद शुरू करने का अवसर देता है। अब समय आ गया है कि हम हथियारों की भाषा छोड़कर वार्ता की भाषा अपनाएं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यूरोपीय संघ इस प्रक्रिया में एक रचनात्मक और सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है।
इस संघर्षविराम की घोषणा उस समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर था और वैश्विक शक्तियों के बीच सैन्य टकराव की आशंका तेजी से बढ़ रही थी। अमेरिकी नेतृत्व में घोषित इस पहल को वैश्विक स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिली हैं, लेकिन यूरोपीय संघ की तरफ से यह पहला बड़ा समर्थन है, जो शांति स्थापना की ओर बढ़ने के संकेत देता है।
उर्सुला ने यह भी स्पष्ट किया कि संघर्षविराम केवल एक अस्थायी समाधान है — इसे स्थायी शांति में बदलने के लिए निरंतर और पारदर्शी संवाद की आवश्यकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, नाटो और अन्य वैश्विक संगठनों से भी अपील की कि वे इस पहल को मजबूत बनाने में सहयोग दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय संघ का यह रुख न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देगा बल्कि अमेरिका और यूरोप के बीच कूटनीतिक संतुलन को भी बेहतर बनाएगा। ब्रसेल्स स्थित एक वरिष्ठ राजनयिक ने कहा, “यह समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय के एकजुट होने का है, ताकि संघर्ष की जगह सहयोग को बढ़ावा मिल सके।”
यूरोपीय आयोग की यह प्रतिक्रिया न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उस वैश्विक जिम्मेदारी को भी रेखांकित करती है जो लोकतांत्रिक संस्थाओं और नेताओं को शांति के लिए निभानी चाहिए।
निष्कर्षतः, उर्सुला वॉन डेर लेयेन की यह पहल दर्शाती है कि यूरोप शांति को एक प्राथमिक मूल्य मानता है और संघर्षों का समाधान केवल संवाद और समझौते के ज़रिए संभव है। अब यह देखने की बात होगी कि अन्य देश इस पहल पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह संघर्षविराम वैश्विक स्थिरता की ओर ले जाता है या केवल एक क्षणिक ठहराव बनकर रह जाता है।
