भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में नया दौर: उच्चस्तरीय वार्ताओं से बढ़ती साझेदारी

नई दिल्ली, 24 जून 2025 — भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय संबंध इन दिनों नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। मंगलवार को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर फ्रांसेस ऐडमसन के बीच नई दिल्ली में हुई व्यापक वार्ता इस मजबूत होते सहयोग की एक और मिसाल बनी।
इस बैठक में शिक्षा, अंतरिक्ष तकनीक, जल संरक्षण, कृषि नवाचार, ऊर्जा सहयोग और कांसुलर मामलों जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों पर बातचीत हुई। डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा करते हुए लिखा, “दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर फ्रांसेस ऐडमसन से मुलाकात करके प्रसन्नता हुई। शिक्षा, अंतरिक्ष, जल, कृषि, ऊर्जा और कांसुलर मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।”
हालिया प्रमुख मुलाकातें
इस बैठक से कुछ दिन पहले 17 जून को कनाडा के कॅननास्किस में हुए जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को पीएम मोदी ने “दोस्ती का क्षण” बताया और पोस्ट किया, “जी7 शिखर सम्मेलन में मेरे मित्र पीएम अल्बनीज़ से मिलकर अच्छा लगा!”
वहीं, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स से नई दिल्ली में मुलाकात की। यह बैठक दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अहम रही। भारत की क्षेत्रीय नीतियों पर ऑस्ट्रेलिया के खुले समर्थन की रक्षा मंत्री सिंह ने सराहना की।
बहु-आयामी सहयोग का विस्तार
भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते अब केवल कूटनीति और रक्षा तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा, विज्ञान, कृषि तकनीक, जल संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी तेजी से बढ़ रही है। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए साझा दृष्टिकोण रखते हैं।
इस निरंतर सहयोग से यह स्पष्ट होता है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया एक लोकतांत्रिक, पारदर्शी और सम्मान आधारित साझेदारी के जरिए वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों का संयुक्त समाधान ढूंढने को प्रतिबद्ध हैं।
निष्कर्ष
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में जो गर्मजोशी और सामरिक गहराई आज देखने को मिल रही है, वह आने वाले वर्षों में न केवल दोनों देशों को, बल्कि सम्पूर्ण एशिया-प्रशांत क्षेत्र को लाभ पहुंचाएगी। शिक्षा से लेकर सुरक्षा तक, यह साझेदारी 21वीं सदी के वैश्विक संबंधों का एक प्रेरक मॉडल बन रही है।
