फ़रवरी 12, 2026

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की स्पेन, पुर्तगाल और ब्राज़ील यात्रा: वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक भागीदारी को मिलेगा नया आयाम

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Anoop singh

नई दिल्ली, 30 जून 2025 — भारत की केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज से स्पेन, पुर्तगाल और ब्राज़ील की आधिकारिक यात्रा की शुरुआत की। यह यात्रा 5 जुलाई 2025 तक चलेगी और इसमें भारत की वैश्विक आर्थिक साझेदारी को मज़बूत करने के उद्देश्य से कई अहम कार्यक्रम और बैठकों का आयोजन किया जाएगा।

इस यात्रा के दौरान सीतारमण संयुक्त राष्ट्र के विकास हेतु वित्तपोषण पर आयोजित चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (FfD4) को संबोधित करेंगी। यह सम्मेलन वैश्विक वित्तीय सुधार, विकासशील देशों की आर्थिक स्थिति और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की पूर्ति के लिए आवश्यक वित्तीय ढांचे पर केंद्रित है।

सम्मेलन का महत्व

एफएफडी4 सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र द्वारा किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर वित्तीय संसाधनों की निष्पक्ष और टिकाऊ व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसमें दुनिया भर के वित्त मंत्रियों, नीति निर्धारकों, अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों की भागीदारी देखी जा रही है। सीतारमण के संबोधन से भारत की विकासशील देशों के लिए वित्तीय समर्थन, डिजिटल समावेशन और हरित अर्थव्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता को नई दिशा मिलेगी।

रणनीतिक द्विपक्षीय संवाद

सीतारमण की यह यात्रा केवल सम्मेलन तक सीमित नहीं है। यात्रा के दौरान वह स्पेन, पुर्तगाल और ब्राज़ील के वरिष्ठ नेताओं एवं वित्तीय अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगी। इन मुलाकातों में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग, निवेश बढ़ाने, व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ करने और नई साझेदारियों की संभावनाओं पर चर्चा होगी।

भारत की वैश्विक भूमिका

इस यात्रा के माध्यम से भारत एक बार फिर यह दर्शा रहा है कि वह न केवल एक तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है, बल्कि वैश्विक विकास एजेंडे में भी एक जिम्मेदार और सक्रिय साझेदार की भूमिका निभा रहा है। वित्त मंत्री का यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से, बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

निर्मला सीतारमण की यह यात्रा भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की स्थिति को सुदृढ़ करने, वैश्विक वित्तीय संरचना में सुधार की वकालत करने और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में ठोस योगदान देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।


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