केन्या की युवा नवप्रवर्तक रोज़: केले के तनों से बना रही हैं हरित भविष्य की राह

पर्यावरण संरक्षण और नवाचार के क्षेत्र में एक नई प्रेरणा बनकर उभरी हैं केन्या की 26 वर्षीय रोज़, जिन्होंने बेकार समझे जाने वाले केले के तनों से जैविक पैकेजिंग बनाकर वैश्विक स्तर पर एक अनोखा उदाहरण पेश किया है। यह पहल न केवल उनकी जीविका का साधन बनी है, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। UNICEF द्वारा समर्थित इस प्रेरक यात्रा को #YouthSkillsDay पर विशेष रूप से उजागर किया गया है।
रोज़ को यह प्रेरणा और कौशल BeGreen Africa कार्यक्रम से प्राप्त हुआ, जो युवाओं को टिकाऊ आजीविका और हरित उद्यमशीलता की ओर मार्गदर्शन करता है। इस कार्यक्रम की मदद से उन्होंने न केवल एक व्यवसायिक दृष्टिकोण विकसित किया, बल्कि एक ऐसा समाधान तैयार किया जो प्लास्टिक प्रदूषण जैसी वैश्विक समस्या का पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बन सकता है।
उनकी सोच का केंद्र बिंदु है – “जहां सबने बेकार देखा, वहां उन्होंने अवसर देखा।” केला उत्पादन के दौरान बचने वाले तनों का उपयोग कर रोज़ बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग तैयार कर रही हैं, जो पारंपरिक प्लास्टिक उत्पादों का व्यावहारिक और टिकाऊ विकल्प बन सकता है। यह कदम सर्कुलर इकोनॉमी की उत्कृष्ट मिसाल है, जहां कचरे को दोबारा उपयोग में लाकर संसाधनों की मांग को कम किया जाता है और पर्यावरण पर बोझ घटाया जाता है।
रोज़ की यह पहल यह दिखाती है कि यदि युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और समर्थन मिले, तो वे स्थायी विकास के सशक्त वाहक बन सकते हैं। उनकी सोच सिर्फ एक स्टार्टअप तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक हरित वैश्विक भविष्य की आधारशिला रख रही हैं।
उनका सपना – “पैकेजिंग की दुनिया में क्रांति लाना” – आज एक प्रेरक हकीकत बन चुका है, जो यह साबित करता है कि स्थानीय संसाधनों में छिपे नवाचार से वैश्विक समाधान संभव हैं।
