संसद का मानसून सत्र: पहलगाम हमले पर चर्चा की मांग को लेकर लोकसभा दोपहर 2 बजे तक स्थगित
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2025 (सोमवार): संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद केंद्र सरकार की “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत कार्रवाई पर चर्चा की मांग करते हुए जोरदार नारेबाज़ी की। इसके चलते सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और फिर दोबारा दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
सुबह 11 बजे जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस गंभीर घटना पर बयान की मांग की। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि पहलगाम हमले के बाद क्या कार्रवाई की गई और “ऑपरेशन सिंदूर” का दायरा क्या है।
स्पीकर ओम बिड़ला की अपील और नाराजगी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने हंगामे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यह प्रश्नकाल का समय है और सरकार हर विषय पर चर्चा को तैयार है। नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार सदन को चलना चाहिए।” उन्होंने सभी सदस्यों से शांतिपूर्वक बहस और चर्चा की अपील की, लेकिन जब विपक्षी दल नारेबाज़ी से पीछे नहीं हटे, तो उन्होंने सदन को 2 बजे तक स्थगित कर दिया।
सरकार की प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में कहा, “सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है।” वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी कि “बिजनेस एडवाइजरी कमेटी” की बैठक दोपहर 2:30 बजे बुलाई गई है, जिसमें आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।
उन्होंने विपक्षी सांसदों की हरकतों पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि पहले ही दिन इस तरह का विरोध लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। “अगर चर्चा चाहिए, तो चर्चा के लिए मंच सदन है, न कि हंगामा करने का स्थान,” उन्होंने कहा।
विपक्ष की नाराज़गी
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि सरकार के मंत्री तो बोल सकते हैं लेकिन विपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा। “अगर सरकार पक्ष के लोग बोल सकते हैं तो विपक्ष को भी बोलने का अधिकार है,” उन्होंने कहा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी कहा, “यदि सरकार चर्चा को लेकर गंभीर है, तो उन्हें विपक्ष के नेताओं को बोलने देना चाहिए।”
निष्कर्ष
संसद का मानसून सत्र एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस की मांग के साथ आरंभ हुआ, लेकिन पहले दिन ही गतिरोध का शिकार हो गया। विपक्ष सरकार से स्पष्ट जवाब चाहता है, जबकि सरकार नियमों के तहत चर्चा को प्राथमिकता देने की बात कर रही है। अब देखना होगा कि आगे के दिनों में यह सत्र सार्थक बहस की दिशा में आगे बढ़ता है या राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बनता है।
