फ़रवरी 14, 2026

मेलबर्न में भारतीय युवक पर माचेती से हमला: प्रवासी समुदाय में दहशत और आक्रोश

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दिनांक: 27 जुलाई 2025

मेलबर्न के शांत समझे जाने वाले उपनगर एलटोना मीडोज में एक हृदय विदारक घटना ने प्रवासी भारतीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। भारतीय मूल के 33 वर्षीय सौरभ आनंद पर पांच किशोरों के एक गिरोह ने माचेती जैसे घातक हथियार से जानलेवा हमला किया। यह हमला 19 जुलाई की शाम लगभग साढ़े सात बजे हुआ, जब सौरभ स्थानीय फार्मेसी से दवा लेकर अपने घर लौट रहे थे।


अचानक हमला और बचने की कोशिश

सौरभ ने बताया कि वह फोन पर बातचीत कर रहे थे, तभी उन्होंने पास में हलचल महसूस की। कुछ ही पलों में एक किशोर ने उनकी जेब में हाथ डालने की कोशिश की, और दूसरा उनके सिर पर वार करने लगा। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाते, तीसरे हमलावर ने माचेती निकाली और सीधे उनके गले की ओर बढ़ा दी। सौरभ ने बताया, “मैंने जैसे-तैसे अपने हाथ और चेहरा बचाने की कोशिश की, लेकिन हथियार ने मेरी कलाई और हाथ को गहरा नुकसान पहुंचाया।”


गंभीर रूप से घायल, पर जीवित

इस हमले में सौरभ को रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर, कंधे और पीठ में गहरे घाव, हाथ की हड्डियों में टूट-फूट और सिर पर गंभीर चोटें आईं। उन्होंने कहा, “ऐसा लग रहा था जैसे मेरी हड्डियां चकनाचूर हो रही हैं, मैं किसी तरह खुद को ज़िंदा रखने की जद्दोजहद कर रहा था।” दर्द और खून से लथपथ हालत में भी वे लड़खड़ाते हुए नजदीकी शॉपिंग सेंटर पहुंचे और मदद के लिए चिल्लाए।


स्थानीय मदद और पुलिस की प्रतिक्रिया

राहगीरों ने बिना देर किए सौरभ की मदद की और आपातकालीन सेवाओं को बुलाया। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर हमले की जांच शुरू की और कुछ संदिग्धों की पहचान भी की जा चुकी है। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और जांच जारी है।


सामुदायिक आक्रोश और सुरक्षा की मांग

यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे प्रवासी समुदाय की सुरक्षा पर सवाल है। एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी घटना है जिसमें भारतीय मूल के व्यक्ति को हिंसा का सामना करना पड़ा है। स्थानीय भारतीय संगठन, छात्र समुदाय और नागरिक समाज सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

मेलबर्न जैसे शहर में, जो विविधता और बहुसंस्कृति का प्रतीक माना जाता है, वहां ऐसी घटनाएं सामाजिक सहिष्णुता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।


निष्कर्ष

सौरभ आनंद की बहादुरी और जीवटता प्रशंसा के योग्य है, लेकिन यह घटना एक गहरी चेतावनी भी है – कि प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की ज़रूरत है। ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन को चाहिए कि वह अपराधियों को शीघ्र पकड़े और सुनिश्चित करे कि इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में दोहराई न जाएं।


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