ज़ेलेंस्की का बड़ा बयान: “रूस में सत्ता परिवर्तन जरूरी”, पश्चिम से की अपील

📍 कीव, यूक्रेन | 1 अगस्त 2025
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने एक बार फिर रूस के खिलाफ तीखा रुख अपनाते हुए पश्चिमी देशों से आग्रह किया है कि वे “रूस में सत्ता परिवर्तन” के प्रयासों का समर्थन करें। उन्होंने यह बयान हेलसिंकी समझौते की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक वर्चुअल सम्मेलन के दौरान दिया।
ज़ेलेंस्की ने कहा कि अगर रूस की मौजूदा शासन व्यवस्था को नहीं बदला गया, तो युद्ध समाप्त होने के बाद भी मास्को अपने पड़ोसी देशों को अस्थिर करने की कोशिश करता रहेगा। उन्होंने इसे “रूसी आक्रामकता” करार दिया और पश्चिमी देशों को चेताया कि केवल सैन्य जवाबी कार्रवाई से शांति नहीं लाई जा सकती।
आर्थिक प्रतिबंधों पर भी दिया ज़ोर
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की भी अपील की। उन्होंने कहा, “केवल रूसी संपत्तियों को फ्रीज़ करना पर्याप्त नहीं है, अब उन्हें जब्त करने का समय आ गया है।” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जब्त की गई रूसी संपत्तियों का उपयोग यूक्रेन की रक्षा और पुनर्निर्माण में किया जाना चाहिए।
रूस का पलटवार: “पश्चिम कर रहा है समझौतों का उल्लंघन”
इस बयान के जवाब में रूस ने पश्चिमी देशों पर हेलसिंकी समझौतों की मूल भावना — “समान और अविभाज्य सुरक्षा” — का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यूरोपीय संघ की तुलना “चौथे राइख” से करते हुए कहा कि पश्चिम रूसोफोबिया और सैन्यीकरण को बढ़ावा दे रहा है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी आरोप लगाया कि पश्चिमी सरकारें अपने नागरिकों को गुमराह कर रही हैं ताकि वे सैन्य बजट को बढ़ा सकें और घरेलू आर्थिक असफलताओं से ध्यान भटका सकें।
वार्ता की पेशकश, लेकिन शर्तों के साथ
इन तमाम आरोप-प्रत्यारोपों के बावजूद, मास्को ने एक बार फिर शांति वार्ता की इच्छा जताई है। रूस ने यह भी आरोप लगाया है कि यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों ने अब तक बातचीत में संघर्ष के असली कारणों — जैसे कि क्षेत्रीय विवाद — को नजरअंदाज किया है।
ज़ेलेंस्की की वैधता पर उठे सवाल
रूस ने राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उसका तर्क है कि ज़ेलेंस्की का पांच वर्षीय राष्ट्रपति कार्यकाल मई 2024 में समाप्त हो गया था, और उन्होंने अभी तक नए चुनाव नहीं कराए हैं।
निष्कर्ष:
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच सत्ता परिवर्तन की यह बहस अब केवल सैन्य या राजनीतिक नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। जहां ज़ेलेंस्की पश्चिमी समर्थन के ज़रिए रूस की शासन प्रणाली को बदलना चाहते हैं, वहीं मास्को इसे पश्चिमी हस्तक्षेप करार दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह टकराव संवाद में बदलता है या संघर्ष और गहराता है।
