कर्तव्य पथ के निर्माता: श्रमिकों का सम्मान, नया भारत की नींव

नई दिल्ली, अगस्त 2025:
भारत की राजधानी के केंद्र में बसे “कर्तव्य पथ” का नवीनीकरण न केवल एक भौतिक परिवर्तन है, बल्कि यह भारत की बदलती चेतना, उसके मूल्यों और निर्माण में योगदान देने वाले हर हाथ की सराहना का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक परियोजना के उद्घाटन से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा श्रमिकों से मिलना और उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित करना, एक अद्वितीय दृष्टिकोण का प्रतीक है—जहाँ श्रमिक केवल निर्माणकर्ता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के वास्तविक स्तंभ माने जाते हैं।
सम्मान की एक नई परिभाषा
प्रधानमंत्री ने जिस आत्मीयता और विनम्रता के साथ श्रमिकों से संवाद किया, वह भारतीय लोकतंत्र की उस भावना को दर्शाता है जिसमें हर नागरिक की भागीदारी मायने रखती है। पारंपरिक सोच में जहाँ श्रमिक अक्सर पर्दे के पीछे रह जाते हैं, वहीं मोदी का यह कदम श्रमिकों को मुख्यधारा में लाने की एक सशक्त पहल है।
कर्तव्य पथ: नाम में ही निहित है विचारधारा
राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ करना सिर्फ एक प्रतीकात्मक परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह भारत की नयी सोच को दर्शाता है—जहाँ राजशाही नहीं, बल्कि कर्तव्य और सेवा की भावना सर्वोपरि है। इस पथ पर चलने वाले हर नागरिक, अधिकारी और जनप्रतिनिधि को यह स्मरण कराता है कि वे जनता के सेवक हैं, शासक नहीं।
श्रमिक: केवल हाथ नहीं, बल्कि आत्मा हैं विकास की
कर्तव्य पथ के निर्माण में लगे मजदूरों ने न केवल पत्थर जोड़े, बल्कि उन्होंने सपनों की नींव रखी है। तेज़ धूप हो या बारिश, दिन-रात की मेहनत से जो पथ बना, वह आधुनिक भारत की उस भावना को मूर्त रूप देता है जिसमें हर परिश्रमी नागरिक का योगदान अमूल्य है।
एक नया सामाजिक संदेश
प्रधानमंत्री द्वारा श्रमिकों के साथ बैठकर भोजन करना, उनका आभार व्यक्त करना और उन्हें प्रशंसा पत्र देना, एक सामाजिक संदेश भी है—कि देश को आगे ले जाने में हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह कदम समाज को प्रेरित करता है कि श्रम का सम्मान केवल नीति में नहीं, व्यवहार में भी होना चाहिए।
निष्कर्ष
कर्तव्य पथ केवल एक भौगोलिक मार्ग नहीं, बल्कि यह भारत के भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी का श्रमिकों को केंद्र में रखकर दिया गया संदेश एक नए भारत की नींव है—जहाँ हर वर्ग, हर हाथ, हर श्रम की पहचान है, सम्मान है। यही है सच्चा राष्ट्रनिर्माण।
