फ़रवरी 14, 2026

भारत साइबर अपराधों से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम: सरकार ने संसद को दी जानकारी

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नई दिल्ली, 9 अगस्त 2025 — भारत का साइबर कानूनी ढांचा लगातार विकसित होते ऑनलाइन खतरों और साइबर अपराधों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और जीएसी, सीईआरटी-इन, आई4सी जैसी संस्थाओं के सहयोग से देश में एक मजबूत व्यवस्था स्थापित की गई है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में दी।

जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से उत्पन्न खतरों, खासकर डीपफेक्स—जिनमें नकली ऑडियो, वीडियो और टेक्स्ट शामिल होते हैं—के प्रति पूरी तरह सजग है। ऐसे फर्जी कंटेंट से व्यक्ति की गरिमा, प्रतिष्ठा और निजता पर गंभीर असर पड़ सकता है, साथ ही यह डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े करता है।

उन्होंने बताया कि डीपफेक्स और अन्य साइबर खतरों से निपटने के लिए भारत ने एक व्यापक कानूनी और संस्थागत ढांचा तैयार किया है। मौजूदा कानूनों के तहत पहचान की चोरी, प्रतिरूपण, निजता का उल्लंघन, अश्लील सामग्री का प्रसार जैसे अपराधों को दंडनीय बनाया गया है। साथ ही, संबंधित प्राधिकरणों को आपत्तिजनक सामग्री को ब्लॉक (धारा 69ए) और हटाने (धारा 79) का अधिकार भी दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021, जिसे 2022 और 2023 में अपडेट किया गया, डिजिटल प्लेटफॉर्म को अवैध सामग्री रोकने, उचित सतर्कता बरतने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपते हैं।

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 (डीपीडीपी एक्ट) के तहत डेटा फिड्यूशरी, जिसमें एआई कंपनियां भी शामिल हैं, को व्यक्तिगत डेटा को केवल कानूनी रूप से और उपयोगकर्ता की सहमति से ही प्रोसेस करना होगा। बिना अनुमति डीपफेक के जरिए व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल इस कानून के तहत दंडनीय है।

बीएनएस, 2023 के प्रावधान संगठित साइबर अपराध और फर्जी सूचना फैलाने के मामलों पर भी सख्त कार्रवाई की अनुमति देते हैं। इसके अलावा, सरकार ने दिसंबर 2023 और मार्च 2024 में मध्यस्थों को निर्देश जारी किए थे कि वे डीपफेक व प्रतिरूपण वाली सामग्री हटाएं, उपयोगकर्ताओं को भ्रामक सूचनाओं के बारे में सचेत करें और शिकायत निवारण प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करें।

सरकार का कहना है कि इन सभी कानूनी और तकनीकी उपायों के साथ, भारत एक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह साइबरस्पेस बनाए रखने में सक्षम है, जो नागरिकों की निजता और गरिमा की रक्षा करता है।


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