⚖️ POCSO केस में कोर्ट की कड़ी चेतावनी: IO पर वारंट और जुर्माना

नई दिल्ली स्थित एक विशेष POCSO अदालत ने जांच अधिकारी (IO) की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए उस पर ₹10,000 का जुर्माना और ₹5,000 का जमानती वारंट जारी किया। अदालत का यह कदम इसलिए उठा क्योंकि IO ने, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट समय पर मिलने के बावजूद, पूरक चार्जशीट दाखिल नहीं की थी।
🧩 केस की पृष्ठभूमि
सितंबर 2023 में हुई एक घटना में एक नाबालिग लड़की ने अपने पिता, चाचा और दादा पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे।
जनवरी 2024 में इस मामले की FIR दर्ज हुई और वर्तमान में तीनों आरोपी अग्रिम जमानत पर हैं।
अदालत को बताया गया कि FSL रिपोर्ट अप्रैल 2025 में ही पुलिस कांस्टेबल के पास पहुँच गई थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट में इसे समय पर जमा नहीं किया गया।
🏛️ अदालत की प्रतिक्रिया
विशेष न्यायाधीश मोना टार्डी केरकेट्टा ने IO की कार्यशैली को “गैर-जिम्मेदाराना” बताया और कहा कि ऐसे विलंब से मुकदमे की सुनवाई अनावश्यक रूप से लंबी हो जाती है, जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
बचाव पक्ष की अधिवक्ता अदिति ड्राल ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष अब भी सबूतों की समीक्षा में था, लेकिन न्यायालय ने इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया।
📜 आदेश के बाद की कार्रवाई
कोर्ट के आदेश के कुछ घंटे बाद ही IO व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुआ और पूरक चार्जशीट के साथ FSL रिपोर्ट व अन्य साक्ष्य पेश कर दिए।
इन दस्तावेजों को कोर्ट रजिस्ट्री में दर्ज किया गया।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की गई है।
🔍 मुख्य संदेश
यह प्रकरण बताता है कि POCSO जैसे संवेदनशील मामलों में समय पर कार्रवाई बेहद ज़रूरी है। देरी न केवल पीड़ित की मानसिक स्थिति पर असर डालती है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर जनता के विश्वास को भी कमज़ोर करती है। अदालत का यह आदेश एक स्पष्ट चेतावनी है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वह किसी भी स्तर पर हो।
