गाज़ा में स्थायी शांति के लिए मैक्रों का अंतरराष्ट्रीय गठबंधन प्रस्ताव

पेरिस, 13 अगस्त 2025 – फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गाज़ा पट्टी में इज़राइल की सैन्य कार्रवाई को “एक गंभीर मानवीय आपदा” बताते हुए, संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि यह मिशन क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने और दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
मैक्रों का यह बयान उस समय आया है, जब इज़राइल गाज़ा शहर पर अपना नियंत्रण मज़बूत करने और मावासी शिविरों का विस्तार करने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति “इतिहास में अभूतपूर्व मानवीय संकट” पैदा कर सकती है और “संघर्ष को स्थायी युद्ध” में बदलने का खतरा बढ़ा सकती है।
पिछले सप्ताह, इज़राइल की सुरक्षा कैबिनेट ने गाज़ा के उत्तरी इलाकों में सैन्य अभियानों के बाद गाज़ा शहर पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने का निर्णय लिया था। इस कदम को लेकर घरेलू और वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। मैक्रों ने कहा कि “गाज़ा के नागरिक” और “इज़राइल के बंधक” दोनों ही इस रणनीति के प्रत्यक्ष पीड़ित हैं।
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने मैक्रों के बयान पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की, हालांकि नेतन्याहू ने हालिया प्रेस वार्ता में कहा था कि इज़राइल “संयमित लेकिन आवश्यक बल” का प्रयोग कर रहा है और “हमास का अंत करना ही एकमात्र विकल्प” है। उनके अनुसार, फिलहाल इज़राइल गाज़ा के लगभग 70-75% हिस्से पर सैन्य नियंत्रण बनाए हुए है, जबकि गाज़ा शहर और अल मावासी के केंद्रीय शिविर जैसे कुछ इलाक़े अभी भी मज़बूत प्रतिरोध केंद्र बने हुए हैं।
मैक्रों का यह प्रस्ताव संघर्ष समाधान के प्रयासों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। उन्होंने सुरक्षा परिषद से अपील की कि वह संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाले इस मिशन को अधिकृत करने के लिए ठोस कदम उठाए। साथ ही, उन्होंने ब्रिटेन, कनाडा और अन्य सहयोगी देशों को भी इस विषय पर चर्चा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
उनका मानना है कि संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में होने वाला यह अभियान गाज़ा में स्थिरता और सुरक्षा लाने में निर्णायक सिद्ध हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब मानवीय संकट गहराता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के स्थायी समाधान की तलाश में है। अब वैश्विक प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि यह पहल गाज़ा में शांति बहाली की दिशा में कितनी सफल होती है।
