एंथ्रेक्स : पशुओं से फैलने वाली घातक बीमारी और बचाव के उपाय

प्रस्तावना
एंथ्रेक्स (Anthrax) एक संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से पशुओं में पाया जाता है, लेकिन यह मनुष्यों को भी प्रभावित कर सकता है। इसे गिल्टी रोग भी कहा जाता है। यह बीमारी बेसिलस एन्थ्रेसिस (Bacillus Anthracis) नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय समय-समय पर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाता है, ताकि किसान, पशुपालक और आम नागरिक इसकी गंभीरता को समझें और समय पर बचाव कर सकें।
एंथ्रेक्स कैसे फैलता है?
एंथ्रेक्स मुख्य रूप से पशुओं के माध्यम से फैलता है। गाय, भैंस, बकरी और भेड़ जैसे जानवर इससे संक्रमित हो सकते हैं। संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने या उनके मांस, खाल अथवा उत्पादों को छूने से यह मनुष्यों में भी फैल जाता है। यह रोग सीधे-सीधे ज़ूनोटिक (पशु से मानव में फैलने वाला) संक्रमण का उदाहरण है।
बीमारी के लक्षण
मनुष्यों में
- खुजलीदार फोड़े या घाव
- तेज बुखार और कंपकंपी
- सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द
- खून की उल्टी या दस्त
- सांस लेने में कठिनाई
- पेट में तीव्र दर्द
पशुओं में
- अचानक मृत्यु
- नाक और मुंह से खून निकलना
- चारा खाने से परहेज़ करना
- सुस्ती और कमजोरी
बचाव के उपाय
- संक्रमित पशुओं से दूरी रखें – यदि पशु बीमार या मृत हो जाए तो उसे बिना सुरक्षा के हाथ न लगाएँ।
- सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करें – बीमार पशुओं की देखभाल करते समय दस्ताने, मास्क और सुरक्षात्मक कपड़े पहनना जरूरी है।
- मांस और दूध का सेवन – केवल अच्छी तरह पकाए गए मांस और उबाले हुए दूध का ही सेवन करें।
- टीकाकरण – पशुओं का समय-समय पर टीकाकरण कराना एंथ्रेक्स से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
- स्वास्थ्य जांच – यदि मनुष्य में ऊपर बताए गए लक्षण दिखें तो तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाँच कराएँ।
निष्कर्ष
एंथ्रेक्स एक खतरनाक लेकिन रोके जाने योग्य बीमारी है। समय पर सावधानी और पशुओं की सही देखभाल से इसे फैलने से रोका जा सकता है। किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही सलाहों का पालन कर हम स्वयं और अपने पशुओं को इस बीमारी से सुरक्षित रख सकते हैं।
👉 संदेश स्पष्ट है: “सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और स्वास्थ्य विशेषज्ञ से समय पर परामर्श लें।”
