यूरोप में भीषण जंगल की आग: जलवायु संकट की चेतावनी

ब्रसेल्स, अगस्त 2025
यूरोप इस समय अपनी आधुनिक इतिहास की सबसे खतरनाक आग की आपदा से गुजर रहा है। तेज़ होती गर्मी, लंबे समय से जारी सूखा और बदलता मौसम लाखों एकड़ ज़मीन को जलने के लिए मजबूर कर रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह आपदा केवल प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन की गंभीर देन है।
दक्षिणी यूरोप सबसे प्रभावित
पुर्तगाल, स्पेन, इटली और ग्रीस की पहाड़ियाँ और जंगल सबसे ज्यादा तबाही झेल रहे हैं। हजारों परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। दमकलकर्मी और सैनिक चौबीसों घंटे आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तेज़ हवाएँ और सूखी ज़मीन आग को और भड़काती जा रही हैं।
आँकड़े डराने वाले
यूरोपीय वनाग्नि निगरानी तंत्र (EFFIS) के अनुसार, सिर्फ इस साल अगस्त तक जली हुई भूमि का क्षेत्र पिछले 20 वर्षों के औसत से लगभग दोगुना हो गया है। अब तक 1,600 से अधिक बड़ी आग दर्ज की जा चुकी हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहद अधिक है।
उत्तर और मध्य यूरोप भी खतरे में
पहले जहाँ आग की घटनाएँ केवल दक्षिणी हिस्सों तक सीमित रहती थीं, वहीं अब जर्मनी, पोलैंड और फ्रांस के उत्तरी इलाके भी खतरे में हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम के असामान्य पैटर्न के चलते आग अब ऐसे क्षेत्रों तक पहुँच रही है, जहाँ पहले यह आम नहीं थी।
दीर्घकालिक समाधान की अनिवार्यता
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि केवल तात्कालिक राहत और आग बुझाने के प्रयास काफी नहीं होंगे। यूरोप को व्यापक रणनीति अपनानी होगी, जिसमें शामिल हों:
- जंगलों की बेहतर देखरेख और आग रोकने की तकनीक।
- जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी।
- स्थानीय समुदायों के लिए प्रशिक्षण और सुरक्षा प्रबंधन।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संसाधनों की साझेदारी।
निष्कर्ष
यूरोप में फैलती यह आग केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानव गतिविधियों से उपजे जलवायु संकट का गम्भीर संकेत है। यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में आग और भी विनाशकारी रूप ले सकती है।
