फ़रवरी 14, 2026

भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार 2032 तक पहुंचेगा 100 अरब डॉलर के आंकड़े पर

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नई दिल्ली, 18 अगस्त 2025 – भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग आने वाले वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज करने जा रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में 34.3 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य वाला यह बाज़ार 2032 तक बढ़कर लगभग 100.2 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है। यानी अगले नौ वर्षों में इसमें तीन गुना से अधिक वृद्धि की संभावना है, जो 20% की वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की भूमिका

विश्व स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग का आकार 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जिसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र पहले से ही 60% से अधिक उत्पादन के साथ प्रमुख स्थान रखता है। इस परिदृश्य में भारत अपनी क्षमता और नीतिगत पहलों के कारण एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है।

2022 में भारत ने लगभग 516 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के सेमीकंडक्टर उपकरणों का निर्यात किया। इनमें अमेरिका, हांगकांग और दक्षिण अफ्रीका प्रमुख गंतव्य रहे। हालांकि, चीन, सिंगापुर और वियतनाम अब भी बड़े आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं।

बढ़ती मांग के प्रमुख क्षेत्र

भारत में सेमीकंडक्टर की मांग का बड़ा हिस्सा टेलीकॉम, आईटी, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक क्षेत्रों से आने की संभावना है। इसके अलावा, 5G तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) और स्मार्ट उपकरणों का प्रसार इस मांग को और गति देगा।

सरकार की पहल और निवेश

इस तेज़ी को बनाए रखने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया है। इस योजना के तहत 10 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रोत्साहन राशि तय की गई है, जिसका उद्देश्य एक मजबूत और टिकाऊ सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले इकोसिस्टम तैयार करना है।

इस योजना के अंतर्गत:

  • परियोजना लागत पर 50% तक प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • सेमीकंडक्टर व डिस्प्ले फैब की स्थापना के लिए पूंजीगत सहायता दी जाएगी।
  • असेम्बली, टेस्टिंग, पैकेजिंग और मार्किंग सुविधाओं को भी वित्तीय मदद मिलेगी।

इसके साथ ही, सरकार ने डिज़ाइन-लिंक्ड इंसेंटिव प्रोग्राम भी लागू किया है, ताकि देश में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन कंपनियों को प्रोत्साहित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, 85,000 कुशल पेशेवरों के प्रशिक्षण के लिए भी एक बड़ी पहल की गई है।

निष्कर्ष

भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार आने वाले समय में न केवल घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी अहम स्थान बनाएगा। तकनीकी नवाचारों, सरकारी नीतियों और उद्योग जगत की भागीदारी के चलते 2032 तक भारत इस क्षेत्र में एक बड़ा शक्ति केंद्र बन सकता है।


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