भारत-फ्रांस संबंध: शांति, व्यापार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सहयोग का नया आयाम

21 अगस्त 2025 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता ने द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊर्जा प्रदान की है। यह बैठक केवल भारत और फ्रांस के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में स्थिरता, विकास और तकनीकी प्रगति की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
🌍 यूक्रेन संकट पर साझा दृष्टिकोण: टिकाऊ शांति की पहल
वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध के समाधान में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि किसी भी समझौते में यूरोप की सुरक्षा और यूक्रेन की संप्रभुता सुनिश्चित होना अनिवार्य है। यह रुख बताता है कि भारत और फ्रांस केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि विश्व शांति के लिए भी जिम्मेदार भूमिका निभाना चाहते हैं।
🤝 व्यापार और रणनीतिक सहयोग: आत्मनिर्भरता की ओर
आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी खास जोर दिया गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि साझेदारी केवल व्यापारिक लेन-देन तक सीमित न रहकर रणनीतिक स्वतंत्रता और संप्रभुता को प्राथमिकता देगी। इससे रिश्तों में दीर्घकालिक भरोसा और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
🤖 कृत्रिम बुद्धिमत्ता में प्रगति: नई दिल्ली AI Impact Summit 2026
तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर, भारत और फ्रांस ने संयुक्त प्रयासों को और बढ़ाने का निर्णय लिया। इसी कड़ी में फरवरी 2026 में नई दिल्ली में होने वाला AI Impact Summit महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। इसमें वैश्विक विशेषज्ञ नैतिकता, नवाचार और नीतिगत चुनौतियों पर चर्चा करेंगे, जिसमें भारत और फ्रांस अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
🌐 बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी: G7 और BRICS में समन्वय
2026 में फ्रांस G7 की अध्यक्षता करेगा और भारत BRICS का नेतृत्व करेगा। इस परिप्रेक्ष्य में दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी मानक और न्यायपूर्ण शासन जैसे मुद्दों पर सामूहिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। यह समन्वय बहुपक्षीय सहयोग की नई मिसाल बनेगा।
निष्कर्ष
भारत और फ्रांस की यह उच्चस्तरीय वार्ता महज़ एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक चुनौतियों का संयुक्त समाधान खोजने की गंभीर पहल है। शांति, व्यापार, तकनीकी नवाचार और बहुपक्षीय नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में यह साझेदारी आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दे सकती है। स्पष्ट है कि भारत और फ्रांस अब केवल रणनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि वैश्विक परिवर्तन के सह-आयोजक बन रहे हैं।
