सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली में शुरू हुआ नसबंदी और टीकाकरण अभियान

नई दिल्ली, 27 अगस्त 2025
दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए आवारा कुत्तों के लिए व्यापक नसबंदी और टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। यह कदम एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम 2023 के तहत उठाया गया है। अदालत ने साफ कहा है कि सभी आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बाद ही उन्हें छोड़ा जाए, केवल वे कुत्ते जिनमें रेबीज़ के लक्षण हैं या जो अत्यधिक आक्रामक हैं, उन्हें सड़क पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
लखनऊ मॉडल बना राष्ट्रीय मानक
सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के ABC प्रोग्राम को पूरे देश के लिए आदर्श मॉडल बताया है। यह मॉडल “पकड़ो, नसबंदी करो, टीका लगाओ और छोड़ दो” (Capture, Sterilise, Vaccinate & Release) की नीति पर आधारित है। इसे मानवीय, वैज्ञानिक और प्रभावी तरीका माना गया है।
दिल्ली में व्यवस्था
दिल्ली में वर्तमान में 78 सरकारी पशु चिकित्सालय हैं, जिनमें से 24 को विशेष रूप से टीकाकरण केंद्रों में बदला जाएगा। नगर निगमों को आदेश दिया गया है कि वे आवारा कुत्तों के लिए भोजन केंद्र और हेल्पलाइन भी स्थापित करें, ताकि कुत्तों की देखभाल और प्रबंधन व्यवस्थित तरीके से हो सके।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश
तीन जजों की पीठ – जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजरिया – ने यह स्पष्ट किया है कि:
- जिन कुत्तों में रेबीज़ के लक्षण हैं या वे आक्रामक हैं, उन्हें किसी भी स्थिति में सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा।
- ऐसे कुत्तों को अलग शेल्टर या पशु आश्रय गृहों में रखा जाएगा।
- अन्य सभी कुत्तों को नसबंदी, कीड़े निकालने (Deworming) और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।
चुनौती और समाधान
2016 के एक सर्वे के अनुसार, दिल्ली में लगभग 8 लाख आवारा कुत्ते हैं। इतनी बड़ी संख्या को नियंत्रित करने के लिए सरकार को एनजीओ, निजी पशु चिकित्सकों और स्वयंसेवकों की मदद लेनी होगी। अदालत ने यह भी कहा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस दिशा में एक समान नीति बनानी होगी, ताकि पूरे देश में आवारा कुत्तों का मानवीय और वैज्ञानिक प्रबंधन हो सके।
निष्कर्ष
दिल्ली में यह अभियान न केवल आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करेगा, बल्कि लोगों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी मजबूत करेगा। यह कदम इंसान और जानवर, दोनों के लिए संतुलित सह-अस्तित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
