जीएसटी सुधार : निर्मला सीतारमण की पहल से आम लोगों तक सीधी राहत

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2025 – वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी सुधारों का मूल लक्ष्य केवल कर संग्रह बढ़ाना नहीं है, बल्कि टैक्स व्यवस्था को इतना आसान और न्यायपूर्ण बनाना है कि हर उपभोक्ता को इसका सीधा लाभ मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्यान उन वर्गों पर है जिन पर महँगाई का बोझ सबसे अधिक पड़ता है।
आम जनता और उपभोक्ता केंद्रित सुधार
वित्त मंत्री ने बताया कि रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुएँ जैसे – अनाज, दवाइयाँ और घरेलू सामान – निचले टैक्स स्लैब में रखी गई हैं। आज अधिकांश वस्तुओं पर 5% या उससे कम कर लगाया जा रहा है। केवल लग्ज़री प्रोडक्ट्स और गैर-ज़रूरी सामान को ऊँचे स्लैब में रखा गया है ताकि आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
उद्योग जगत की जिम्मेदारी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि टैक्स में की गई कटौती का वास्तविक लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचना चाहिए। यदि कंपनियाँ इस राहत को केवल अपने मुनाफ़े तक सीमित रखेंगी, तो सरकार कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। सीतारमण ने कहा – “यह सुधार तभी सार्थक होंगे जब इसका असर सीधे बाज़ार के दामों पर दिखे।”
राजनीतिक तकरार पर जवाब
अपने बयान में वित्त मंत्री ने विपक्ष को भी घेरा। उन्होंने कहा कि कुछ दलों ने कभी जीएसटी को “गब्बर सिंह टैक्स” कहकर इसकी आलोचना की थी, लेकिन आज वही लोग इसमें सुधार का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। सीतारमण के अनुसार, यह बदलाव राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि जनता की राहत के लिए किए जा रहे हैं।
56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक के प्रमुख निर्णय
हाल ही में संपन्न हुई जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए:
- 12% वाले टैक्स स्लैब को समाप्त कर संरचना को सरल किया गया।
- 5% और 18% स्लैब को बरकरार रखा गया।
- टैक्स प्रक्रियाओं को पारदर्शी और तकनीकी रूप से अधिक सुविधाजनक बनाने पर ज़ोर दिया गया।
निष्कर्ष
निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत यह सुधार केवल कर नीति का बदलाव नहीं, बल्कि आर्थिक समानता की दिशा में एक ठोस कदम है। इसका वास्तविक असर उस आम उपभोक्ता तक पहुँचेगा जो रोज़मर्रा के सामान पर खर्च करते समय हर छोटे बदलाव को महसूस करता है। सरकार का लक्ष्य है कि जीएसटी सुधार केवल नीतिगत घोषणा न रह जाएँ, बल्कि देश के हर नागरिक के जीवन में राहत और सरलता लेकर आएँ।
