फ़रवरी 15, 2026

पूर्वोत्तर में नई उड़ान: डिब्रूगढ़ की आपातकालीन लैंडिंग सुविधा और विकास का व्यापक विज़न

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भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में अवसंरचना सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा, जब प्रधानमंत्री ने असम के में भारतीय वायुसेना के सहयोग से तैयार आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ELF) का उद्घाटन किया। यह पहल न केवल सामरिक तैयारी को मजबूती देती है, बल्कि आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास के नए आयाम भी खोलती है।


आपातकालीन लैंडिंग सुविधा: रणनीतिक और मानवीय दोनों दृष्टि से अहम

डिब्रूगढ़ में निर्मित यह आपातकालीन लैंडिंग सुविधा पूर्वोत्तर भारत के लिए अपनी तरह की पहली व्यवस्था है। इसे इस प्रकार विकसित किया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर सैन्य और नागरिक—दोनों प्रकार के विमान यहाँ सुरक्षित रूप से उतर और उड़ान भर सकें।

  • यहाँ लगभग 40 टन तक के लड़ाकू विमानों और 74 टन तक के भारी परिवहन विमानों का संचालन संभव है।
  • सीमावर्ती और संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह सुविधा राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को अधिक चुस्त और प्रभावी बनाएगी।
  • बाढ़, भूकंप या भूस्खलन जैसी आपदाओं के दौरान राहत सामग्री, चिकित्सा दल और बचाव उपकरण त्वरित रूप से प्रभावित इलाकों तक पहुँचाए जा सकेंगे।

पूर्वोत्तर क्षेत्र हर वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से जूझता है। ऐसे में यह लैंडिंग सुविधा संकट के समय जीवनरेखा साबित हो सकती है।


5,450 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएँ: शिक्षा और संपर्क को प्राथमिकता

असम दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने लगभग ₹5,450 करोड़ की अन्य विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन पहलों का उद्देश्य क्षेत्र को दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक मजबूती देना है।

1. आईआईएम गुवाहाटी

के उद्घाटन से पूर्वोत्तर में उच्च प्रबंधन शिक्षा की पहुँच बढ़ेगी। इससे क्षेत्र के युवाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा तथा स्थानीय उद्योगों को प्रशिक्षित नेतृत्व प्राप्त होगा।

2. कुमार भास्कर वर्मा सेतु

ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित गुवाहाटी और आसपास के इलाकों के बीच संपर्क को और सुगम बनाएगा। इससे व्यापार, पर्यटन और स्थानीय आवागमन को गति मिलेगी।
विशेष रूप से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।


व्यापक प्रभाव: सुरक्षा से लेकर समावेशी विकास तक

इन परियोजनाओं का महत्व केवल संरचनात्मक विकास तक सीमित नहीं है।

  • सामरिक दृष्टि से पूर्वोत्तर की स्थिति को अधिक मज़बूती मिलेगी।
  • आपदा प्रबंधन तंत्र को नई तकनीकी और संचालनात्मक क्षमता प्राप्त होगी।
  • शिक्षा, व्यापार और पर्यटन क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न होंगे।
  • राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ाव और क्षेत्रीय संतुलित विकास की दिशा में ठोस प्रगति होगी।

पूर्वोत्तर लंबे समय तक भौगोलिक दूरी और सीमित संसाधनों की चुनौतियों का सामना करता रहा है। अब आधुनिक अवसंरचना के माध्यम से इसे देश की प्रगति के केंद्र में लाने का प्रयास तेज़ होता दिख रहा है।


निष्कर्ष

डिब्रूगढ़ की आपातकालीन लैंडिंग सुविधा और असम में प्रारंभ की गई अन्य परियोजनाएँ पूर्वोत्तर भारत के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध हो सकती हैं। यह पहल केवल कंक्रीट और संरचनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्र के आत्मविश्वास, सुरक्षा और विकास को नई दिशा देने का संकल्प है।

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