✨ यूरोपीय रक्षा उद्योग कार्यक्रम: सुरक्षा और शांति का नया अध्याय

यूरोपीय संघ ने 17 अक्टूबर 2025 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए “यूरोपीय रक्षा उद्योग कार्यक्रम” (European Defence Industry Programme) को स्वीकृति प्रदान की है। इस पहल के अंतर्गत €1.5 बिलियन (लगभग ₹13,500 करोड़) का निवेश किया जाएगा, जिसका उद्देश्य यूरोप की रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करना और यूक्रेन को सामरिक सहयोग प्रदान करना है। यह निर्णय केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि यूरोप की दीर्घकालिक शांति नीति का भी प्रतीक है।
🔍 प्रमुख बिंदु और लक्ष्य
- निवेश और नवाचार: इस कार्यक्रम के तहत यूरोप के रक्षा उद्योग में निवेश से नई तकनीकों का विकास, उत्पादन क्षमता का विस्तार और आधुनिक हथियार प्रणालियों की आपूर्ति को गति मिलेगी।
- यूक्रेन के लिए सहायता: यूक्रेन को सैन्य सहयोग देकर उसकी सुरक्षा और संप्रभुता को मज़बूती प्रदान करना भी इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
- 2030 तक आत्मनिर्भर रक्षा ढांचा: यूरोपीय संघ ने ‘Preserving Peace 2030’ रोडमैप के तहत अगले पाँच वर्षों में संपूर्ण रक्षा तत्परता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
🕊️ “शांति में निवेश” की अवधारणा
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा,
“जब हम रक्षा में निवेश करते हैं, तब हम दरअसल शांति में निवेश कर रहे होते हैं।”
यह वक्तव्य स्पष्ट करता है कि यूरोप अब केवल बाहरी खतरों पर प्रतिक्रिया करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह सक्रिय और दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।
🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महत्व
- भू-राजनीतिक संतुलन की दिशा में कदम: रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच यह कार्यक्रम यूरोप को अधिक रणनीतिक आत्मनिर्भरता प्रदान करेगा।
- औद्योगिक और आर्थिक प्रभाव: रक्षा क्षेत्र में निवेश से तकनीकी नवाचार, उद्योग विस्तार और नए रोज़गार अवसरों का सृजन भी संभव होगा, जिससे यूरोपीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।
🇪🇺 यूरोपीय एकता और नेतृत्व का प्रदर्शन
इस कार्यक्रम को डेनमार्क की अध्यक्षता में यूरोपीय परिषद (@eu2025dk) द्वारा पारित किया गया। यह निर्णय सदस्य देशों के बीच सामूहिक सहयोग, साझा जिम्मेदारी और एकीकृत सुरक्षा दृष्टिकोण का उदाहरण है।
🔔 निष्कर्ष
“यूरोपीय रक्षा उद्योग कार्यक्रम” केवल सैन्य शक्ति बढ़ाने की पहल नहीं है — यह यूरोप की शांति, एकता और आत्मनिर्भरता के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह कदम न केवल महाद्वीप की सुरक्षा रणनीति को पुनर्परिभाषित करता है, बल्कि वैश्विक स्थायित्व की दिशा में भी एक दूरदर्शी निवेश साबित हो सकता है।
