फ़रवरी 14, 2026

उत्तर प्रदेश में कफ सिरप के नाम पर महाघोटाला: ईडी की जांच से फर्जी कंपनियों का जाल बेनकाब

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उत्तर प्रदेश में कफ सिरप के कारोबार की आड़ में चल रहे एक संगठित आर्थिक अपराध ने देश की जांच एजेंसियों और आम जनता दोनों को चौंका दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की व्यापक कार्रवाई में यह खुलासा हुआ है कि सैकड़ों फर्जी कंपनियों के जरिए अवैध धन को वैध दिखाने का खेल लंबे समय से चल रहा था। यह मामला अब देश के सबसे बड़े फार्मा-आधारित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में गिना जा रहा है।

कागजों पर कारोबार, हकीकत में मनी लॉन्ड्रिंग

ईडी की जांच में सामने आया है कि कफ सिरप के उत्पादन और आपूर्ति के नाम पर जो व्यापार दिखाया जा रहा था, वह असल में सिर्फ कागजी था। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ गुजरात और झारखंड में की गई लंबी छापेमारी के दौरान यह पाया गया कि सैकड़ों कंपनियां केवल नाम मात्र की थीं। न इनके कार्यालय सक्रिय थे और न ही वास्तविक उत्पादन, लेकिन इनके बैंक खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन दर्ज था।

700 से अधिक फर्जी कंपनियों का नेटवर्क

जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में 700 से ज्यादा फर्जी फर्में शामिल थीं, जिन्हें अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत कराया गया था। लगभग 220 लोगों की पहचान ऐसे संचालकों के रूप में हुई है, जिनके नाम पर ये कंपनियां बनाई गईं। इन फर्मों का इस्तेमाल नकली बिलिंग, फर्जी खरीद-बिक्री और संदिग्ध फंड ट्रांसफर के लिए किया जा रहा था।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल

घोटाले के सामने आते ही राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले में सत्ता पक्ष पर अप्रत्यक्ष संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए संकेत दिया कि इस घोटाले के तार राजनीतिक प्रभाव से जुड़े हो सकते हैं। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से इन आरोपों को निराधार बताया गया है।

ईडी की जांच अब निर्णायक मोड़ पर

प्रवर्तन निदेशालय अब इस रैकेट से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और वास्तविक लाभार्थियों की परत-दर-परत जांच कर रहा है। एजेंसी का फोकस इस बात पर है कि आखिर इस पूरे नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था और अवैध कमाई का अंतिम उपयोग कहां किया गया। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा

यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है। नकली या संदिग्ध गुणवत्ता वाले कफ सिरप का बाजार में पहुंचना आम लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए बड़ा स्वास्थ्य जोखिम बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में ड्रग कंट्रोल विभाग और स्वास्थ्य एजेंसियों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।

निष्कर्ष

कफ सिरप घोटाले ने यह साफ कर दिया है कि दवा उद्योग में निगरानी और पारदर्शिता की कितनी सख्त जरूरत है। ईडी की कार्रवाई से एक विशाल फर्जी नेटवर्क जरूर सामने आया है, लेकिन जनता का भरोसा तभी लौटेगा जब दोषियों को कड़ी सजा मिले और दवा आपूर्ति प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए।


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