अमेरिका में अवैध प्रवासन को लेकर सियासी आमना-सामना: दो दल, दो अलग रास्ते

अमेरिका में अवैध प्रवासियों का मुद्दा एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में प्रवासन नियमों को और सख्त करते हुए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी और निर्वासन की कार्रवाई शुरू की गई है। इस कदम ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट शासित राज्यों के बीच न केवल प्रशासनिक मतभेद बढ़ा दिए हैं, बल्कि यह टकराव अब सामाजिक तनाव का रूप भी लेने लगा है।
रिपब्लिकन राज्यों की सख्ती और एजेंसियों का तालमेल
टेक्सास, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, टेनेसी और लुइसियाना जैसे रिपब्लिकन शासित राज्यों में संघीय आव्रजन एजेंसी ICE को स्थानीय कानून-व्यवस्था तंत्र का खुला समर्थन मिल रहा है। इन राज्यों ने प्रवासन कानून लागू करने के लिए स्थानीय पुलिस और जेल प्रशासन को सक्रिय भूमिका सौंपी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में इन इलाकों से एक लाख पचास हजार से अधिक अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया गया। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की बताई जा रही है, जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे—जैसे हत्या, यौन अपराध, अपहरण या ड्रग्स से जुड़ी गतिविधियाँ।
इन राज्यों में 287(g) कार्यक्रम के तहत स्थानीय अधिकारियों को प्रवासन जांच की कानूनी शक्ति दी गई है। इसका असर यह हुआ कि अधिकांश गिरफ्तारियाँ जेल परिसरों के भीतर ही हुईं, जिससे सड़कों पर टकराव, विरोध-प्रदर्शन और हिंसा की आशंका अपेक्षाकृत कम रही।
डेमोक्रेट शासित क्षेत्रों का विरोध और टकराव
इसके उलट, कैलिफ़ोर्निया, न्यूयॉर्क और अन्य डेमोक्रेट प्रभाव वाले राज्यों और शहरों ने खुद को ‘सैंक्चुअरी क्षेत्र’ घोषित किया है। यहां स्थानीय प्रशासन ने ICE को सहयोग देने से साफ इनकार कर दिया है। नतीजतन, संघीय एजेंसियों को सार्वजनिक स्थलों, बाजारों और कार्यस्थलों पर सीधे कार्रवाई करनी पड़ रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इन इलाकों में अधिकांश गिरफ्तारियाँ खुले स्थानों पर हुईं और इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। यही बात प्रशासनिक कदम को लेकर सबसे बड़ा विवाद बन गई है।
इन कार्रवाइयों के खिलाफ कई शहरों में प्रदर्शन और रैलियाँ देखी गईं। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय नेताओं ने इसे “निर्दयी नीति” बताते हुए आम नागरिकों में भय का माहौल पैदा होने की बात कही है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी सार्वजनिक गिरफ्तारी की रणनीति को राजनीतिक रूप से नुकसानदेह बताया है।
राष्ट्रीय राजनीति और सामाजिक प्रभाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने अवैध प्रवासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सीमाओं की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है। 2025 के संघीय बजट में ICE की क्षमता बढ़ाने के लिए हज़ारों नए एजेंटों की भर्ती और अतिरिक्त संसाधनों का प्रावधान किया गया है।
लेकिन इस नीति का असर केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका का समाज इस मुद्दे पर दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है—एक वर्ग इसे देश की सुरक्षा और कानून के पालन के लिए अनिवार्य मानता है, जबकि दूसरा वर्ग इसे मानवाधिकारों और सामाजिक मूल्यों के विरुद्ध करार दे रहा है।
निष्कर्ष
अवैध प्रवासन पर अमेरिका की मौजूदा रणनीति अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रह गई है। यह मुद्दा संघीय सरकार, राज्यों और आम नागरिकों के बीच गहरे मतभेद का कारण बन चुका है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट शासित क्षेत्रों की नीतियों में साफ अंतर दिखाई दे रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति और समाज—दोनों पर पड़ना तय है।
