फ़रवरी 12, 2026

रूस की ऊर्जा आय पर ज़ेलेंस्की की दो-टूक चेतावनी: युद्ध की आर्थिक रीढ़ को निशाना

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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने हालिया बयान में रूस–यूक्रेन संघर्ष के उस पहलू को सामने रखा है जिस पर अक्सर हथियारों और मोर्चों की चर्चा के बीच कम ध्यान जाता है—युद्ध की आर्थिक नींव। ज़ेलेंस्की के अनुसार रूस का तेल और गैस क्षेत्र केवल कमाई का साधन नहीं है, बल्कि वही संसाधन इस युद्ध को लगातार ऊर्जा प्रदान कर रहा है।

ऊर्जा से हथियार तक की श्रृंखला

ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि रूस को निर्यात होने वाले तेल और प्राकृतिक गैस से मिलने वाली आमदनी सीधे तौर पर सैन्य तंत्र को मज़बूत करती है। यही धन टैंकों, मिसाइलों और ड्रोन के निर्माण व आपूर्ति में बदल जाता है। उनका तर्क है कि जब तक यह आर्थिक प्रवाह जारी रहेगा, तब तक युद्ध को पूरी तरह रोकना मुश्किल होगा।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए संदेश

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने वैश्विक शक्तियों और साझेदार देशों से अपील की कि वे युद्ध को केवल मानवीय या सैन्य संकट के रूप में न देखें, बल्कि इसे आर्थिक समर्थन के ढांचे से भी जोड़कर समझें। उनके अनुसार रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करना सिर्फ एक नीतिगत फैसला नहीं, बल्कि शांति की दिशा में ठोस कदम है।

प्रतिबंधों की सीमाएँ और चुनौतियाँ

ज़ेलेंस्की ने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। कई देश अब भी रूसी ऊर्जा खरीद रहे हैं, जिससे प्रतिबंधों का प्रभाव कमजोर पड़ता है। उन्होंने जोर दिया कि आधे-अधूरे आर्थिक कदम रूस पर वास्तविक दबाव नहीं बना पाते।

युद्ध की दिशा बदलने की कोशिश

ज़ेलेंस्की का यह बयान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह युद्ध की बहस को मोर्चे से निकालकर बाजार और ऊर्जा नीति तक ले जाता है। उनका मानना है कि यदि रूस की ऊर्जा आय को निर्णायक रूप से घटाया जाए, तो युद्ध की गति और क्षमता दोनों पर गहरा असर पड़ेगा।

निष्कर्ष

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की का संदेश साफ है—जब तक युद्ध को चलाने वाली आर्थिक धमनियाँ सक्रिय हैं, तब तक स्थायी शांति मुश्किल है। रूस की ऊर्जा कमाई पर लगाम कसना उनके अनुसार केवल आर्थिक कार्रवाई नहीं, बल्कि युद्ध समाप्ति की दिशा में एक निर्णायक हस्तक्षेप है।


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